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लखनऊ। मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी का इलाज अब छह महीने नियमित दवाएं खाने से हो सकेगा। अभी तक इसके लिए 20 महीने दवाएं खानी पड़ती थीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी के बाद उपचार की नई पद्धति राजधानी में भी शुरू हो गई है। यह जानकारी नार्थ जोन टीबी टास्क फोर्स के चेयरमैन डॉ. सूर्यकांत ने मंगलवार को दी। उन्होंने बताया कि एमडीआर की दवाओं के कई दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं। कम दिन दवाएं चलने पर दुष्प्रभाव भी कम होता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीपीएएलएम पद्धति को स्वीकृति दी है, जिसमें प्रीटोमैनिड, बेडेक्विलिन, लिनेजोलिड और मॉक्सीफ्लाक्सेसिन शामिल हैं। यह इलाज की पुरानी विधि की तुलना में अधिक प्रभावी व सुरक्षित है। इससे एमडीआर टीबी का इलाज सिर्फ छह महीने चलेगा। प्रदेश में एमडीआर टीबी के करीब 20 हजार मरीज हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च एमडीआर टीबी पर काफी दिनों से शोध कर रहा था। इसे सफलता मिलने के बाद यह बदलाव हो रहा है।
