Mere Ram: Ram is present in every pore of me, the name of following dignity is Ram - Ravindra Puri

महंत रविंद्र पुरी
– फोटो : अमर उजाला

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मेरे रोम-रोम में समाए हैं। मुझे अच्छी तरह याद है, जब मैं मेरी मां राम की लोरी सुनाते हुए अपनी गोद में मुझे सुलाती थी। राम को किसी विशेष व्यक्ति, समुदाय, संप्रदाय या पंक्ति में नहीं बांटा जाना चाहिए। राम उस हर एक मानव के उद्धारकर्ता हैं, जो धर्म और सत्य के मार्ग का अनुसरण करते हुए मर्यादा में रहता है। हृदय में बसे आत्मा रूपी राम को मुक्त कराने में पांच सौ वर्ष से अधिक का वक्त लग गया।

वर्षों की प्रतीक्षा और करोड़ों लोगों की कठिन तपस्या के बाद मेरे आराध्य प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर लगभग बनकर तैयार हो चुका है। इस कार्य के पूर्ण होने में जिन लोगों ने योगदान दिया है, उनके तो राम हैं ही, लेकिन मेरा मानना है कि जिन्होंने अज्ञानतावश धर्म कार्य में बाधा बनने का प्रयत्न किया या जान-बूझकर प्रभु राम के नाम को कोसा हैं, राम उनके भी हैं।

राम ने हमेशा लोकरीति का अनुसरण किया है। वह लोकतंत्र के सच्चे नायक हैं। वह शबरी के जूठे बेर खाने के साथ निषादराज को गले लगाकर सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं। हमें गर्व है कि इस कलयुग में भी प्रत्येक मानव को श्रीराम के मार्ग पर चलने का संदेश देने का अवसर हम सबको मिल रहा है। इसे ‘रामराज’ के रूप में देखा जाना चाहिए। राम तो अजर-अमर अविनाशी हैं।



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