लखनऊ। अगर आपके घर-दुकान में स्मार्ट बिजली मीटर लगा है, तो उसकी रीडिंग पर जरूर नजर रखें। नहीं तो चपत लगनी तय है। डालीगंज के एक उपभोक्ता के यहां लगा स्मार्ट मीटर 33 फीसदी तक तेज चल रहा था। यही नहीं स्वीकृत लोड से दोगुना लोड बता रहा था। अफसर चेक मीटर लगवाने के बजाय बिल जमा करने का दबाव बना रहे थे। काफी दौड़-धूप और अफसरों का चक्कर लगाने के बाद उपभोक्ता के यहां चेक मीटर लगा। इसके बाद हकीकत सामने आई।
डालीगंज के उपभोक्ता एके जैन ने बताया कि अगस्त से हर माह 15 से 16 हजार रुपये का बिल आने लगा। आठ किलोवाट के कनेक्शन का मई-जून की गर्मी में भी 6 से 7 हजार रुपये ही बिल आता था। इस पर मीटर तेज चलने का शक हुआ। उपखंड अधिकारी (एसडीओ) अजीत कुमार के पास प्रार्थनापत्र और 58 हजार रुपये का बिल लेकर गए। उपखंड अधिकारी ने अल्टीमेटम दिया कि जब तक 58 हजार रुपये का बिल जमा नहीं करेंगे, तब तक चेक मीटर लगाने की फीस जमा नहीं होगी।
एक्सईएन ज्ञानेंद्र सिंह के हस्तक्षेप के बाद एके जैन के यहां 19 सितंबर को चेक मीटर लगाया गया। 11 नवंबर को हुई जांच में स्मार्ट मीटर चेक मीटर के मुकाबले 33 फीसदी तेज चलता पाया गया। यहीं नहीं मीटर स्वीकृत लोड 8 किलोवाट के सापेक्ष 16 किलोवाट लोड दर्शा रहा था।
चेक मीटर लगाने में रोड़ा अटका रहे जिम्मेदार
शिकायत के बाद उपखंड अधिकारी अजीत कुमार को उपभोक्ता के यहां चेक मीटर लगवाना चाहिए था। पावर कॉरपोरेशन ने इस बाबत आदेश भी जारी कर रखा है। दरअसल जब उपभोक्ता बिजली मीटर के तेज चलने की शिकायत दर्ज कराने पहुंचते हैं, तो पहले उनको टरकाने की भरसक कोशिश की जाती है। जो उपभोक्ता चेक मीटर लगवाने पर अड़ जाते हैं, उनसे फीस जमा करा ली जाती है।
खेल यह भी…ऐसा चेक मीटर लगा देते हैं जो अधिक रीडिंग बताने लगता है
परीक्षण खंड के अभियंता ऐसा चेक मीटर लगा देते हैं जो मूल मीटर से अधिक रीडिंग बताने लगता है। ऐसे मीटर की चेक रिपोर्ट से शिकायत करने वाले उपभोक्ता को ही मीटर को स्लो करने के मामले में फंसाने का ताना-बाना बुना जाने लगता है।
क्या करें जब चेक मीटर भी अधिक रीडिंग बताने लगे
अगर चेक मीटर भी तेज चल रहा है, तो उसी कंपनी से मीटर इंस्ट्रूमेंट रिपोर्ट मंगाई जाती है। इससे एक-एक दिन की बिजली खपत की रिपोर्ट मिल जाती है। चेक मीटर को लेकर विवाद होने पर परीक्षण खंड के अभियंता संबंधित कंपनी को मीटर भेजकर यह रिपोर्ट मंगाते हैं। अगर चेक मीटर पर आपको शक है तो उसकी शिकायत कीजिए।
चेक मीटर की फीस कहीं 350 रुपये, तो कहीं 428
राजधानी में चेक मीटर लगवाने की फीस तय नहीं है। किसी खंड में 350 रुपये जमा कराए जा रहे हैं, तो कहीं 428 रुपये वसूला जा रहा है। अलग-अलग खंडों में दो तरह के शुल्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जांच में तेज मिला मीटर
उपभोक्ता एके जैन के चेक मीटर की रिपोर्ट आई तो पता चला कि उनका पुराना स्मार्ट बिजली मीटर 33 फीसदी तेज चल रहा था। स्वीकृत के मुकाबले दोगुना लोड दिखा रहा था। उपभोक्ता का बिल संशोधित कर दिया गया। इस महीने उपभोक्ता से वसूला गया बिल करीब 6000 रुपये ज्यादा पाया गया।
ज्ञानेंद्र सिंह, एक्सईएन, विश्वविद्यालय खंड, जानकीपुरम जोन लेसा
