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संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Fri, 23 Aug 2024 02:37 AM IST

कदौरा। मनरेगा योजना में फर्जी फोटो अपलोड कर हाज़िरी भरकर फर्जीवाड़ा करने के मामले में डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले को एक जुलाई को अमर उजाला ने पोर्टल पर फर्जी फोटो व काम दिखाकर भुगतान शीर्षक प्रकाशित की थी। जांच में मनरेगा में फर्जीवाड़ा सही मिलने पर डीएम ने दोषियों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
डीएम ने एसडीएम कालपी सुशील कुमार सिंह की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच करने के आदेश दिए थे। एसडीएम की अगुवाई में पहुंची टीम को जमरेही गांव में जलरोक बांध गन्नी के खेत से रामपाल तक की लागत पांच लाख रुपये है। मौके पर कोई श्रमिक कार्य करते नहीं मिला था। टीम ने माना था कि पूर्व में कराए गए कार्य का पुन: भुगतान कराने का जिम्मेदारों द्वारा प्रयास किया गया।
वहीं, ग्राम पंचायत खुटमिली में मेन रोड से हमीरपुर रोड तक नाला निर्माण की लागत दो लाख के लगभग है। यहां पर भी बिना कार्य के भुगतान कराने के प्रयास किए गए। एसडीएम की जांच आख्या देने के बाद डीएम ने जिला विकास अधिकारी और उपायुक्त श्रम रोजगार को इस प्रकरण में दोषी पाए गए ग्राम पंचायत कर्मचारियों एवं प्रधानों व अन्य जिम्मेदारों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के आदेश दिए है। डीएम का पत्र जारी होते ही ब्लॉक के जिम्मेदारों में खलबली मच गई। डीएम राजेश कुमार पांडेय ने कहा कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं में किसी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।
बता दें कि ग्राम पंचायत जमरेही के मजरा गौहना में जलरोक बांध गन्नी के खेत से रामपाल के खेत तक में 19 जून को 135 श्रमिकों कि डिमांड लगाई गई। जबकि इसी कार्य को दो माह पूर्व जेसीबी और ट्रैक्टर द्वारा कराया गया था। रात आठ बजे श्रमिकों की फोटो कार्य करते हुए मनरेगा की साइट में अपलोड की गई साथ ही उनकी हाजिरी भर दी गई। वही ग्राम पंचायत खुटमिली में नाला खुदाई के कार्य में 27 श्रमिकों को दिखाया गया। श्रमिकों की फोटो भी रात आठ बजे अपलोड कर हाजिरी दिखाई गई। मजे की बात तो यह है कि भीषण गर्मी में फोटो में दिखाए गए श्रमिक स्वेटर और शॉल ओढ़कर काम करते नजर आ रहे थे।
