खुर्जा में 29 दिसंबर को एक ही पटरी पर दो ट्रेनें आमने-सामने आने से पैदा हुई हादसे की नौबत का कारण टोकन की अनदेखी मानी गई है। इस गलती पर स्टेशन मास्टर को निलंबित किया जा चुका है। डीआरएम संग्रह मौर्य को हटाने के बाद अब खुर्जा सेक्शन में उस पुरातन टोकन व्यवस्था को भी खत्म कर दिया गया, जिसके प्रयोग से स्टेशन मास्टर और चालक के बीच ट्रेन आमद की सूचना का आदान-प्रदान होता था।

अंग्रेजों के जमाने की यह टोकन व्यवस्था तब आधुनिक तकनीक के सिग्नल-संचार सिस्टम न होने की वजह से शुरू हुई थी। मुरादाबाद रेल मंडल के खुर्जा स्टेशन पर दो यात्री ट्रेनों की आमने-सामने भिड़ंत के हालात बन जाने से उत्तर रेल मुख्यालय ही नहीं, रेल मंत्रालय तक भी हड़कंप मच गया था।

यही वजह थी कि एकाएक तत्कालीन डीआरएम को हटाने का फैसला लेना पड़ा था। गंभीर मामला होने के कारण हर पहलू की बारीकी से जांच अब भी जारी है। गहन जांच में स्पष्ट हुआ है कि खुर्जा स्टेशन पुरानी मैनुअल टोकन व्यवस्था से संचालित हो रहा था।

उस दिन टोकन का आदान-प्रदान सुनिश्चित होने से पहले ही स्टेशन मास्टर ने प्वाइंट्समैन से फोन पर हुई बातचीत के आधार पर हापुड़ की ओर से आ रही ट्रेन को गुजरने की अनुमति दे दी थी, जबकि उस लाइन पर पहले से दूसरी यात्री ट्रेन थी। अब रेलवे ने खुर्जा में व्यवस्था बदल दी है।

ट्रैक पर ऑप्टीकल फाइबर केबल बिछाकर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल प्रणाली लागू कर दी गई है। डीआरएम विनीता श्रीवास्तव ने बताया कि अब खुर्जा स्टेशन पर भी स्टेशन मास्टर टोकन देने के बजाय सिग्नल देकर ट्रेनों का संचालन करेंगे। संरक्षा को लेकर सभी विभागों को सतर्कता के प्रति गंभीरता के निर्देश दिए गए हैं।



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