
मुरादाबाद में पूर्व मेयर के आवास को खाली कराती नगर निगम की टीम।
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मुरादाबाद नगर निगम प्रशासन ने मुरादाबाद के पहले सपा मेयर स्व. हुमायूं कदीर के नाम से लिप्टन क्लब के पास अलाॅट आवास को खाली कराने के बाद अपना कब्जा ले लिया। हुमायूं कदीर का निधन हो चुका है। वर्तमान में उनके परिवार का कोई सदस्य आवास में नहीं रह रहा था।
सूचना पर उनकी बेटी अनम और दामाद उस्मान भी मौके पर पहुंच गए। निगम टीम ने घर में मौजूद सामान की सूची बना कर सामान उन्हें सुपुर्द कर दिया। नगर निगम गठन के बाद वर्ष 1995 में मेयर के हुए पहले चुनाव में समाजवादी पार्टी के हुमायूं कदीर मेयर निर्वाचित हुए थे।
उस दौरान लिप्टन क्लब के पास आवासीय सुविधा के लिए उन्हें भवन आवंटित किया गया था। निगम अधिकारियों के मुताबिक लेकिन हुमायूं कदीर ने अपना मेयर कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद भी भवन को खाली नहीं किया था। निगम संपत्ति की समीक्षा के दौरान नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल के संज्ञान में यह मामला आया।
जिसके बाद उन्होंने अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार को विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए उसे खाली कराने के निर्देश दिए। अपर नगर आयुक्त ने बताया कि इसके लिए दो बार संबंधित पते पर नोटिस भेजा गया। लेकिन वहां निरंतर ताला बंद होने के कारण नोटिस भवन पर चस्पा कर दी गई थी।
नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद वृहस्पतिवार नगर निगम की टीम थाना सिविल लाइंस के निरीक्षक अवध बिहारी के साथ दोपहर आवास पर पहुंची। भवन का ताला तोड़कर भवन में रखे समान की सूची तैयार करने लगे। इसी बीच हुमायूं कदीर की पुत्री अनम और दामाद उस्मान, छोटे भाई रिजवान कदीर मौके पर पहुंच गए।
तीनों ने बताया कि हुमायूं कदीर की पत्नी फिरदौस जहां अमेरिका में अपने बेटे के पास उपचार कराने गई हैं लिहाजा उनके आने के बाद कोई कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन निगम टीम नहीं मानी।
भवन के सभी समान की सूची बना कर उनकी बेटी और दामाद की सुपुर्दगी में दे दिया और भवन खाली करा कर निगम टीम ने कब्जा प्राप्त कर लिया।
करीब छह करोड़ रुपये की कीमत का है भवन
अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार ने बताया कि पूर्व मेयर स्व. हुमायूं कदीर के परिजनों के अवैध कब्जे वाले जिस भवन को खाली कराया गया है वह भवन 661 वर्गमीटर क्षेत्र में बना है। जिसकी वर्तमान बाजार कीमत करीब छह करोड़ रुपये है।
मेरे वालिद हुमायूं कदीर का 2021 का इंतकाल हो गया था। मेरी मां अमेरिका में मेरे भाई के पास इलाज करा रहीं हैं। हम लोगों को आवास खाली करने का कोई नोटिस नहीं मिला। आज घर पर जो नोटिस चस्पा देखा था उसमें मां का भी इंतकाल दिखा दिया गया था। जबकि मां जिंदा हैं। हम लोग मां के वापस आने के बाद खुद कब्जा देना चाहते थे। ताला तोड़ कर कब्जा लिया गया यह गलत किया। – अनम हुमायूं, पुत्री स्व. हुमायूं कदीर
वर्ष 1995 में शहर के पहले मेयर हुमायूं कदीर को उनके कार्यकाल तक के लिए आवास आवंटित किया था। बाद में उस पर कब्जा जमा लिया था। मंडलायुक्त के निर्देश पर निगम की संपत्तियों से कब्जा हटाने की कार्रवाई चल रही है। इसी क्रम में यह कब्जा हटाया गया है। – दिव्यांशु पटेल, नगर आयुक्त