लखनऊ। इस बार पर्वतीय महापरिषद के रजत जयंती वर्ष में उत्तरायणी कौथिग की छटा 15 दिन तक छाई रहेगी। बीरबल साहनी मार्ग पर स्थित पं. गोविंद वल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन में 14 से 28 जनवरी तक भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। इनमें 150 स्टॉलों पर विभिन्न उत्पाद सजेंगे। पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी ने बताया कि बुधवार को कौथिग का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे।
महापरिषद के महासचिव महेंद्र सिंह रावत ने बताया कि दोपहर दो बजे रामलीला मैदान महानगर से झांकियों से सजे रथों और बाजे-गाजे के साथ पर्वतीय समाज के लोग आयोजन स्थल पर पहुंचेंगे। निलमथा, तेलीबाग, कल्याणपुर, गोमतीनगर, सरोजनीनगर, इंदिरानगर, राजाजीपुरम, एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड, विकासनगर, कुर्मांचलनगर, सीतापुर रोड व विभिन्न क्षेत्रों से समाज के लोग शोभायात्रा में शामिल होंगे।
रावत ने बताया कि कौथिग के सांस्कृतिक मंच पर 15 दिन तक लगातार आयोजन चलेंगे। आयोजन स्थल पर स्टॉलों के नाम उत्तराखंड की मुख्य बाजारों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें खाद्य पदार्थों के अलावा ऊनी वस्त्र, हस्तशिल्प और उत्तराखंड की मशहूर बाल मिठाई समेत अन्य वस्तुएं मिलेंगी।
मुख्य संयोजक टीएस मनराल, संयोजक केएन चंदोला, उपाध्यक्ष मोहन सिह बिष्ट मोना, जेपी डिमरी, ज्ञान पंत, केसी पंत, केएस रावत, गोपाल गौलाकोटी, भुवन पांडेय, केएन पाठक, शंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।
मंच से विभूतियों का होगा सम्मान
महेंद्र सिंह रावत ने बताया कि इस बार भी कौथिग के मंच से विशिष्ट सेवाओं के लिए विभूतियों को पर्वत गौरव सम्मान, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली वीरता सम्मान, गौरा देवी महिला सम्मान, डॉ. एमसी पंत चिकित्सा सम्मान, श्यामाचरण काला पत्रकारिता सम्मान, बीएम शाह नाट्य कला सम्मान, गोपाल उपाध्याय साहित्य सम्मान, रणवीर सिंह बिष्ट कला सम्मान, देवकी नंदन पांडेय उद्घोषक सम्मान, गोविंद नयाल सामाजिक सेवा सम्मान, दीवान सिंह डोलिया लोक कला सम्मान और युवा सम्मान दिए जाएंगे। मंच पर उत्तराखंड सहित विभिन्न प्रदेशों के सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। छोलिया नृत्य, नन्दा राजजात यात्रा, पारंपरिक झोड़े, छपेली गीत व नृत्य मनोरंजन करेंगे। कौथिग में इस बार देव भूमि गैलरी बनाई गई है, जिसमें उत्तराखंड के देवी-देवताओं को स्थापित किया गया है।
