ब्रिटिश शिकारियों ने उसे तब आगरा के सिकंदरा अनाथालय में रखा। यहां स्कूल के पास की सड़क की दीवार पर सनीचर की पेंटिंग बनाई गई है ताकि यहां आने वाले लोग और सेंट जोंस चर्च आने वाले पर्यटक सनीचर के बारे में जान सकें। आगरा नगर निगम के नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने सनीचर की कहानी को दुनिया के सामने लाने के लिए यह पहल की है। वॉल पेंटिंग में सनीचर की कहानी बयां करने के साथ कबाड़ से भेड़ियों के बीच सनीचर का स्टेच्यू भी तैयार करा रहा है।
1894 में लिखी गई जंगल बुक
सनीचर बुलंदशहर के जंगलों से 1866 में पकड़ा गया, जबकि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रूडयार्ड किपलिंग ने जंगल बुक वर्ष 1894 में लिखी। जंगल बुक का किरदार मोगली बच्चों की पहली पसंद है। सनीचर जब सिकंदरा लाया गया, तब वह केवल कच्चा मांस खाता था, बोलता नहीं था और सूंघ कर ही कुछ खाता था।
29 साल की उम्र में हो गई थी मौत
रेवरेंड सीएस वेलेंटाइन ने अपने संस्मरणों में सिकंदरा अनाथालय के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए भेड़िया मानव सनीचर का ब्योरा दिया है। सनीचर की 29 साल की उम्र में मौत हो गई थी। सनीचर के चेहरे पर हंसने या रोने के भाव कभी नहीं देखे गए।
थीम पार्क बनाकर जिंदा रखें कहानी
सिविल सोसाइटी के राजीव सक्सेना ने बताया कि मोगली का असल किरदार आगरा ने दुनिया को दिया है, जिसे सनीचर का नाम दिया गया था। सिकंदरा में वह रहा, यह तथ्य सामने आने चाहिए। भेड़िया मानव पर्यटकों को आकर्षित करता है, इसकी कहानी थीम पार्क बनाकर भी जिंदा रखी जा सकती है।





