Muzaffarnagar जिला सहकारी बैंक के सभागार में बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों (MPACS) के लिए एक महत्वपूर्ण और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के “सहकार से समृद्धि” संकल्प के तहत यह कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तकनीकी, व्यवसायिक और प्रशासनिक स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
इस प्रशिक्षण में मुज़फ्फरनगर और शामली जिलों की सभी नवगठित MPACS समितियों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—
-
समितियों को आत्मनिर्भर बनाना
-
व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाना
-
पारदर्शी और सक्षम प्रशासन विकसित करना
-
ग्रामीण विकास के नए अवसरों का विस्तार करना
सहकारिता की बुनियाद: सामूहिकता और नवाचार को बताया सफलता का आधार
सत्र संयोजक अभिषेक तिवारी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सहकारिता की मूल भावना, सामाजिक उपयोगिता और स्थानीय संसाधनों के कुशल दोहन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि MPACS यदि पारदर्शिता, नवाचार और सामूहिक भागीदारी को अपनाएँ तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चेहरा बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
समितियों के लिए सुझाए गए नए व्यवसाय मॉडल:
-
ग्रामीण युवाओं के लिए कोचिंग और प्रशिक्षण केंद्र
-
ऑयल एक्सपेलर यूनिट, दाल मिल, आटा चक्की प्लांट, भंडारण गृह
-
फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, डेयरी, पशु आहार उत्पादन
-
कृषि उपकरण किराया केंद्र
इन योजनाओं से समितियों को स्थायी आय, ग्रामीणों को रोजगार और स्थानीय उत्पादों को मूल्य संवर्धन के अवसर मिल सकते हैं।
व्यवसाय विकास की रीढ़: DPR और BDP तैयार करने का विस्तृत प्रशिक्षण
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रहा वह विशेष सत्र जिसमें Detailed Project Report (DPR) और Business Development Plan (BDP) तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया को समझाया गया।
इस सत्र में बताया गया कि—
-
DPR किसी भी परियोजना की तकनीकी, वित्तीय और व्यावहारिक उपयोगिता का विस्तृत खाका प्रस्तुत करती है
-
BDP यह तय करता है कि समिति अपने संसाधनों, बाजार अवसरों और वित्तीय जरूरतों को किस तरह प्रबंधित करेगी
ट्रेनिंग के दौरान आटा चक्की प्लांट, दाल मिल और वर्मी कम्पोस्ट जैसी परियोजनाओं के उदाहरण देकर DPR और BDP की वास्तविक तैयारियों को विस्तार से सिखाया गया। इससे समितियों को व्यावहारिक समझ और भविष्य की परियोजनाओं के लिए स्पष्ट दिशा मिली।
प्रशासनिक मार्गदर्शन—सफल सहकारी समितियों की नींव है पारदर्शिता
सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पदाधिकारियों को उनके दायित्वों, सदस्य भागीदारी, लेखा संधारण और नियमित ऑडिट की आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि—
-
पारदर्शिता
-
वित्तीय अनुशासन
-
समयबद्ध लेखांकन
-
नियम आधारित कार्यप्रणाली
सहकारिता की सफलता के मूल तत्व हैं।
अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि समितियाँ योजनाओं को लागू करते समय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और लाभ वितरण पर विशेष ध्यान दें।
वित्तीय सहयोग—कैसे मिले बैंक लोन और सरकारी सहायता
जिला सहकारी बैंक के प्रतिनिधियों ने समितियों को वित्तीय प्रबंधन, ऋण सुविधाओं और सरकारी अनुदान योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि—
-
मजबूत DPR और व्यावहारिक BDP के साथ समितियाँ बैंक ऋण आसानी से ले सकती हैं
-
पूंजी निर्माण के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है
-
व्यवसायिक विस्तार के लिए बैंक विशेष सहयोग प्रदान करता है
उन्होंने समितियों को सलाह दी कि वे अपनी परियोजनाओं को योजनाबद्ध तरीके से तैयार करें ताकि वित्तीय संस्थानों से सहयोग प्राप्त करने में कोई कठिनाई न आए।
कार्यक्रम का समापन—“सहकार से समृद्धि” का लक्ष्य दोहराया गया
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
यह संदेश दिया गया कि सहकारिता की असली शक्ति है—
-
सामूहिक प्रयास
-
पारदर्शी प्रबंधन
-
नवाचार आधारित विकास
-
ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी
समितियों को आह्वान किया गया कि वे आने वाले समय में अपनी कार्यशैली को आधुनिक और व्यवसायिक बनाएँ ताकि “सहकार से समृद्धि” की भावना ज़मीनी स्तर पर साकार हो सके।
मुज़फ्फरनगर में आयोजित बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण विकास में एक नई ऊर्जा और दिशा लेकर आया है। DPR–BDP प्रशिक्षण, वित्तीय मार्गदर्शन और नवाचार आधारित योजनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में MPACS मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। समितियों के लिए यह कार्यक्रम न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि भविष्य की योजनाओं के लिए प्रेरक साबित हुआ।
