Muzaffarnagar के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में सोमवार को माहौल पूरी तरह राजनीतिक उबाल से भर गया, जब आजाद समाज पार्टी (ASPA) द्वारा आयोजित “संविधान बचाओ, भाईचारा बनाओ रैली” में भारी जनसमूह उमड़ पड़ा।
मंच पर पहुंचे आसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना के सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद रावण ने आते ही जमकर आक्रामक रुख दिखाया और केंद्र व प्रदेश सरकार पर तीखे हमले बोले।
उनकी fiery स्पीच ने रैली को जोश, भीड़ और राजनीतिक गर्माहट—तीनों से भर दिया।


भारतीय जनता पार्टी पर सीधा आरोप—“षड्यंत्र के तहत सत्ता पर कब्जा किया गया”

अपने भाषण की शुरुआत में ही चन्द्रशेखर आज़ाद ने भाजपा पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि—
“भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता पर एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत कब्जा किया है। अब दलित और पिछड़ा समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी कुर्बानी को तैयार है।”

उन्होंने कहा कि मुज़फ्फरनगर की इस विशाल रैली के बाद पार्टी देशभर में आंदोलन की नई श्रृंखला शुरू करेगी, जहां लोग सड़क पर उतरकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे।
save constitution rally का यह उद्देश्य पूरे भारत में जागरूकता फैलाना है ताकि दलित–ओबीसी समुदाय के अधिकार सुरक्षित रह सकें।


संविधान दिवस पर रैली—“हम संविधान के रक्षक हैं, और रहेंगे”

संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित यह रैली चन्द्रशेखर आज़ाद के लिए बेहद प्रतीकात्मक रही।
उन्होंने कहा—
“बाबा साहब के संविधान ने दलितों की जिंदगी को सम्मान दिया है। अगर हम संविधान के साथ खड़े नहीं रहेंगे, तो हमारे अधिकार छिन जाएंगे। इसलिए यह रैली सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक संघर्ष है।”

भीड़ में मौजूद युवाओं और समर्थकों ने ‘संविधान बचाओ’, ‘दलित–ओबीसी एकता जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाकर सभा में नई ऊर्जा भर दी।


एकजुटता पर बड़ा संदेश—“राजकाज में भागीदारी चाहिए, भीख नहीं”

चन्द्रशेखर ने अपनी स्पीच में कहा कि दलित–ओबीसी समाज को अब ‘राजकाज में भागीदारी’ चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा—
“यदि हम सत्ता में नहीं आए, तो विपक्षी पार्टियां हमें कुचल देंगी। इसलिए एकजुट संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है। हम सत्ता से नहीं डरते, हम अत्याचार से नहीं डरते। हम पीछे हटने वाले नहीं।”

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक सत्ता नहीं, बल्कि सामाजिक बराबरी और न्याय की स्थापना है।


बहुजन समाज पार्टी पर आरोप—“कांशीराम की विचारधारा खत्म कर दी गई”

चन्द्रशेखर ने अपने भाषण में बसपा पर भी तीखा प्रहार किया।
उन्होंने कहा—
“बहुजन समाज पार्टी को सर्वजन पार्टी बना दिया गया है। कांशीराम की विचारधारा को मिटा दिया गया है। आज बसपा अपनी राजनीति में दलितों की अपेक्षा खुद को ज़्यादा लेकर चल रही है।”

उन्होंने दावा किया कि दलित समाज के असली हक की लड़ाई आज आसपा ही लड़ रही है।


भाजपा की ‘अच्छे दिन’ की कहानी पर तंज—“अच्छे दिन तब आएंगे, जब हमारा सीएम–पीएम होगा”

उनका यह बयान रैली में गूंज की तरह फैला—
“भाजपा कहती है अच्छे दिन आ गए हैं, लेकिन हमारे समाज के लिए अच्छे दिन तब आएंगे जब प्रदेश में हमारा मुख्यमंत्री और केंद्र में हमारा प्रधानमंत्री बनेगा।”

रैली में मौजूद समर्थक तालियों और नारों से अपनी सहमति जताते रहे।


ईडी–सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप—“हम विरोधी हैं, राष्ट्र-विरोधी नहीं”

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपने विरोधियों पर एजेंसियां छोड़ देती है—
“यदि कोई विरोध करे तो ईडी और सीबीआई पीछे लगा दी जाती है। हम भाजपा के विरोधी हैं, पर राष्ट्र-विरोधी नहीं।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद का मतलब सत्ता का समर्थन नहीं, बल्कि संविधान और लोगों के अधिकारों की रक्षा है।


पूंछ-मूंछ वाला सियासी उदाहरण—भीड़ मुस्कराई, फिर तालियों की गड़गड़ाहट

चन्द्रशेखर ने एक उदाहरण देते हुए कहा—
“हमारी लड़ाई पूंछ की नहीं, मूंछ की है। पूंछ हमेशा पीछे रहती है और मूंछ हमेशा आगे।”
इस बयान पर भीड़ हंस पड़ी और उसके बाद तालियों के साथ जोश देखने लायक था।


शिक्षा–चिकित्सा–रोज़गार पर बड़ा वादा—“हम आए, तो इन तीनों पर पूरा सुधार करेंगे”

उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार आती है:

  • शिक्षा में बड़े सुधार किए जाएंगे

  • चिकित्सा सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक मजबूत किया जाएगा

  • युवाओं को रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा

उन्होंने 2 अप्रैल 2018 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए, पर वह पीछे हटने वालों में से नहीं हैं।


निजी क्षेत्रों में आरक्षण का वादा—18% दलितों के लिए कोटा तय करने की घोषणा

रैली में यह घोषणा सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी—
“हम प्राइवेट सेक्टर में भी 18% आरक्षण लागू करवाएंगे। ओबीसी और दलित युवाओं को उनका हक दिलाना हमारा सबसे बड़ा वादा है।”

69 हजार बेरोजगार अभ्यर्थियों के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा।


ईवीएम पर बड़ा बयान—“ईवीएम हटाओ, बैलेट से चुनाव कराओ”

उन्होंने साफ कहा कि ईवीएम पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
उन्होंने घोषणा की:

  • देशभर में ईवीएम के खिलाफ आंदोलन

  • बैलेट पेपर की वापसी की मांग

  • वोट चोरी रोकने के लिए हर कार्यकर्ता को बूथ बचाने का निर्देश

उन्होंने बिहार में कथित वोट चोरी का भी मुद्दा उठाया।


हाईकोर्ट बेंच की मांग—पश्चिमी यूपी को न्यायिक सुविधा देने का वादा

उन्होंने कहा कि यदि आसपा सत्ता में आई तो वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना करवाएंगे, ताकि न्यायिक दूरी और देरी दोनों को कम किया जा सके।


वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी—बड़ी राजनीतिक एकता का प्रदर्शन

रैली में अनेक वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं—

  • पूर्व विधायक शाहनवाज़ राणा

  • पूर्व सांसद अमीर आलम

  • पूर्व विधायक नवाज़िश आलम

  • आसपा जिलाध्यक्ष दिनेश बावरा

  • भीम आर्मी अध्यक्ष रजत निठारिया

  • बिजनौर के पूर्व विधायक मो. गाजी

पार्टी अध्यक्ष का पटका पहनाकर सभी नेताओं ने उनका स्वागत किया।
जाट समाज की ओर से हल और ट्रैक्टर–ट्रॉली भेंट किए जाने का क्षण रैली का शानदार दृश्य बन गया।


1 जनवरी से देशव्यापी रैलियों की तैयारी—“लोगों को जागरूक करने का बड़ा अभियान”

चन्द्रशेखर ने कहा कि नई वर्ष की शुरुआत से ही आसपा देश के कोने–कोने में रैलियों का आयोजन करेगी, जहां जनता को जागरूक किया जाएगा और save constitution rally को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया जाएगा।


मुज़फ्फरनगर में आयोजित आज़ाद समाज पार्टी की यह विशाल ‘save constitution rally’ न केवल राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि दलित–ओबीसी समाज के अधिकारों के लिए एक नई हुंकार भी थी। चन्द्रशेखर आज़ाद रावण के आक्रामक भाषण, बड़े वादों और राष्ट्रीय रणनीति के संकेतों ने साफ कर दिया कि आसपा अब देशभर में अपने जनाधार को तेज़ी से बढ़ाने की तैयारी में है। संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा को केंद्र में रखकर शुरू हुई यह रैली आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक समीकरण बदलने का संकेत देती है।

 



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