Muzaffarnagar। किसान दिवस का आयोजन हमेशा से किसानों की समस्याओं को सुलझाने और उन्हें राहत प्रदान करने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन इस बार का किसान दिवस विवादों और तीखी बहसों का केंद्र बन गया। जिला पंचायत के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। वहीं, विभिन्न किसान संगठनों के नेता और सैकड़ों किसान भी अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे।
लेकिन बैठक की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण नजर आया। किसानों को जहां अधिकारियों के डायस के सामने फर्श पर बैठने को मजबूर होना पड़ा, वहीं अधिकारियों के जवाबों ने किसानों को और अधिक उत्तेजित कर दिया।
प्रमुख मुद्दे: हिंदू-मुस्लिम विवाद और सामाजिक सद्भाव पर खतरा
बैठक में सबसे ज्यादा गरम चर्चा का विषय पुरबालियान गांव में हाल ही में हुए विवाद और उस पर उठाए गए सवाल रहे। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज पहलवान ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व हिंदू-मुस्लिम सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले एक स्वामी द्वारा सामाजिक ताना-बाना बिगाड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नीरज पहलवान ने कहा, “यह हिंदू-मुस्लिम विवाद की राजनीति बंद होनी चाहिए। कुछ लोग इसे सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे समाज में विद्वेष फैल रहा है। यदि इतनी ही नफरत है, तो अब्दुल हमीद और एपीजे अब्दुल कलाम जैसे लोगों को भी इतिहास से मिटा दें।”
उनकी इस टिप्पणी पर भाकियू (अराजनैतिक) के तहसील बुढ़ाना अध्यक्ष सुधीर पंवार ने कड़ी आपत्ति जताई। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस होने से माहौल गरम हो गया। बाद में अधिकारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला।
पिछले साल की समस्याएं अभी भी लंबित
किसानों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि पिछले किसान दिवस में उठाई गई समस्याओं का समाधान अभी तक नहीं हुआ है। भाकियू के महासचिव धीरज लाटियान और नीरज पहलवान ने बिजली बिल, चकबंदी, और गन्ना भुगतान के मुद्दों पर प्रशासन को आड़े हाथों लिया।
नीरज पहलवान ने कहा:”पुरबालियान में 36 साल से चकबंदी चल रही है, लेकिन आज तक पूरी नहीं हो पाई। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों के पास अब धैर्य नहीं बचा है।”
शुगर मिल बकाया और बिजली बिल पर नाराजगी
किसानों ने भैंसाना शुगर मिल द्वारा पुराने बकायों के भुगतान और नए सत्र की शुरुआत में ही देरी को लेकर नाराजगी जाहिर की। इसके अलावा, गलत बिजली बिल और अनियमितताओं ने किसानों को और परेशान कर दिया है।
किसानों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद, प्रशासन उनके मुद्दों को हल करने में विफल रहा है।
प्रशासन का आश्वासन: टीमों का गठन और जल्द समाधान का वादा
एडीएम प्रशासन नरेंद्र बहादुर सिंह ने बैठक के दौरान कहा कि पुरबालियान चकबंदी मामले को तेजी से सुलझाने के लिए जिलाधिकारी द्वारा छह टीमें गठित की गई हैं।
उन्होंने कहा: “चकबंदी प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाएगा। इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।”
एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत ने कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में कौन-कौन था मौजूद?
इस किसान दिवस में विभिन्न किसान संगठनों के नेता और अधिकारी मौजूद रहे। इनमें भाकियू जिलाध्यक्ष नवीन राठी, पश्चिम प्रदेश सचिव श्यामपाल चेयरमैन, मंडल महासचिव विदेश मोतला, भाकियू अराजनैतिक के अंकित चौधरी और सुधीर पंवार शामिल थे।
किसानों का गुस्सा क्यों है जायज?
किसान दिवस के दौरान किसानों का आक्रोश कई वजहों से देखने को मिला।
- पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं होना: कई मुद्दे वर्षों से लंबित हैं, जिससे किसानों का धैर्य टूट रहा है।
- सामाजिक विद्वेष का माहौल: हिंदू-मुस्लिम विवाद जैसे मुद्दे किसानों के सामाजिक एकता पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं।
- आर्थिक दबाव: शुगर मिल बकाया और बिजली बिल जैसी समस्याओं ने किसानों की आर्थिक स्थिति को और खराब किया है।
किसानों के मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत
किसान दिवस का आयोजन भले ही समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से किया गया हो, लेकिन इस बार यह समस्याओं की जटिलता और प्रशासनिक खामियों को उजागर करने वाला मंच बन गया। किसान संगठनों ने प्रशासन से अपनी समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान करने की अपील की।
