Muzaffarnagar (बुढाना) कंपोजिट स्कूल डूंगर, बुढाना, मुजफ्फरनगर में शैक्षिक सत्र 2024 के निपुण मूल्यांकन परीक्षण (Nipun Evaluation) और राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे (NAS) की तैयारी के तहत एक विशेष मॉक टेस्ट का आयोजन किया गया। इस मॉक टेस्ट का उद्देश्य बच्चों को ओएमआर शीट (OMR Sheet) भरने में पारंगत करना था, ताकि वे आगामी परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से तैयार हो सकें। इस अभ्यास कार्यक्रम का आयोजन स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक चौ. जमील अहमद के नेतृत्व में किया गया।

कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के बच्चों का ओएमआर अभ्यास

स्कूल में आयोजित मॉक टेस्ट में कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के 235 बच्चों में से 210 बच्चों ने भाग लिया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ओएमआर शीट (OMR Sheet) भरने का सही तरीका सिखाना था। मॉक टेस्ट के दौरान बच्चों को बहुविकल्पीय प्रश्नों (Multiple Choice Questions) के उत्तर देने के लिए प्रशिक्षित किया गया। बच्चों ने उत्साह और जोश के साथ इस अभ्यास में भाग लिया और शिक्षकों की सहायता से ओएमआर शीट भरने में अपना कौशल बढ़ाया।

नेशनल एचीवमेंट सर्वे और निपुण एसेसमेंट टेस्ट की अहमियत

नेशनल एचीवमेंट सर्वे (NAS) और निपुण एसेसमेंट टेस्ट (Nipun Assessment) दोनों ही परीक्षा प्रणाली बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता और क्षमता को मापने के महत्वपूर्ण साधन हैं। इन परीक्षाओं के जरिए शिक्षा विभाग यह आंकलन करता है कि बच्चों ने अपनी कक्षा में जो शिक्षा प्राप्त की है, उसका स्तर क्या है।

प्रमुख परीक्षा दिनांक तय की गई हैं, जिसमें कक्षा 1 से कक्षा 3 तक के बच्चों की परीक्षा 25 नवंबर 2024 को आयोजित की जाएगी। वहीं कक्षा 4 से कक्षा 8 तक के बच्चों की परीक्षा 26 नवंबर 2024 को होगी। इन दोनों परीक्षाओं के दौरान बच्चों को ओएमआर शीट पर बहुविकल्पीय सवालों का उत्तर देना होगा।

संगीत के माध्यम से बच्चों को प्रेरित करना

स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में सिर्फ अकादमिक तैयारी नहीं, बल्कि बच्चों को मानसिक रूप से भी परीक्षा के लिए तैयार किया गया। स्कूल के शिक्षकों ने बच्चों को संगीत के माध्यम से निपुण होने के लिए प्रेरित किया। संगीत ने बच्चों में उत्साह और जोश भरने का काम किया, जिससे वे खुद को परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए प्रेरित महसूस करें।

स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक चौ. जमील अहमद ने कहा, “हमारे स्कूल का उद्देश्य सिर्फ बच्चों को शिक्षा देना नहीं है, बल्कि उन्हें एक संपूर्ण और आत्मनिर्भर व्यक्ति के रूप में तैयार करना है। इस तरह के मॉक टेस्ट और अभ्यास कार्यक्रम बच्चों को न केवल शैक्षिक परीक्षा के लिए, बल्कि जीवन में सफलता के लिए भी तैयार करते हैं।”

सरकारी आदेश और शिक्षा विभाग की भूमिका

इस मॉक टेस्ट कार्यक्रम का आयोजन खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती किरण यादव के निर्देशों पर किया गया। शिक्षा विभाग ने बच्चों को इन आगामी परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से तैयार करने के लिए इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना है। यह कार्यक्रम सरकारी शिक्षा विभाग की रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत बच्चों को हर स्तर पर शैक्षिक रूप से सशक्त बनाना है।

शिक्षकों की अहम भूमिका

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्कूल के सभी शिक्षक सक्रिय रूप से शामिल हुए। शिक्षकों ने बच्चों को ओएमआर शीट भरने का सही तरीका समझाया और उन्हें मॉक टेस्ट के दौरान हर एक सवाल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। शिक्षकों का मानना है कि बच्चों को सिर्फ जानकारी नहीं बल्कि उन्हें सही तरीके से उस जानकारी का उपयोग करना भी सिखाना आवश्यक है।

भविष्य की तैयारी: सफलता की ओर कदम

इस मॉक टेस्ट का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से परीक्षा की कठिनाइयों से अवगत कराना था। ओएमआर शीट भरने का यह अभ्यास भविष्य में आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चों को मानसिक रूप से तैयार करेगा। स्कूल प्रशासन का मानना है कि इस तरह के अभ्यास कार्यक्रम बच्चों को न केवल परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास भी प्रदान करेंगे।

निपुण मूल्यांकन के लिए स्कूल की भूमिका

निपुण मूल्यांकन परीक्षण 2024 में बच्चों की शैक्षिक क्षमता का विश्लेषण करने के लिए बच्चों के शैक्षिक स्तर को मापा जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे शिक्षा मंत्रालय को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में बच्चों को अधिक सहायता और संसाधनों की आवश्यकता है।

स्कूल प्रशासन और शिक्षकों ने बच्चों को इस परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार करने का संकल्प लिया है। इस प्रकार के मॉक टेस्ट बच्चों को मानसिक रूप से तैयार करने के साथ-साथ शिक्षा के स्तर में सुधार लाने का एक प्रभावी तरीका हैं।


इस प्रकार के मॉक टेस्ट और परीक्षा की तैयारी से बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है। ये पहल न केवल बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं, बल्कि उनके शैक्षिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती हैं।



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