खतौली (Muzaffarnagar)त्रिवेणी शुगर मिल ने एक सराहनीय पहल करते हुए सड़क सुरक्षा अभियान की शुरुआत की है। शुक्रवार को मिल परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में गन्ना ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले ट्रक, ट्रॉली, ट्राला और बुग्गियों पर रिफ्लेक्टर लगाए गए, ताकि रात में दृश्यता बढ़े और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कम की जा सके।


सुरक्षा जागरूकता की मिसाल — ‘रिफ्लेक्टर लगाओ, जीवन बचाओ’

मिल प्रशासन का यह अभियान “रिफ्लेक्टर लगाओ, जीवन बचाओ” के उद्देश्य पर आधारित है। इस अवसर पर सहायक चीनी आयुक्त डॉ. मनीष कुमार शुक्ला, सीओ खतौली आशीष यादव, और कोतवाली प्रभारी दिनेश बघेल समेत मिल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने स्वयं वाहनों पर लगे रिफ्लेक्टरों का निरीक्षण किया और इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम “मानव जीवन की सुरक्षा के प्रति उद्योग जगत की जिम्मेदारी” को दर्शाता है।


कम दृश्यता में हादसे — रिफ्लेक्टर से बचेंगी कई जानें

सीओ आशीष यादव ने बताया कि सर्दियों और रात के समय कम दृश्यता के कारण सड़कों पर अक्सर गंभीर हादसे हो जाते हैं। उन्होंने कहा,
“यदि हर वाहन पर उचित स्थान पर रिफ्लेक्टर लगे हों, तो सड़क पर दूसरे वाहन चालक उन्हें दूर से देख सकते हैं और समय रहते अपनी गति नियंत्रित कर सकते हैं। इस छोटे से कदम से अनगिनत जानें बचाई जा सकती हैं।”

उन्होंने सभी ट्रक, ट्रॉली और अन्य गन्ना परिवहन वाहनों को इस दिशा में सहयोग करने की अपील की।


मिल प्रशासन की प्राथमिकता — सुरक्षा सर्वोपरि

मिल उपाध्यक्ष (शुगर) डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि इस सीजन में त्रिवेणी शुगर मिल ने सभी गन्ना ढुलाई वाहनों पर 4 से 6 फीट लंबे लाल पर्दों पर रिफ्लेक्टर लगाने का निर्णय लिया है।
यह रिफ्लेक्टर न केवल रात में वाहनों को स्पष्ट रूप से दिखाएंगे, बल्कि धुंध या बारिश में भी उनकी दृश्यता सुनिश्चित करेंगे।

डॉ. कुमार ने कहा,
“हमारे गन्ना किसानों और ड्राइवरों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। उत्पादन के साथ-साथ सुरक्षित परिवहन हमारी जिम्मेदारी है।”


मिल परिसर में हुआ निरीक्षण — अधिकारियों ने दी बधाई

कार्यक्रम के दौरान सभी अधिकारी और कर्मचारी मिल परिसर में एकत्र हुए और रिफ्लेक्टर लगाए गए वाहनों का निरीक्षण किया।
सहायक चीनी आयुक्त डॉ. मनीष कुमार शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार की पहलें अन्य उद्योगों के लिए प्रेरणास्रोत बननी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक और संस्था की साझा जिम्मेदारी है।


त्रिवेणी शुगर मिल का सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) मॉडल

त्रिवेणी शुगर मिल पहले भी कई सामाजिक और पर्यावरणीय अभियानों में अग्रणी रही है। सड़क सुरक्षा के प्रति यह कदम उसके कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) की भावना को और मजबूत बनाता है।

इससे पहले भी मिल ने गन्ना किसानों के लिए सेफ ड्राइविंग वर्कशॉप, हेलमेट वितरण अभियान, और फर्स्ट एड ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए थे।


गन्ना ढुलाई सीजन में सुरक्षा सर्वोपरि

गन्ना सीजन के दौरान सड़कों पर बड़ी संख्या में ट्रॉली, ट्रक और बुग्गियाँ दौड़ती हैं। ऐसे में हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
रिफ्लेक्टर अभियान से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी वाहन दृश्य सीमा में आएं और कोई दुर्घटना न हो।

मिल प्रबंधन का मानना है कि यदि यह मॉडल अन्य मिलों में भी लागू किया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।


सड़क सुरक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी

डॉ. शुक्ला ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने किसानों और ट्रक ड्राइवरों से अपील की कि वे रिफ्लेक्टरों की नियमित जांच करें, खराब या ढीले पड़े हिस्सों को तुरंत बदलवाएं और रात में बिना रिफ्लेक्टर के वाहन न चलाएं।


खतौली की पहल बनी मिसाल

त्रिवेणी शुगर मिल की यह पहल अब अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बनती जा रही है।
मिल प्रबंधन ने घोषणा की है कि आने वाले सीजन में यह अभियान और अधिक बड़े स्तर पर चलाया जाएगा, और न केवल गन्ना वाहन, बल्कि सभी व्यावसायिक वाहनों पर “सेफ्टी रिफ्लेक्शन मार्किंग” अनिवार्य की जाएगी।


जनजागरूकता की दिशा में आगे बढ़ता खतौली

अभियान के अंत में मिल अधिकारियों ने स्थानीय ट्रक ड्राइवरों और गन्ना आपूर्तिकर्ताओं के साथ संवाद किया और उन्हें सड़क सुरक्षा के नियम समझाए।
साथ ही, एक सड़क सुरक्षा शपथ समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने शपथ ली कि वे वाहन चलाते समय सभी सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे।


त्रिवेणी शुगर मिल की यह अनोखी पहल खतौली को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बना रही है। इस अभियान ने साबित कर दिया है कि जब उद्योग जगत सामाजिक जिम्मेदारी समझता है, तो न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि जीवन भी सुरक्षित होता है। “रिफ्लेक्टर लगाओ, जीवन बचाओ” का यह संदेश अब पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गूंज रहा है।



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