Muzaffarnagar tax recovery को लेकर नगर पालिका प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुका है। वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में पहुंचते ही नगर पालिका मुजफ्फरनगर ने टैक्स वसूली को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि शहर के प्रमुख सरकारी कार्यालयों और भवनों पर ही जलकर और भवन कर के रूप में पांच करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि बकाया चल रही है। इस स्थिति ने न केवल पालिका की वित्तीय सेहत पर असर डाला है, बल्कि विकास योजनाओं की रफ्तार भी प्रभावित होने की आशंका पैदा कर दी है।


🔴 नगर पालिका का सख्त संदेश: अब नहीं चलेगी ढिलाई

नगर पालिका की कार्यकारी अधिकारी प्रज्ञा सिंह ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि इस बार टैक्स वसूली में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। Muzaffarnagar tax recovery अभियान के तहत बड़े बकायेदारों को चिन्हित कर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। ईओ ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए जनवरी माह में अपेक्षित वसूली न होने पर कड़ा कदम उठाया और राजस्व निरीक्षकों का वेतन रोक दिया। इस फैसले के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।


🔴 सरकारी दफ्तर बने सबसे बड़े बकायेदार

Muzaffarnagar Nagar Palika के राजस्व अभिलेखों के अनुसार, टैक्स बकाया सूची में निजी भवनों से अधिक सरकारी विभागों के नाम सामने आ रहे हैं। राजस्व निरीक्षक पारुल यादव द्वारा प्रस्तुत विवरण के मुताबिक, सबसे ज्यादा बकाया मंडी समिति पर है, जिस पर लगभग तीन करोड़ पैंसठ लाख रुपये का कर लंबित है। हालांकि, इसमें से करीब बीस लाख रुपये हाल ही में जमा कराए गए हैं, फिर भी शेष राशि अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इसके अलावा, एसएसपी कार्यालय पर लगभग 96 लाख रुपये, विकास भवन पर 33 लाख 70 हजार रुपये, जिला अस्पताल पर 32 लाख 50 हजार रुपये और सदर तहसील पर करीब 20 लाख रुपये का कर बकाया बताया गया है।


Muzaffarnagar News Vikas Bhawan🔴 वित्तीय वर्ष की डेडलाइन और बढ़ता दबाव

Muzaffarnagar tax recovery अभियान को लेकर नगर पालिका पर मार्च माह की समयसीमा का दबाव साफ नजर आ रहा है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले निर्धारित राजस्व लक्ष्य को हासिल करना प्रशासन के लिए अनिवार्य होता है। ऐसे में करोड़ों रुपये का बकाया रह जाना नगर पालिका के बजट संतुलन को बिगाड़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह राशि समय पर वसूल नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में सड़क, नाली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।


🔴 नोटिस की रणनीति: पहले बड़े बकायेदार

नगर पालिका प्रशासन ने तय किया है कि Muzaffarnagar municipal tax वसूली के तहत पहले उन विभागों को नोटिस भेजे जाएंगे, जिन पर सबसे अधिक राशि बकाया है। नोटिस में साफ तौर पर उल्लेख किया जा रहा है कि संबंधित विभाग अपने बजट प्रावधानों से नगर पालिका के करों का भुगतान सुनिश्चित करें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ निजी बड़े बकायेदारों के खिलाफ भी समान सख्ती बरती जाएगी।


🔴 वेतन रोके जाने से बदला माहौल

राजस्व निरीक्षकों का वेतन रोके जाने की कार्रवाई को विभाग के भीतर एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। कर्मचारियों के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि Muzaffarnagar tax recovery को लेकर अब केवल फाइलों तक सीमित काम नहीं चलेगा। फील्ड में जाकर सक्रिय वसूली, संबंधित विभागों से सीधा संवाद और नियमित रिपोर्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। कई कर्मचारियों का मानना है कि यह कदम भले ही कठोर हो, लेकिन इससे वसूली प्रक्रिया में तेजी आ सकती है।


🔴 प्रशासन की उम्मीद: कुछ हफ्तों में आएगा बड़ा भुगतान

नगर पालिका प्रशासन को उम्मीद है कि नोटिस जारी होने और सख्ती बढ़ने के बाद सरकारी विभागों से बकाया टैक्स की एक बड़ी राशि जल्द ही जमा होगी। Muzaffarnagar Nagar Palika का मानना है कि जैसे ही प्रमुख बकायेदार भुगतान शुरू करेंगे, पालिका की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। इससे रुकी हुई विकास परियोजनाओं को दोबारा गति मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।


🔴 शहर के विकास से जुड़ा है टैक्स भुगतान

अधिकारियों ने यह भी रेखांकित किया है कि नगर पालिका को मिलने वाला टैक्स सीधे तौर पर शहर की सुविधाओं से जुड़ा होता है। जलापूर्ति, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सड़क मरम्मत और नालियों की सफाई जैसे कार्य इसी राजस्व से संचालित होते हैं। ऐसे में Muzaffarnagar tax recovery केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि शहर के समग्र विकास से जुड़ा अहम विषय बन चुका है।


मुजफ्फरनगर में टैक्स वसूली को लेकर अपनाई गई सख्ती यह संकेत देती है कि नगर पालिका अब राजस्व के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। सरकारी दफ्तरों पर करोड़ों का बकाया और कर्मचारियों का वेतन रोके जाने जैसी कार्रवाई आने वाले दिनों में प्रशासनिक हलकों में बड़े बदलाव की भूमिका तैयार कर सकती है, जिसका सीधा असर शहर की आर्थिक और विकासात्मक दिशा पर पड़ेगा।

 



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