Muzaffarnagar। आज अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल की टीम छपार स्थित टोल प्लाजा पर पहुंची। इस दौरान मृतक अरविंद पांडेय के परिवार के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया गया। टीम ने टोल प्लाजा/राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मृतक पांडेय के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और बच्चों के भरण-पोषण के लिए मुआवजा प्रदान करने की मांग की।


नौकरी और मुआवजे की मांग: परिवार के लिए न्याय की गुहार

प्रदर्शनकारियों ने मृतक अरविंद पांडेय के परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। टीम ने कहा कि केवल मुआवजा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्य को स्थायी नौकरी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए।


रद्द नियुक्तियों की बहाली की मांग

प्रदर्शन के दौरान स्थानीय कर्मचारियों की रद्द की गई नियुक्तियों को पुनः नियमित करने की भी जोरदार मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस प्रकार के कदम कर्मचारियों में विश्वास और सुरक्षा की भावना बनाए रखते हैं।


मुख्य उपस्थित लोग और आयोजन का विवरण

इस अवसर पर मुख्य रूप से देशराज चैहान, बालेंद्र प्रधान, सोनू विश्वकर्मा, संदीप धीमान, अंकित राजपूत, निखिल राणा, विक्रांत ठाकुर, विकास राणा, सागर राणा, मनोज चैधरी, आनंद पल प्रधान, अशोक प्रधान, राजकुमार आदि मौजूद रहे। सभी ने संयुक्त रूप से मृतक परिवार के प्रति सहानुभूति व्यक्त की और प्रशासन पर दबाव डालने के लिए एकजुट होकर आवाज उठाई।


स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मांगें

टीम ने स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से आग्रह किया कि मृतक अरविंद पांडेय के परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उपाय तुरंत किए जाएँ। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति रद्द करना उचित नहीं है और सभी रद्द नियुक्तियों को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।


आर्थिक और सामाजिक न्याय के लिए समुदाय की भूमिका

Muzaffarnagar Toll Plaza Protest ने यह संदेश दिया कि सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए समुदाय का एकजुट होना कितना महत्वपूर्ण है। मृतक परिवार के लिए स्थायी नौकरी और मुआवजा न केवल न्याय का हिस्सा है, बल्कि यह बच्चों और परिवार की भविष्य सुरक्षित करने में भी सहायक है।

Muzaffarnagar Toll Plaza Protest ने मृतक अरविंद पांडेय के परिवार के लिए न्याय और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। परिवार के लिए नौकरी, मुआवजा और रद्द नियुक्तियों की बहाली की मांग ने प्रशासन और समुदाय में जागरूकता बढ़ाई और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल को मजबूती दी।

 

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