Muzaffarnagar के श्री रामलीला भवन नई मंडी में 99वें श्री रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन भव्य रूप से सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। इस शुभ अवसर पर प्रवीण गोयल (सपत्नी स्वास्तिक रबर), रविंद्र सिंघल (स्वास्तिक पेस्टिसाइड) सहित उनके परिवार ने रामलीला का आनंद लिया। पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत ने मंचन का शुभारंभ किया। कमेटी के अध्यक्ष संजय मित्तल, मंत्री अशोक गर्ग और कोषाध्यक्ष आदित्य भरतिया ने अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह देकर किया।
मंचन की मुख्य घटनाएँ
मथुरा से आए श्री गिरिराज लीला संस्थान के कलाकारों ने सीता स्वयंवर का भव्य मंचन प्रस्तुत किया। मंच पर राजा जनक ने धनुष यज्ञ दरबार सजाया, जिसमें देश-देशांतर से आए राजा-महाराजा भगवान शिव के धनुष का भंजन करने आए, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। यह दृश्य देखकर राजा जनक दुखी हुए और बोले कि यह धरती वीरों से खाली है।
लक्ष्मण और प्रभु श्री राम का प्रेरक संवाद
राजा जनक की बात सुनकर लक्ष्मण जी क्रोधित हुए और प्रभु श्री राम से बोले कि यदि आपने धनुष का भंजन नहीं किया तो मैं आगे धनुष-बाण नहीं उठाऊंगा। गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को धनुष भंजन करने के लिए प्रेरित किया। प्रभु श्री राम ने शिवधनुष का प्रणाम कर भजन किया। जैसे ही धनुष भंजन हुआ, पूरे पंडाल में जय श्री राम के जय घोष गूंजने लगे।
वरमाला का सजीव दृश्य और पुष्प वर्षा
माता जानकी वरमाला डालने लगी, लेकिन श्री राम ने झुकने में विलंब किया। लक्ष्मण जी के इशारे पर माता जानकी ने उन्हें वरमाला पहनाई। इसके बाद प्रभु श्री राम ने माता जानकी को भी माला पहना दी। इस दृश्य पर चारों ओर से जय-जयकार और पुष्प वर्षा हुई।
परशुराम और लक्ष्मण संवाद का मंचन
सीता स्वयंवर के बाद परशुराम जी और लक्ष्मण जी के संवाद की लीला का भी भव्य मंचन किया गया। दर्शकों ने इस अद्भुत नाट्य कला का आनंद लिया और बच्चों एवं युवाओं में धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा का संदेश पहुंचा।
उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व
इस अवसर पर कैलाश चंद ज्ञानी, बृज गोपाल छारिया, राजीव अग्रवाल, अशोक कुमार ठेकेदार, उपेंद्र मित्तल, विदित गुप्ता, संजय जिंदल काका, विनोद संगल, अभिषेक कुच्छल, विवेक बंसल, डॉ. प्रदीप जैन, शरद गोयल, विनय अग्रवाल, राजेश गोयल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक महोत्सव में दर्शकों की भागीदारी
रामलीला मंचन में दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी, और जय श्री राम के उद्घोष के साथ हर कोई इस भव्य नाट्यकला का आनंद ले रहा था। मंचन ने युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक भावनाओं को जगाने का काम किया।
मुजफ्फरनगर की नई मंडी रामलीला में सीता स्वयंवर का भव्य मंचन न केवल दर्शकों के लिए मनोरंजन का अवसर बना बल्कि धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संदेश भी फैलाया। प्रभु श्री राम और माता जानकी की लीला ने सभी उपस्थित जनों के मन में श्रद्धा और उत्साह की भावना उत्पन्न की। जय श्री राम के उद्घोष और पुष्प वर्षा के साथ यह आयोजन यादगार बन गया।
