खतौली। मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar)जनपद एक बार फिर दर्दनाक हादसे का गवाह बना जब शनिवार सुबह नेशनल हाईवे-58 पर स्थित खतौली क्षेत्र के साक्षी होटल के पास खड़ी ट्रक में एक रोडवेज बस पीछे से टकरा गई। यह रोडवेज बस जयपुर डिपो की थी, जो यात्रियों को लेकर हरिद्वार जा रही थी। हादसे के वक्त बस में करीब 25 से 30 यात्री सवार थे। यह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का आगे का हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इस हादसे ने न केवल यात्रियों बल्कि स्थानीय लोगों के होश उड़ा दिए।


हादसे की भयावहता और क्षणभर में मचा कोहराम

टक्कर के वक्त अधिकतर यात्री गहरी नींद में थे, जिससे घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शी और स्थानीय निवासी आवेश के अनुसार, “बस बहुत तेजी से चल रही थी और अचानक एक जोरदार धमाके की आवाज आई। मैंने दौड़कर देखा तो बस का अगला हिस्सा ट्रक में धंसा हुआ था और यात्री बुरी तरह घायल हो चुके थे।”


घायलों की स्थिति और त्वरित राहत कार्य

हादसे में 11 यात्री घायल हुए, जिनमें दो की हालत बेहद गंभीर बताई गई है। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की पहचान गुजरात के मेहसाणा निवासी गौरंग पुत्र बलदेव के रूप में हुई है। अन्य घायलों में कुलदीप, अशोक कुमार, सरिता गुप्ता और आवेश शामिल हैं। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। घायलों को तत्काल खतौली के नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है।


पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और जांच शुरू

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। घायल यात्रियों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया और सड़क पर लगे ट्रैफिक को नियंत्रित किया गया। फिलहाल पुलिस दुर्घटना की जांच में जुटी है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसा ड्राइवर की लापरवाही का परिणाम था या किसी तकनीकी खराबी के चलते हुआ।


खतरनाक होती जा रही हाईवे की सड़कें: बढ़ते हादसों पर नहीं लग रहा ब्रेक

यह घटना अकेली नहीं है। बीते कुछ महीनों में नेशनल हाईवे-58 पर कई ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिनमें बेकसूर यात्रियों की जानें जा चुकी हैं। भारी वाहनों की सड़क किनारे अनियमित पार्किंग, सड़क निर्माण कार्य में लापरवाही, और रोड सेफ्टी नियमों की अनदेखी इन हादसों के प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि रोडवेज बसों को समय-समय पर तकनीकी जांच से गुजारा जाना चाहिए। साथ ही, ड्राइवरों की नींद और थकावट को लेकर भी सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों के लिए जाने वाली बसों में अधिकतर यात्री बुजुर्ग होते हैं, ऐसे में सुरक्षा के मानक और भी सख्त होने चाहिए।


क्या कहती हैं हादसे से जुड़ी पिछली घटनाएं?

इससे पहले भी इसी मार्ग पर खतौली के पास साल 2022 में एक प्राइवेट बस और ट्रक की टक्कर में 14 लोग घायल हो गए थे। वहीं, 2023 में एक रोडवेज बस पुलिया से टकराकर पलट गई थी, जिसमें 3 यात्रियों की जान चली गई थी। इन आंकड़ों से साफ है कि NH-58 अब हादसों का हाईवे बनता जा रहा है।


सरकारी उपाय और जनजागरूकता की आवश्यकता

राज्य सरकार ने बार-बार हादसों को लेकर समीक्षा बैठकें की हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि ट्रकों की अनियंत्रित पार्किंग पर रोक लगे, रोडवेज ड्राइवरों की ट्रेनिंग बेहतर हो और हाईवे पर ट्रैफिक नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए।

इसके अलावा, यात्रियों को भी सावधान रहने की जरूरत है। सफर के दौरान सीट बेल्ट पहनना, वाहन में चढ़ने से पहले उसकी स्थिति की जांच करना, और किसी भी तकनीकी खराबी की सूचना तुरंत देना जरूरी है।


मानवता फिर हुई शर्मसार, घायल यात्रियों की मदद में आगे आए स्थानीय लोग

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने घायलों की मदद के लिए आगे आकर मानवता का परिचय दिया। बिना देरी किए, लोगों ने घायलों को बाहर निकाला, पुलिस को सूचना दी और एंबुलेंस को बुलाया।

यदि यह त्वरित प्रतिक्रिया नहीं होती, तो शायद कुछ जानें और जा सकती थीं।


प्रशासन की अग्निपरीक्षा: कब तक जारी रहेंगे हादसे?

अब सवाल यह उठता है कि कब तक यात्रियों की जानें ऐसे हादसों में जाती रहेंगी? क्या सरकार और प्रशासन की नींद इस हादसे के बाद खुलेगी? जरूरत है सख्त ट्रैफिक नियमों, तकनीकी सुरक्षा मानकों और सड़कों पर निगरानी को और सख्त करने की।


अंतिम जानकारी के अनुसार, घायल यात्रियों की स्थिति स्थिर है, जबकि पुलिस ने बस ड्राइवर से पूछताछ शुरू कर दी है। NH-58 पर ट्रैफिक सामान्य कर दिया गया है। हादसे की गहराई से जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।

 



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