Muzaffarnagar। जिले के भोपा रोड स्थित एक पेपर मिल में क्रेन की चपेट में आने से एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने मिल के गेट पर शव रखकर जमकर हंगामा किया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद, परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। इस मामले ने मिल प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है, जहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
हादसे का पूरा घटनाक्रम: कैसे हुई महिला की मौत?
सूत्रों के अनुसार, मृतक महिला मुकेश (पत्नी शिव कुमार, निवासी गांव दतियाना, थाना छपार) पेपर मिल में काम कर रही थी, जब अचानक क्रेन की चपेट में आ गई। हादसे के बाद मिल प्रशासन ने परिजनों को सूचित किए बिना ही गंभीर रूप से घायल महिला को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी मौत हो गई। जब इस घटना की जानकारी परिजनों को मिली, तो गुस्से में उन्होंने शव को मिल के गेट पर रखकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
परिजनों का गुस्सा और मिल प्रशासन पर गंभीर आरोप
मृतका के परिजनों और गांव की अन्य महिलाओं ने मिल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि—
- मिल प्रशासन ने हादसे के बाद बिना जानकारी दिए महिला को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया।
- घायल महिला को सरकारी अस्पताल में भर्ती न कराकर, मामले को छिपाने की कोशिश की गई।
- पहले भी मिल में ऐसे हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
- मृतक के परिजनों को मुआवजा देने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।
मिल में पहले भी हो चुके हैं हादसे, लेकिन कार्रवाई नहीं
यह पहला मामला नहीं है जब इस पेपर मिल में ऐसा हादसा हुआ हो। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां पहले भी कई बार मजदूरों के साथ दुर्घटनाएं हुई हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया जाता है। मजदूरों की सुरक्षा को लेकर मिल प्रबंधन गंभीर नहीं है, और प्रशासन भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल, क्यों नहीं होती सख्त कार्रवाई?
स्थानीय ग्रामीणों और मजदूर संगठनों का आरोप है कि पेपर मिल में बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद प्रशासन कोई सख्त कार्रवाई नहीं करता। मजदूरों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जाती है, और हादसों को छिपाने का प्रयास किया जाता है।
संघटनों के दलाल भी हो रहे सक्रिय?
मृतक महिला के परिजनों का आरोप है कि इस मामले में कई संगठन और दलाल भी सक्रिय हो गए हैं, जो परिजनों को फैसले के लिए दबाव में लेने की कोशिश कर रहे हैं। इन दलालों का उद्देश्य केवल अपने निजी लाभ के लिए घटना को भुनाना है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में देरी हो सकती है।
हंगामे के बाद पुलिस की दखलअंदाजी
जैसे ही विरोध प्रदर्शन बढ़ा, स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी और उचित कार्रवाई होगी। हालांकि, परिजन बिना ठोस आश्वासन के हटने को तैयार नहीं थे।
मजदूरों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की वजह से मजदूरों की जान खतरे में रहती है। ऐसे मामलों में अक्सर देखा गया है कि—
- सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जाता।
- मशीनों और उपकरणों का सही से निरीक्षण नहीं होता।
- हादसे के बाद कंपनियां पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं देतीं।
- प्रशासनिक अधिकारी उद्योगपतियों के प्रभाव में आकर सख्त कार्रवाई नहीं करते।
मुआवजे और न्याय की मांग
मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों ने मिल प्रशासन पर कार्रवाई की मांग के साथ-साथ उचित मुआवजा देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
सरकार और प्रशासन को उठाने होंगे ठोस कदम
इस घटना के बाद सवाल यह उठता है कि प्रशासन कब तक मजदूरों की जान से खिलवाड़ होते देखता रहेगा? सरकार को चाहिए कि—
- मजदूरों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं।
- हर औद्योगिक इकाई में सेफ्टी ऑडिट किया जाए।
- लापरवाही बरतने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
- हादसों के दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
न्याय की उम्मीद और प्रशासन की जिम्मेदारी
मृतक महिला के परिजन अभी भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। यह मामला सिर्फ एक महिला की मौत का नहीं है, बल्कि उन हजारों मजदूरों की सुरक्षा से जुड़ा है, जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। प्रशासन और सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसे न हों।
