Muzaffarnagar बामनहेरी स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता के रूप में केशवपुरी सेवा केंद्र की इंचार्ज, राजयोगिनी बीके जयंती दीदी ने बताया कि श्रीकृष्ण, जिन्हें 16 कला सम्पूर्ण माना जाता है, मानव चोले में सर्वोत्तम जन्म का प्रतीक थे। उनके भीतर शारीरिक आरोग्यता, आत्मिक बल, पवित्रता और दिव्य गुणों की पराकाष्ठा थी। सतयुग से लेकर कलियुग के अंत तक, श्रीकृष्ण जैसा महान व्यक्तित्व न कभी हुआ है और न ही होगा।
श्रीकृष्ण की शिक्षा और उनका प्रभाव
श्रीकृष्ण का जीवन केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धता और नैतिकता की मिसाल है। उनका व्यक्तित्व युवाओं के लिए आज भी प्रेरणादायक है। ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय में उनके गुणों को आत्मसात कर समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया जाता है।
दादी प्रकाशमणि: नारी शक्ति की प्रतीक
इस अवसर पर, ब्रह्माकुमारीज की पूर्व मुख्य प्रशासिका, राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 17वीं पुण्यतिथि भी मनाई गई। बीके जयंती दीदी ने दादी प्रकाशमणि को याद करते हुए कहा कि वह निर्भयता और अष्ट रत्न की शक्ति से परिपूर्ण थीं। दादी का जीवन नारी शक्ति की जीती-जागती मिसाल था, जिन्होंने अपने कर्म और सोच से यह साबित किया कि जब लक्ष्य पवित्र और महान हो, और परमात्मा का साथ हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है। उनके जीवन का तप और विराट सोच आज भी हजारों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय: एक आत्मिक आंदोलन
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय एक आत्मिक आंदोलन के रूप में देखा जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1936 में लाहौर में हुई थी, और तब से लेकर आज तक इस संस्था ने पूरे विश्व में अपने संदेशों को फैलाया है। इस विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य मानवता को शांति, प्रेम, और आत्मिक विकास की ओर अग्रसर करना है। ब्रह्माकुमारीज संस्था राजयोग का अभ्यास करवाती है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने अंदर की शक्ति और आत्मिक बल को पहचान सकता है।
समाज में ब्रह्माकुमारीज का योगदान
ब्रह्माकुमारीज केवल एक धार्मिक संस्था नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और नैतिक सुधार के कार्यों में भी सक्रिय है। इसके द्वारा संचालित शिक्षा, स्वास्थ्य, और महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। संस्था के सदस्यों द्वारा विश्वभर में शांति और नैतिकता का संदेश फैलाने का कार्य किया जा रहा है।
संस्था की सेवाएं प्राकृतिक आपदाओं के समय भी देखने को मिलती हैं, जब इसके सदस्य प्रभावित लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। इसके अलावा, ब्रह्माकुमारीज पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी योगदान दे रही है। उनके द्वारा वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
जन्माष्टमी का आध्यात्मिक महत्व
ब्रह्माकुमारीज के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व केवल श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्मा के जन्म और नवजागरण का भी प्रतीक है। श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरित होकर, व्यक्ति अपने जीवन में शांति, प्रेम, और आत्मिकता को स्थान दे सकता है।
इस प्रकार, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केवल एक धार्मिक संस्था नहीं है, बल्कि यह समाज के नैतिक और आत्मिक उत्थान के लिए कार्य कर रही है। श्रीकृष्ण के आदर्शों और दादी प्रकाशमणि के जीवन से प्रेरित होकर, संस्था के सदस्य समाज में शांति, प्रेम, और नैतिकता का प्रचार कर रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों से समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास जारी है। कार्यक्रम में बीके विधि, रिया, राधिका, अनमोल कर्णवाल, शैलेश भाई, जीत सिंह तथा मीडिया प्रभारी बीके केतन कर्णवाल आदि उपस्थित रहे।
