Muzaffarnagar जनपद के Chhappar क्षेत्र में बिजली विभाग को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आज गांव बरला में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान आजाद समाज पार्टी (आसपा) के जिला उपाध्यक्ष Sajid Ali ने विद्युत विभाग के एक अवर अभियंता पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने दावा किया कि एक ग्रामीण के खिलाफ बिजली चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज कर न केवल उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि मामले की शिकायत करने पर भी उच्च अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया। Chhappar electricity theft case अब स्थानीय राजनीति और किसान संगठनों के लिए बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।


तीन माह पुराना मामला, तीन दिन बाद दर्ज हुआ मुकदमा—सवालों के घेरे में विभाग

प्रेसवार्ता में साजिद अली ने विस्तार से बताया कि करीब तीन महीने पहले गांव बरला निवासी Somendra Kashyap के विरुद्ध विद्युत चोरी का मामला दर्ज किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित घटना के तीन दिन बाद मुकदमा दर्ज किया गया, जो अपने आप में संदेह पैदा करता है।

उनका कहना था कि यदि वास्तव में बिजली चोरी हुई थी, तो कार्रवाई तत्काल क्यों नहीं की गई? देरी से दर्ज किया गया मुकदमा विभागीय मनमानी और व्यक्तिगत द्वेष की ओर इशारा करता है। Chhappar electricity theft case में यही बिंदु सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है।


शिकायतों का सिलसिला: आला अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक

साजिद अली ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों से की गई।
आरोप है कि अधिकारियों ने जांच का आश्वासन देकर मामले को टाल दिया। इसके बाद मजबूर होकर उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल और ऊर्जा मंत्री को सबूतों के साथ शिकायत भेजी।

हालांकि, उनका आरोप है कि जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई और अवर अभियंता को बिना गहन जांच के क्लीन चिट दे दी गई। इससे भी अधिक चौंकाने वाला आरोप यह रहा कि जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता पर ही बिजली चोरी करने का झूठा आरोप लगा दिया।


Chhappar electricity theft case: छवि खराब करने की साजिश का आरोप

आसपा नेता ने कहा कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट न केवल तथ्यहीन है, बल्कि यह शिकायतकर्ता की सामाजिक छवि खराब करने का प्रयास भी है।
उन्होंने इसे “सरासर गलत और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई” बताया और कहा कि एक आम ग्रामीण को डराने और दबाने की यह कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस कथित मानहानि के खिलाफ जांचकर्ता को कानूनी नोटिस भेज दिया गया है। Chhappar electricity theft case अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी मोड़ भी ले चुका है।


पैदल मार्च और बड़े अधिकारियों से मिलने की तैयारी

साजिद अली ने प्रेसवार्ता में ऐलान किया कि जल्द ही वह पैदल मार्च करेंगे और मुख्य अभियंता व प्रबंध निदेशक से मिलकर इस पूरे प्रकरण की दोबारा निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित कराने की मांग करेंगे।

उनका कहना था कि यदि उच्च स्तर पर पारदर्शी जांच होती है, तो सच्चाई खुद सामने आ जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए है।


मुख्यमंत्री तक जाने की चेतावनी, आंदोलन के संकेत

आसपा जिला उपाध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समिति गठित कर निष्पक्ष जांच नहीं की गई और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वह सीधे मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक ग्रामीण का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों लोगों का है, जो बिजली विभाग की कथित मनमानी से परेशान हैं। Chhappar electricity theft case आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।


किसान संगठनों का समर्थन, आंदोलन की चेतावनी

इस मुद्दे पर किसान संगठनों का समर्थन भी सामने आ गया है। Bhartiya Kisan Union Kisan Sena के मंडल अध्यक्ष Mursaleen ने भी मामले में कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने साफ कहा कि यदि बिजली विभाग द्वारा कथित गलत कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई गई, तो भाकियू किसान सेना आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी। इससे साफ है कि Chhappar electricity theft case अब राजनीतिक के साथ-साथ किसान आंदोलन का मुद्दा भी बनता जा रहा है।


ग्रामीणों में रोष, विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद गांव बरला और आसपास के इलाकों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली चोरी के नाम पर कई बार निर्दोष लोगों को परेशान किया जाता है, जबकि वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह मामला प्रशासन को व्यवस्था सुधारने के लिए मजबूर करेगा।


छपार क्षेत्र में सामने आया यह विवाद बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। Chhappar electricity theft case अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कानूनी कार्रवाई, पैदल मार्च और संभावित आंदोलन की आहट भी सुनाई देने लगी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर विश्वास बहाल करता है या यह मामला और अधिक तूल पकड़ता है।



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