मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar) मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में आगामी उपचुनाव को लेकर सियासी गर्माहट तेज हो गई है। सपा प्रत्याशी श्रीमति सुम्बुल राणा द्वारा क्षेत्र में सक्रिय प्रचार अभियान के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन किया गया, जिस कारण राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। इस मामले में पूर्व सांसद कादिर राणा समेत अन्य 10 नामजद और 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ अभियोग दर्ज किया गया है। यह मामला 8 नवम्बर को ग्राम लालपुर रेहकडा के पंचायत घर में आयोजित एक बैठक से जुड़ा है, जिसमें सरकारी भवन का उपयोग किया गया, जो कि चुनावी आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।

कैसे हुआ आचार संहिता का उल्लंघन?

आदर्श आचार संहिता के अनुसार, किसी भी सरकारी स्थान, भवन, या संपत्ति का इस्तेमाल किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार या बैठक के लिए नहीं किया जा सकता। लेकिन, सपा प्रत्याशी सुम्बुल राणा के समर्थन में आयोजित इस बैठक में सरकारी पंचायत घर का उपयोग किया गया। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद थे, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र से आए थे।

क्षेत्राधिकारी जानसठ यतेन्द्र सिंह नागर ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि रामराज थाना पुलिस ने पूर्व सांसद कादिर राणा समेत 10 नामजद और 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले की गहन जांच की जाएगी और जो भी साक्ष्य मिलेंगे, उनके आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

कादिर राणा पर गंभीर आरोप

पूर्व सांसद कादिर राणा पर इस मामले में मुख्य आरोपी का दर्जा है। वह पहले से ही कई राजनीतिक और सामाजिक मामलों में चर्चित रहे हैं, और अब इस विवाद ने उनकी छवि पर और अधिक असर डाला है।

स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाले ऐसे किसी भी तरह के उल्लंघनों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रामराज थाना प्रभारी का कहना है कि यदि दोष सिद्ध होता है, तो कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सपा प्रत्याशी सुम्बुल राणा का बयान

सपा की प्रत्याशी सुम्बुल राणा ने इस घटना पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके प्रचार के दौरान किसी भी तरह का कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह एक साजिश है, जिसके जरिए उनके प्रचार अभियान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

सुम्बुल राणा का मानना है कि उनके खिलाफ उठाए जा रहे आरोप पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि यह बैठक एक सामान्य बैठक थी, जिसमें ग्राम पंचायत के कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जानी थी।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप मीरापुर उपचुनाव को और भी गरमाएंगे। मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ समय से राजनीतिक माहौल काफी गर्म है, और यह मामला सपा और भाजपा के बीच एक नई टकराहट की शुरुआत कर सकता है। इस उपचुनाव में जहां सुम्बुल राणा सपा के प्रमुख चेहरों में से एक हैं, वहीं भाजपा भी अपने प्रत्याशी को लेकर रणनीति में कोई कमी नहीं छोड़ रही है।

आचार संहिता का महत्व

आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका पालन करना सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य होता है। इसका उल्लंघन न केवल कानूनन गलत है, बल्कि यह चुनाव के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन में भी बाधा डालता है। चुनाव आयोग भी ऐसे मामलों में सख्त रवैया अपनाता है। इस मामले में अगर कादिर राणा समेत अन्य आरोपियों पर दोष सिद्ध होता है, तो सख्त दंड भी मिल सकता है।

सपा के कार्यकर्ताओं का समर्थन

इस मुद्दे पर सपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं में आक्रोश देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि विपक्षी दलों द्वारा उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, सुम्बुल राणा ने जनसमर्थन जुटाने के लिए मेहनत की है, और उनकी बढ़ती लोकप्रियता से विरोधी घबरा रहे हैं।

सपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के आरोपों से सुम्बुल राणा का मनोबल और भी बढ़ेगा। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोपों को निराधार बताया है।

मीरापुर में चुनावी हवा का रुख

मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में यह उपचुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। भाजपा और सपा के बीच इस सीट को लेकर घमासान है। जहां एक तरफ भाजपा कानून व्यवस्था को मुद्दा बना रही है, वहीं सपा विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर जोर दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी है, और वे इस बार ऐसे उम्मीदवार को चुनना चाहते हैं, जो उनके मुद्दों को सही मंच पर ले जाकर हल कर सके।

मीरापुर उपचुनाव में आचार संहिता के उल्लंघन का यह मामला राजनैतिक सरगर्मी को और बढ़ा देगा। इस घटना से जहां सपा के लिए मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं, वहीं भाजपा इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया में क्या नतीजे निकलते हैं, और यह घटना किस हद तक मीरापुर की चुनावी राजनीति को प्रभावित करेगी।

 



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