Muzaffarnagar Disaster Mitra पहल एक बार फिर प्रशासन और समाज के बीच मजबूत सेतु बनकर सामने आई, जब जिलाधिकारी कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में जिले के प्रशिक्षित आपदा मित्र स्वयंसेवकों ने देशव्यापी ऑनलाइन संवाद कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। लखनऊ से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे इन स्वयंसेवकों ने गृह एवं सहकारिता मंत्री, भारत सरकार की अध्यक्षता में आयोजित इस वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से न केवल प्रेरणा प्राप्त की, बल्कि अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को नए दृष्टिकोण से समझा।
🔴 एनआईसी कक्ष बना संवाद का केंद्र
जिलाधिकारी कार्यालय परिसर स्थित एनआईसी कक्ष उस समय गतिविधियों से भरा नजर आया, जब जिले के सभी प्रशिक्षित आपदा मित्र एकत्र होकर स्क्रीन के माध्यम से देशभर के स्वयंसेवकों से जुड़े। इस कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) गजेंद्र कुमार के नेतृत्व में मुज़फ्फरनगर जिले के आपदा मित्रों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का माहौल उत्साह और अनुशासन से भरा हुआ था। स्वयंसेवक अपने अनुभव साझा करने और देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े साथियों की कहानियां सुनने को उत्सुक दिखाई दिए। यह मंच केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा जिम्मेदारी का प्रतीक बन गया।
🔴 गृह मंत्री का संदेश: सबसे पहली कड़ी आपदा मित्र
गृह एवं सहकारिता मंत्री ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में सबसे पहले स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मौजूदगी राहत और बचाव कार्यों को तेज और प्रभावी बनाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक तंत्र की सफलता तभी संभव है, जब समुदाय के लोग स्वयं आगे बढ़कर मदद के लिए तैयार हों।
उन्होंने कहा कि आपदा मित्र केवल स्वयंसेवक नहीं, बल्कि संकट के समय समाज के रक्षक होते हैं। भूकंप, बाढ़, अग्निकांड या सड़क दुर्घटना जैसी घटनाओं में उनकी तत्परता और साहस कई जिंदगियों को बचा सकता है।
🔴 देशभर से जुड़े अनुभवों की गूंज
Muzaffarnagar Disaster Mitra संवाद कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े आपदा मित्रों ने अपने अनुभव साझा किए। किसी ने बाढ़ के दौरान फंसे परिवारों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कहानी सुनाई, तो किसी ने अग्निकांड में समय पर पहुंचकर कई लोगों की जान बचाने का अनुभव साझा किया।
इन कहानियों ने यह साबित किया कि प्रशिक्षण केवल तकनीकी ज्ञान नहीं देता, बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना भी पैदा करता है। स्वयंसेवकों ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद वे न केवल आपदा के समय बल्कि सामान्य दिनों में भी समाज को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।
🔴 अपर जिलाधिकारी का नेतृत्व और संदेश
अपर जिलाधिकारी गजेंद्र कुमार ने कहा कि आपदा मित्र विपरीत परिस्थितियों में समाज के लिए एक मजबूत कड़ी बनकर उभर सकते हैं। उन्होंने सेवा, समर्पण और विश्वास की भावना को इस कार्यक्रम की आत्मा बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रशासन और आम जनता के बीच सेतु का कार्य करते हैं। जब आपदा आती है, तब यही स्वयंसेवक सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं और प्रशासन के निर्देशों को जमीन पर उतारते हैं।
🔴 रिफ्रेशर ट्रेनिंग पर जोर
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि आपदा मित्रों को समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे हर तरह की आपात स्थिति में बेहतर ढंग से कार्य कर सकें। बदलती परिस्थितियों और नई चुनौतियों के बीच प्रशिक्षण को अपडेट रखना बेहद जरूरी माना गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास और मॉक ड्रिल से स्वयंसेवकों की दक्षता बढ़ती है और वे संकट के समय बिना घबराए सही निर्णय ले पाते हैं।
🔴 प्रशासन और स्वयंसेवकों की साझेदारी
Muzaffarnagar Disaster Mitra कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह समाज और प्रशासन की साझी पहल है। जब दोनों मिलकर काम करते हैं, तब राहत और बचाव कार्य कहीं अधिक प्रभावी बनते हैं।
इस संवाद कार्यक्रम में आपदा सहायक नासिर हुसैन, प्रिंसी और इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर से गुलफाम अहमद सहित अन्य अधिकारी और स्वयंसेवक भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस पहल को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
🔴 नई ऊर्जा और भविष्य की दिशा
संवाद कार्यक्रम के समापन पर स्वयंसेवकों के चेहरों पर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया। कई आपदा मित्रों ने कहा कि देशभर के साथियों के अनुभव सुनकर उन्हें यह एहसास हुआ कि वे एक बड़े राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा हैं।
यह मंच उन्हें केवल सीखने का अवसर नहीं देता, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि उनकी छोटी-सी कोशिश किसी के लिए जीवनदान बन सकती है।
🔴 समाज के लिए मजबूत सुरक्षा कवच
Muzaffarnagar Disaster Mitra पहल अब केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनती जा रही है। स्कूलों, मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर आपदा मित्र लोगों को यह सिखा रहे हैं कि संकट के समय घबराने के बजाय सही कदम कैसे उठाए जाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पहल से न केवल जान-माल का नुकसान कम होता है, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और भरोसे की भावना भी मजबूत होती है।
Muzaffarnagar Disaster Mitra कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया है कि प्रशिक्षित स्वयंसेवक केवल आपदा के समय ही नहीं, बल्कि हर दिन समाज की सुरक्षा और विश्वास की नींव मजबूत करते हैं। एनआईसी कक्ष से उठा यह संवाद आने वाले समय में और अधिक संगठित, जागरूक और सक्षम समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनकर उभरा है।
