Muzaffarnagar। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ के माननीय मुख्य पर्यावरण अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से एमएसएमई इकाइयों (MSME Units) से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान हेतु सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। यह ज्ञापन विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में कार्यरत लगभग 15,000 एमएसएमई इकाइयों के हितों की रक्षा के लिए तैयार किया गया है।
आईआईए का कहना है कि एमएसएमई क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। उद्यमी पूरी तरह पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग हैं, लेकिन वर्तमान नियमों और प्रक्रियाओं में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयाँ हैं, जिन्हें सुधारने की आवश्यकता है।
**एमएसएमई इकाइयों को दी जाने वाली चेतावनी प्रणाली में बदलाव की मांग
आईआईए ने सुझाव दिया है कि उद्योगों पर सीधे जुर्माना या बंदी की कार्रवाई करने के बजाय पहले उन्हें चेतावनी दी जाए और सुधार का अवसर दिया जाए। यह कदम न केवल उद्यमियों के लिए राहत प्रदान करेगा बल्कि पर्यावरण नियमों के पालन को भी सुनिश्चित करेगा।
**एनओसी संशोधन और शुल्क की प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत
आईआईए के अनुसार, जिन इकाइयों ने एनओसी (No Objection Certificate) प्राप्त कर ली है और पूरी फीस जमा कर दी है, उन्हें संशोधन की आवश्यकता होने पर उसी जमा हुई फीस के अंतर्गत संशोधन की अनुमति दी जानी चाहिए, नई फीस लागू नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही, अगर किसी कंपनी की एक से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ हैं, तो प्रत्येक इकाई के लिए सहमति शुल्क केवल उस विशेष इकाई के पूंजी निवेश के आधार पर ही निर्धारित किया जाना चाहिए।
**प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों में निवेश पर प्रोत्साहन
आईआईए ने सुझाव दिया है कि उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके तहत, प्रदूषण नियंत्रण में किए गए निवेश की एक निश्चित राशि को सहमति शुल्क में घटाया जा सकता है। इससे स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के उपायों को बढ़ावा मिलेगा।
**फॉर्म भरने में सहायता और विशेषज्ञ अधिकारी की नियुक्ति
एमएसएमई उद्यमियों के लिए ईपीआर और एनओसी फॉर्म भरना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। आईआईए ने सुझाव दिया है कि इस कार्य के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो उद्यमियों को फॉर्म भरने में मदद कर सके। इससे बिचौलियों की आवश्यकता समाप्त होगी और प्रक्रिया सुगम होगी।
**श्वेत श्रेणी प्रमाणपत्र और निरीक्षण में सहूलियत
जो इकाइयाँ श्वेत श्रेणी में आती हैं, उन्हें औपचारिक रूप से “श्वेत श्रेणी प्रमाणपत्र” जारी किया जाए। इससे निरीक्षण के दौरान उन्हें बिना एनओसी संचालित इकाई की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।
**जिला उद्योग केंद्र से एनओसी और समाधान/माफी योजना
एमएसएमई यूनिट्स जिनके पास जिला उद्योग केंद्र से प्रमाणपत्र है, उन्हें अलग से एनओसी लेने के लिए बाध्य न किया जाए। इसके अलावा, आईआईए ने सुझाव दिया है कि “समाधान/माफी योजना” के तहत विशेष कैंप आयोजित किए जाएँ, जहां हवा और पानी की कान्सेन्ट एप्लिकेशन तुरंत भरी जाए और कनसेन्ट सर्टिफिकेट तुरंत जारी किया जाए।
**डीजी सेट और पुराने जुर्माने की माफी
यदि किसी इकाई ने पुराने डीजी सेट की अनुमति प्राप्त की थी और बाद में नया डीजी सेट खरीदा है, तो वही कन्सेन्ट नए डीजी सेट के लिए मान्य माना जाए। हाल ही में कुछ इकाइयों पर पुराने डीजी सेट को लेकर भारी जुर्माना लगाया गया था। आईआईए ने मांग की है कि ऐसे मामलों में जुर्माना माफ किया जाए।
**राजस्व का स्थानीय स्तर पर उपयोग
आईआईए ने जोर देकर कहा है कि सहमति आदि से जो राजस्व किसी विशेष क्षेत्र से एकत्र होता है, उसका उपयोग उसी क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण सुरक्षा उपकरणों पर किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यावरणीय सुधार सुनिश्चित होगा।
आईआईए के सुझावों का संभावित प्रभाव
इस ज्ञापन के लागू होने से एमएसएमई इकाइयों को राहत मिलेगी और वे पर्यावरण नियमों का पालन सहज रूप से कर पाएँगी। इससे न केवल उद्यमियों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी।
एमएसएमई इकाइयों के लिए आईआईए का ज्ञापन एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इसके लागू होने से पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन आसान होगा और उद्यमियों को व्यावहारिक कठिनाइयों से निजात मिलेगी। उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा और एमएसएमई क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करेगा।