बीते दिन सड़क पर विशेष अभियान चलाकर ओवरलोड और अवैध खनन में शामिल वाहनों की धड़पकड़ की गई। इस दौरान दो ओवरलोड खनन के वाहनों के चालान किए गए, जबकि खोई और भूसे से भरी दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सीज कर दिया गया। इन वाहनों पर सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 4.29 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हड़कंप मच गया है।
अब बिना परमिट नहीं दौड़ेंगे वाहन, प्रशासन का सख्त एक्शन!
जिला प्रशासन के अनुसार, ओवरलोडिंग और अवैध खनन में लिप्त वाहनों के खिलाफ सख्ती से कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई में एक वाहन ऐसा भी था जो बिना परमिट संचालित हो रहा था, जिसे पकड़कर तत्काल प्रभाव से जुर्माने की कार्रवाई की गई।
परिवहन अधिकारी सुशील मिश्रा ने कहा कि “यह कार्रवाई सिर्फ एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में और भी कड़ी जांच होगी और जो भी वाहन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उन पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
खनन माफिया और ट्रांसपोर्टरों में हड़कंप, जुर्माने से सहमे वाहन मालिक!
जैसे ही परिवहन विभाग ने यह अभियान चलाया, जिले में खनन माफिया और अवैध रूप से वाहन चलाने वालों के बीच खलबली मच गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है।
अधिकारियों के अनुसार, अवैध रूप से संचालित ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और ओवरलोड ट्रक न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि यह पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। खनन से जुड़े वाहन प्रायः अधिक भार लेकर चलते हैं, जिससे सड़कों को नुकसान होता है और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
ओवरलोडिंग के पीछे कौन? प्रशासन की जांच तेज
सूत्रों के अनुसार, जिले में कई खनन माफिया और ट्रांसपोर्ट कंपनियां ओवरलोडिंग और अवैध खनन में शामिल हैं। यह वाहन अधिक माल ढोकर सरकार को करों का नुकसान पहुंचाते हैं और साथ ही सड़क नियमों का भी उल्लंघन करते हैं।
प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि इन अवैध गतिविधियों में कौन-कौन से स्थानीय प्रभावशाली लोग शामिल हैं? कई जगहों पर प्रशासन ने ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को नोटिस जारी कर दिया है, ताकि किसी भी गैरकानूनी गतिविधि पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
क्या कहता है कानून? ओवरलोडिंग पर कितनी है सजा और जुर्माना?
भारत में परिवहन नियमों के तहत, ओवरलोडिंग एक दंडनीय अपराध है। मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act, 1988) के अनुसार:
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ओवरलोड वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
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पहली बार पकड़े जाने पर 20,000 रुपए तक का फाइन और अतिरिक्त भार पर प्रति टन 2,000 रुपए का जुर्माना हो सकता है।
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लगातार नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन जब्त भी किया जा सकता है।
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खनन से जुड़े वाहनों को वैध परमिट के बिना संचालन की अनुमति नहीं होती।
लोगों की राय – प्रशासन का एक्शन सही या गलत?
इस कार्रवाई पर जिले में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि प्रशासन का यह कदम सराहनीय है क्योंकि ओवरलोड वाहन सड़क हादसों का बड़ा कारण बनते हैं। दूसरी ओर, ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि इस कार्रवाई से उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है।
एक स्थानीय ट्रांसपोर्टर ने कहा, “हम कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहे, लेकिन अचानक इस तरह की कार्रवाई से हम पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। प्रशासन को हमें पहले चेतावनी देनी चाहिए थी।”
वहीं, एक नागरिक ने कहा, “यह बहुत अच्छा कदम है! ओवरलोड ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों को बर्बाद कर देते हैं और कई बार बड़े हादसे का कारण बनते हैं। प्रशासन को इस पर पूरी तरह से रोक लगानी चाहिए।”
प्रशासन का ऐलान – नहीं रुकेगी कार्रवाई!
परिवहन अधिकारी सुशील मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसे नियमित रूप से चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा, “जो भी वाहन अवैध रूप से संचालित होगा, ओवरलोड होगा या बिना परमिट चलेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले समय में जुर्माने की रकम और सख्ती बढ़ाई जाएगी।”
क्या होगा आगे?
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पूरे जिले में सघन चेकिंग अभियान जारी रहेगा।
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हर हाईवे और मुख्य सड़कों पर परिवहन विभाग की टीम निगरानी रखेगी।
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अवैध खनन से जुड़े ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर बड़े स्तर पर कार्रवाई होगी।
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दोषी पाए जाने वाले ट्रांसपोर्टर्स को नोटिस जारी किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उनके लाइसेंस निलंबित भी किए जा सकते हैं।
अब बिना नियमों के नहीं चलेगा खेल!
मुजफ्फरनगर में परिवहन विभाग की इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि अब ओवरलोडिंग और अवैध खनन पर पूरी तरह से नकेल कसी जाएगी। प्रशासन के इस कड़े रुख से खनन माफिया और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि यह अभियान कितने दिनों तक जारी रहता है और कितने और वाहन इसकी चपेट में आते हैं!
