Muzaffarnagar MGNREGA protest ने सोमवार को जनपद की सियासी फिजा को पूरी तरह गरमा दिया। कचहरी गेट के समीप स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत एक दिन का उपवास रखकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। इस उपवास कार्यक्रम का उद्देश्य मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को कमजोर किए जाने के खिलाफ जनता को जागरूक करना और सरकार पर दबाव बनाना बताया गया।


🔴 अंबेडकर पार्क में उपवास, मजदूरों के हक की लड़ाई का ऐलान

Muzaffarnagar MGNREGA protest के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह से ही अंबेडकर पार्क में जुटने लगे। हाथों में बैनर, तख्तियां और नारे लिखे पोस्टर लेकर कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से उपवास रखा। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यह केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर और ग्रामीण भारत की आवाज़ है।

उपवास स्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि मनरेगा देश के करोड़ों मजदूरों के लिए रोज़गार की आखिरी गारंटी है और अगर इसे कमजोर किया गया तो गांवों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।


🔴 जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतपाल कटारिया का तीखा हमला

पत्रकारों से बात करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतपाल कटारिया ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार कांग्रेस द्वारा शुरू की गई जनहितकारी योजनाओं के नाम बदलकर या उनकी मूल भावना को कमजोर करके उन्हें धीरे-धीरे खत्म करने का काम कर रही है।

उनका कहना था कि मनरेगा जैसी योजना, जिसने करोड़ों गरीब परिवारों को रोज़गार और सम्मान दिया, आज सत्ता की राजनीति की भेंट चढ़ रही है। Muzaffarnagar MGNREGA protest इसी असंतोष का प्रतीक है।


🔴 मनरेगा बचाओ संग्राम के जिला कोऑर्डिनेटर राकेश पुंडीर का बयान

मनरेगा बचाओ संग्राम के जिला कोऑर्डिनेटर राकेश पुंडीर ने कहा कि सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर और उसकी संरचना में बदलाव करके गरीब मजदूरों का हक छीना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब जनता को भ्रमित करने और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश है।

उनके अनुसार, यह आंदोलन केवल उपवास तक सीमित नहीं रहेगा। 12 जनवरी से 29 जनवरी तक जिले के सभी ब्लॉक और नगर स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों का विरोध किया जाएगा।


🔴 रोजगार की गारंटी पर संकट का आरोप

Muzaffarnagar MGNREGA protest के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि नए कानूनों और नियमों में रोजगार की गारंटी को कमजोर किया गया है। ठेकेदारी प्रणाली को बढ़ावा देकर मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों को खतरे में डाला जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा का उद्देश्य सीधे ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना था, लेकिन नई व्यवस्था में बिचौलियों और ठेकेदारों की भूमिका बढ़ने से गरीबों को नुकसान हो रहा है।


🔴 कमल मित्तल का बयान: महात्मा गांधी के नाम से योजना को कमजोर करने की कोशिश

राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के प्रदेश महासचिव कमल मित्तल ने कहा कि मनरेगा अपने मूल लक्ष्य से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी के नाम को योजना से हटाकर उसकी पहचान और नैतिक शक्ति को कमजोर किया गया।

उनका कहना था कि सरकार की मंशा गरीबों के अधिकारों को सीमित करना और उन्हें उनके हक से वंचित करना है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।


🔴 लाल बहादुर शास्त्री को दी गई श्रद्धांजलि

Muzaffarnagar MGNREGA protest के दौरान एक भावनात्मक क्षण तब आया जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। नेताओं ने शास्त्री जी के सादगी, ईमानदारी और गरीबों के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि आज देश को फिर से उसी मूल्यों की जरूरत है।


🔴 सैकड़ों कांग्रेसियों की मौजूदगी, जनआंदोलन का संकेत

उपवास कार्यक्रम में बिल्किस चौधरी, ज़फर महमूद, रिज़वान अहमद, विनोद धीमान, ममनून अंसारी, सद्दाम सिद्दीकी, नरेश भारती, राशिद चौधरी, हर्षवर्धन त्यागी, अजय चौधरी, मुकुल शर्मा, रविंद्र बालियान, आखिर राणा, तारिक कुरैशी, मुर्तजा सलमानी, सतीश सहरावत, मदन शर्मा, रंकजय समेत सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

भीड़ की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि Muzaffarnagar MGNREGA protest केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि एक बड़े आंदोलन की शुरुआत है।


🔴 आने वाले दिनों में और तेज होगा आंदोलन

कांग्रेस नेताओं ने ऐलान किया कि 12 जनवरी से 29 जनवरी तक पूरे जनपद में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत धरना, प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। गांव-गांव जाकर मजदूरों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाएगा और सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।


मुजफ्फरनगर मनरेगा आंदोलन ने साफ संकेत दे दिया है कि रोजगार, सम्मान और अधिकार की लड़ाई अब सड़क से संसद तक गूंजेगी। कांग्रेस का यह उपवास केवल विरोध नहीं बल्कि उन करोड़ों गरीब मजदूरों की आवाज है, जिनकी रोज़ी-रोटी मनरेगा से जुड़ी है और जिन्हें किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।



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