Muzaffarnagar जिले की कानून-व्यवस्था को उस समय गंभीर चुनौती दे दी, जब भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के कथित उग्र प्रदर्शन ने पूरे शहर को जाम की स्थिति में धकेल दिया। जनपद मुजफ्फरनगर में एसएसपी कार्यालय के घेराव के दौरान पुलिस अधिकारियों से तीखी नोकझोंक, वर्दी फाड़ने की धमकी और प्रशासन के खिलाफ खुली नारेबाजी के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।


🔴 SSP कार्यालय घेराव से बिगड़े हालात

Muzaffarnagar Farmer Protest के तहत तीन जनवरी को भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ता ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और चार पहिया वाहनों में सवार होकर एसएसपी कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन का कारण आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) के नाम पर फैक्ट्रियों में कचरा जलाने से होने वाला प्रदूषण बताया गया, लेकिन देखते ही देखते यह प्रदर्शन प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया।

एसएसपी कार्यालय के बाहर धरना शुरू होते ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी रही।


🔴 यातायात ठप, आमजन और एंबुलेंस तक फंसी

Muzaffarnagar Farmer Protest के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा लाए गए वाहनों को महावीर चौक से प्रकाश चौक, अंबेडकर तिराहा और झांसी की रानी चौक तक बेतरतीब तरीके से खड़ा कर दिया गया। इससे पूरे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

हालात इतने बिगड़े कि सरकारी वाहनों के साथ-साथ मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस तक रास्ते में फंस गईं। आम नागरिकों, कर्मचारियों और अधिकारियों को घंटों परेशान होना पड़ा, जिससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई।


🔴 निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शन, पुलिस का आरोप

पुलिस के अनुसार, जनपद में पहले से ही जिलाधिकारी द्वारा धारा 163 बीएनएसएस लागू की गई थी। इसके बावजूद Muzaffarnagar Farmer Protest के दौरान बिना अनुमति प्रदर्शन किया गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने माइक, फ्लैक्सी बोर्ड और बैनर लगाकर कार्यालय परिसर में न केवल धरना दिया, बल्कि प्रशासन के खिलाफ अपशब्दों का भी प्रयोग किया।

पुलिस का कहना है कि हाथों में डंडे लिए प्रदर्शनकारियों ने माहौल को जानबूझकर उग्र बनाने का प्रयास किया।


🔴 वर्दी फाड़ने की धमकी और वायरल वीडियो

Muzaffarnagar Farmer Protest के सबसे गंभीर आरोपों में पुलिस कर्मियों की वर्दी फाड़ने की धमकी भी शामिल है। सिविल लाइन थाना प्रभारी निरीक्षक द्वारा दर्ज कराई गई तहरीर के अनुसार, जब पुलिस ने बैनर और फ्लैक्सी हटाने को कहा तो कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।

इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी पुलिस ने कही है, जिसे जांच का हिस्सा बनाया गया है।


🔴 चार बड़े नेता नामजद, 400 अज्ञात पर मुकदमा

थाना सिविल लाइन में दर्ज एफआईआर के अनुसार Muzaffarnagar Farmer Protest मामले में भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगम्बर सिंह (बिजनौर), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी (स्याना, बुलंदशहर), मोहित त्यागी (बुलंदशहर) और चरथावल ब्लॉक अध्यक्ष ठाकुर कुशलबीर सिंह सहित करीब 400 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

मामले में भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं 191(2), 132, 126(2), 351(2), 352 और 223 बीएनएस के तहत कार्रवाई की गई है।


🔴 माफीनामे के बावजूद सख्ती, SSP का स्पष्ट संदेश

प्रदर्शन के दौरान एसपी सिटी के समक्ष माइक से माफी मांगने और पुलिस का इकबाल बुलंद करने की कोशिश भी की गई, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय वर्मा ने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने साफ संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।


🔴 SP City का बयान, आगे और कार्रवाई के संकेत

एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत ने कहा कि Muzaffarnagar Farmer Protest के दौरान जिस तरह से सार्वजनिक व्यवस्था बाधित की गई और पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार हुआ, उसकी गहन जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।


🔴 प्रशासन बनाम आंदोलन, सियासी हलकों में चर्चा

Muzaffarnagar Farmer Protest अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है। किसान संगठनों की भूमिका, विरोध की सीमाएं और कानून-व्यवस्था के सवालों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी तीखी चर्चा शुरू हो गई है।

जहां एक ओर पर्यावरण और प्रदूषण जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


मुजफ्फरनगर किसान प्रदर्शन प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था को ठप करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं। प्रशासन की सख्ती और दर्ज मुकदमों के बाद यह मामला आने वाले दिनों में जिले की राजनीति और आंदोलनकारी संगठनों की रणनीति को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

 



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