Muzaffarnagar potter tool kit distribution कार्यक्रम के तहत आज मुजफ्फरनगर में पारंपरिक कुम्हारी कला से जुड़े कारीगरों के लिए एक नई उम्मीद की शुरुआत हुई। रुड़की रोड स्थित सुदेश पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में भारत सरकार की ओर से 50 प्रजापति कुम्हारों को बिजली की चाक (इलेक्ट्रिक व्हील) टूल किट का वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य कारीगरों के उत्पादन को बढ़ाना, उनकी मेहनत को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और आर्थिक रूप से उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
🔴 सुदेश पैलेस बना कारीगरों की उम्मीदों का केंद्र
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कुम्हार समुदाय के लोग उपस्थित रहे। जैसे ही टूल किट वितरण की प्रक्रिया शुरू हुई, लाभार्थियों के चेहरों पर उत्साह और संतोष साफ झलकने लगा। यह केवल एक मशीन का वितरण नहीं था, बल्कि परंपरागत शिल्प को आधुनिक दौर से जोड़ने की ठोस कोशिश थी।
Muzaffarnagar potter tool kit distribution के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि सरकार अब केवल योजनाएं नहीं बना रही, बल्कि उन्हें ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
🔴 वस्त्र मंत्रालय की योजना से कारीगरों को सीधा लाभ
सहारनपुर से आए सहायक निदेशक अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार का वस्त्र मंत्रालय देशभर में 455 से अधिक क्राफ्ट शिल्पियों को सहायता प्रदान कर रहा है। इस योजना का सीधा लाभ हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने बताया कि वेलफेयर स्कीम के अंतर्गत आज मुजफ्फरनगर में 50 कुम्हारों को टूल किट दी गई है, ताकि वे आधुनिक तकनीक के जरिए सुंदर, मजबूत और कम लागत में बर्तन तैयार कर सकें।
🔴 आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन और आमदनी
Muzaffarnagar potter tool kit distribution का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब कुम्हारों को पारंपरिक चाक पर अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। बिजली की चाक से न केवल उत्पादन तेज होगा, बल्कि गुणवत्ता भी बेहतर होगी। इससे कारीगर कम समय में अधिक और आकर्षक उत्पाद बना सकेंगे।
इससे जहां एक ओर उनके काम में गति आएगी, वहीं दूसरी ओर उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में रहने वाले कुम्हारों के लिए यह बदलाव जीवन स्तर सुधारने वाला साबित हो सकता है।
🔴 सर्वधर्म संस्था निभा रही है अहम भूमिका
इस पूरे कार्य को जमीन पर उतारने के लिए सर्वधर्म संस्था को कार्यदाई संस्था बनाया गया है। संस्था के माध्यम से ही इन टूल किट का वितरण किया गया। प्रत्येक टूल किट की कीमत लगभग 10,000 रुपये बताई गई है, जिसे सरकार द्वारा पूरी तरह वहन किया गया है।
इस अवसर पर सर्वधर्म संस्था के ज्ञानेंद्र शर्मा और आचार्य सूर्यांश ने भी अपने विचार रखे और इस पहल को कारीगरों के लिए मील का पत्थर बताया।
🔴 सहारनपुर का हैंडीक्राफ्ट मॉडल बना प्रेरणा
कार्यक्रम में मौजूद अरविंद यादव ने जानकारी दी कि आने वाले महीनों में मुजफ्फरनगर जनपद में कुछ नई योजनाएं भी शुरू की जाएंगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार का वस्त्र मंत्रालय, जिसका एक कार्यालय मिशन कंपाउंड सहारनपुर में विकास आयुक्त शिल्प के नाम से कार्यरत है, हस्तशिल्पियों को हर स्तर पर सहायता प्रदान करता है।
उन्होंने सहारनपुर के प्रसिद्ध नक्काशी उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि हस्तशिल्प से बने उत्पाद न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी भारत के ब्रांड एंबेसडर के रूप में पहचान बना रहे हैं।
🔴 विदेशी बाजारों तक पहुंच रही कारीगरों की कला
Muzaffarnagar potter tool kit distribution जैसे कार्यक्रमों का व्यापक प्रभाव यह है कि हस्तशिल्पियों द्वारा बनाई गई वस्तुएं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रही हैं। मिट्टी से बने पारंपरिक बर्तन, सजावटी आइटम और उपयोगी उत्पाद विदेशों में भारतीय संस्कृति और कारीगरी की पहचान बन चुके हैं।
सरकार का मानना है कि यदि कारीगरों को सही उपकरण और प्रशिक्षण मिले, तो वे वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
🔴 लाभार्थियों ने जताया आभार
कार्यक्रम में टूल किट प्राप्त करने वाले लाभार्थी मुकेश प्रजापति और संदीप ने बताया कि इस टूल किट से उनके रोजगार में निश्चित रूप से वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि अब वे कम समय में ज्यादा उत्पादन कर सकेंगे और बाजार की मांग के अनुसार नए डिजाइन भी बना पाएंगे।
लाभार्थियों ने इस योजना के लिए भारत सरकार और संबंधित विभागों के प्रति आभार व्यक्त किया।
🔴 कुम्हार समाज के लिए बदलाव की शुरुआत
Muzaffarnagar potter tool kit distribution कार्यक्रम को कुम्हार समाज के लिए बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का माध्यम भी है। पारंपरिक पेशे को आधुनिक तकनीक से जोड़कर सरकार ने यह साबित किया है कि विरासत और विकास एक साथ चल सकते हैं।
मुजफ्फरनगर में 50 प्रजापति कुम्हारों को मिली बिजली की चाक टूल किट केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि परंपरा और तकनीक के संगम की मिसाल है। इस पहल से कारीगरों के हाथों को नई ताकत मिली है और उनके भविष्य को नई दिशा। आने वाले समय में ऐसे प्रयास न सिर्फ रोजगार बढ़ाएंगे, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान भी दिलाएंगे।
