Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti Muzaffarnagar में श्रद्धा, उत्साह और राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ मनाई गई। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर शिवसेना के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने मुजफ्फरनगर के प्रकाश चौक स्थित शिवसेना कार्यालय पर एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में भगवा ध्वज, पुष्प-मालाएं और जयघोषों के बीच पूरा वातावरण शिवमय नजर आया।


🔶 शिवसेना कार्यालय भगवामय, शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि

सुबह से ही शिवसेना कार्यालय परिसर को विशेष रूप से सजाया गया। भगवा ध्वजों से सुसज्जित कार्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र को प्रमुख स्थान पर स्थापित किया गया। कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए और श्रद्धापूर्वक नमन किया।
Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti Muzaffarnagar कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई, जिसके बाद “जय भवानी, जय शिवाजी” के गगनभेदी नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।


🔶 शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित शिवसेना कार्यकर्ताओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन चरित्र, संघर्ष, साहस और राष्ट्रनिष्ठा पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा नहीं थे, बल्कि वे एक कुशल प्रशासक, दूरदर्शी रणनीतिकार और जनकल्याणकारी शासक भी थे।

कार्यकर्ताओं ने उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए समाज, राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, एकजुटता और संगठन की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।


🔶 जिला अध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा का सशक्त संबोधन

शिवसेना के जिला अध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्र, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि जब देश विदेशी और आतंरिक चुनौतियों से जूझ रहा था, उस समय शिवाजी महाराज ने स्वराज की नींव रखकर इतिहास की दिशा बदल दी।

उन्होंने यह भी कहा कि Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti Muzaffarnagar जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जयंती मनाना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारना है। शिवसेना शिवाजी महाराज के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।


🔶 युवाओं के लिए शिवाजी महाराज का संदेश

बिट्टू सिखेड़ा ने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। साहस, नीति, संगठन क्षमता और नेतृत्व जैसे गुण युवाओं को उनके चरित्र से सीखने चाहिए। उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्रवान, साहसी और जिम्मेदार नागरिकों की आवश्यकता है।


🔶 जतिन वशिष्ठ ने स्वराज की अवधारणा पर डाला प्रकाश

कार्यक्रम में वक्ता जतिन वशिष्ठ ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद स्वराज की स्थापना कर यह सिद्ध किया कि संकल्प और रणनीति से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज की स्वराज की अवधारणा केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं थी, बल्कि सामाजिक न्याय, धार्मिक सहिष्णुता और जनकल्याण से भी जुड़ी हुई थी। उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रहे हैं।


🔶 एकजुटता और राष्ट्रहित का लिया गया संकल्प

कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी शिवसेना कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे राष्ट्रहित में कार्य करेंगे और छत्रपति शिवाजी महाराज के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएंगे। संगठन को मजबूत करने, समाज सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर सक्रिय रहने का आह्वान किया गया।

Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti Muzaffarnagar कार्यक्रम के दौरान पूरे वातावरण में उत्साह, अनुशासन और श्रद्धा का भाव बना रहा।


🔶 कार्यक्रम में मौजूद रहे अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता

इस अवसर पर विनय कुमार, लक्ष्य, प्रिंस, शैलेंद्र, मनोज कुमार, प्रिंस निकुंज, चैहान, मनोज चौधरी, ललित रुहेला, अमित कुमार, सूरज सेटी सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने कार्यक्रम की सफलता में सक्रिय भूमिका निभाई और शिवाजी महाराज के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।


🔶 सांस्कृतिक चेतना और राजनीतिक संदेश

कार्यक्रम केवल एक जयंती आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक चेतना और राजनीतिक संदेश का भी माध्यम बना। वक्ताओं ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की विचारधारा आज भी सामाजिक समरसता, स्वाभिमान और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा देती है।


मुजफ्फरनगर में मनाई गई छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती ने यह स्पष्ट किया कि शिवाजी महाराज केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आज भी विचार, संघर्ष और संकल्प के प्रतीक हैं। शिवसेना द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम समाज को राष्ट्रभक्ति, संगठन और स्वाभिमान के मूल्यों से जोड़ने का सशक्त प्रयास बनकर सामने आया।



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