चरथावल (Muzaffarnagar)। बारिश के मौसम में अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में हादसों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा चरथावल थाना क्षेत्र के गांव कुल्हेड़ी में हुआ, जहां एक किसान का भैंसा चारा लदी बुग्गी समेत नदी में पलट गया। हादसे में भैंसे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि किसान गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जमा हो गए।
कैसे हुआ हादसा – बरसात ने छीन ली किसान की पूंजी
मिली जानकारी के अनुसार, गांव कुल्हेड़ी निवासी किसान सनव्वर पुत्र हसरत सुबह अपने खेतों से पशुओं के लिए हरे चारे की बुग्गी लेकर घर लौट रहे थे। लगातार बारिश से गांव के रास्ते कीचड़ से भर गए थे और जगह-जगह पानी भर गया था।
इसी दौरान, जैसे ही किसान नदी के पास से गुजर रहा था, कच्चा रास्ता फिसलन भरा होने के कारण भैंसा बुग्गी अचानक अनियंत्रित होकर नदी में पलट गई। देखते ही देखते बुग्गी समेत भैंसा पानी में डूब गया और किसान भी उसमें फंस गया।
भैंसे की मौत – गरीब किसान की टूटी कमर
इस हादसे में किसान का पालतू भैंसा मौके पर ही मर गया। ग्रामीणों के मुताबिक यह भैंसा किसान सनव्वर की सबसे बड़ी पूंजी थी, जिससे उसका परिवार जीविका चलाता था। भैंसे की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
दूसरी ओर, बुग्गी चला रहे किसान सनव्वर को ग्रामीणों ने किसी तरह बाहर निकाला। वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार के लोग अस्पताल में किसान की हालत जानने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
गांव में मातम और आक्रोश – ‘हमारी मेहनत पानी में डूबी’
गांव कुल्हेड़ी में इस हादसे की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने भैंसे को नदी से बाहर निकालने में मदद की। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया।
एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा – “हमारे यहां भैंसा केवल जानवर नहीं होता, बल्कि किसान की पूरी पूंजी होती है। उसके सहारे खेतों की जुताई, चारा ढोना और परिवार का खर्च चलता है। इस हादसे ने सनव्वर का सब कुछ छीन लिया।”
गांव के कई युवाओं ने प्रशासन से मांग की कि गरीब किसान को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि उसका जीवन दोबारा पटरी पर आ सके।
बरसात और कच्चे रास्तों का संकट – ग्रामीण इलाकों में हादसे आम
ग्रामीण बताते हैं कि बरसात में कच्चे रास्ते दलदल में बदल जाते हैं, जिससे आए दिन ऐसे हादसे होते हैं। ट्रैक्टर, बुग्गी और मोटरसाइकिलें अक्सर कीचड़ में फंस जाती हैं। कई बार तो छोटे-छोटे वाहन भी पलट जाते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि गांवों में पक्की सड़कें और नालियां बनवाई जाएं, तो इस तरह के हादसों से बचा जा सकता है। इस हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीण बुनियादी ढांचे की खामियों को उजागर कर दिया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और ग्रामीणों की उम्मीद
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। हालांकि अभी तक किसान को मुआवजे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि किसान बेहद गरीब है और सरकार को तुरंत उसकी मदद करनी चाहिए।
गांव के प्रधान ने भी प्रशासन से अपील की है कि किसान को आर्थिक सहायता और भैंसे के नुकसान की भरपाई की जाए, ताकि उसका परिवार भूखों मरने से बच सके।
हादसे ने छोड़ा गहरा जख्म – गांव में चर्चा का विषय बना सनव्वर
गांव में हर कोई अब सिर्फ सनव्वर और उसके भैंसे की मौत के बारे में बात कर रहा है। छोटे बच्चे तक अपने घरों में इस हादसे की चर्चा कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर रास्ते की मरम्मत समय पर हो जाती, तो यह हादसा टल सकता था। यह केवल एक हादसा नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों की बदहाल स्थिति का आइना है।
मुज़फ्फरनगर के चरथावल इलाके में हुआ यह हादसा गरीब किसानों की मजबूरियों और ग्रामीण विकास की अनदेखी को उजागर करता है। भैंसे की मौत और किसान के घायल होने से एक परिवार टूट गया है, लेकिन यह आवाज पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी अब जानलेवा साबित हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है और अब सभी की निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।