Muzaffarnagar ज़िले के जिला परिषद मार्केट में शुक्रवार को औषधि विभाग की टीम ने अचानक छापेमारी कर दी, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दवा कारोबारियों के बीच हड़कंप इतना बढ़ा कि कई दुकानदार आनन-फानन में अपनी दुकानों के शटर डालकर मौके से फरार हो गए। यह कार्रवाई सहारनपुर से आई विशेष टीम ने की, जिसमें असिस्टेंट कमिश्नर, डीआई पवन शाक्य और ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम शामिल रही।


नकली और नशीली दवाओं पर बड़ी कार्रवाई

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, छापेमारी का मुख्य कारण हाल ही में आगरा में नकली और नशीली दवाओं का बड़ा भंडारण पकड़ा जाना है। उसी जांच में कुछ इनपुट मिलने के बाद औषधि विभाग ने मुजफ्फरनगर की दवा मंडी में यह सख्त कार्रवाई की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दुकानों पर संदिग्ध गतिविधियों की चर्चा लंबे समय से थी। ऐसे में यह छापेमारी न सिर्फ संदिग्ध कारोबारियों पर शिकंजा कसने के लिए की गई, बल्कि जिले की जनता को राहत देने के लिए भी उठाया गया कदम माना जा रहा है।


व्यापारी छोड़कर भागे, दुकानें बंद

जैसे ही औषधि विभाग की टीम मार्केट में पहुंची, कुछ व्यापारियों को भनक लग गई। देखते ही देखते कई दवा व्यापारी अपनी-अपनी दुकानों के शटर गिराकर भाग निकले। टीम ने मौके पर मौजूद दुकानों की गहन जांच शुरू की और दस्तावेजों की पड़ताल की।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मार्केट में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग यह जानने के लिए जुट गए कि आखिर छापेमारी क्यों की जा रही है।


टीम ने की घंटों जांच-पड़ताल

औषधि विभाग की टीम ने कई दुकानों पर दस्तावेज चेक किए और दवाओं के सैंपल भी लिए। जिन दुकानदारों के पास लाइसेंस और स्टॉक का हिसाब-किताब ठीक नहीं मिला, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

डीआई पवन शाक्य ने बताया कि यह छापेमारी उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की गई है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। विभाग का मानना है कि नकली व अवैध दवा कारोबार सीधे तौर पर जनता की सेहत से खिलवाड़ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


दवा कारोबारियों में खौफ, ग्राहकों में चिंता

छापेमारी के बाद दवा कारोबारियों में दहशत का माहौल है। कई व्यापारी अब अपने स्टॉक और लाइसेंस को लेकर सतर्क हो गए हैं। वहीं, स्थानीय ग्राहकों में यह चिंता भी बढ़ी है कि कहीं उनके द्वारा खरीदी जा रही दवाएं नकली या खतरनाक तो नहीं।

ग्राहकों का कहना है कि दवाओं की खरीददारी सीधे जीवन से जुड़ा मामला है और अगर इस क्षेत्र में गड़बड़ी हो रही है तो यह बेहद गंभीर है।


पूर्व में भी उठते रहे हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब मुजफ्फरनगर की दवा मंडी पर सवाल उठे हैं। पूर्व में भी कई बार दवाओं के ग़लत स्टॉक और अवैध कारोबार की चर्चाएं सामने आती रही हैं। लेकिन अब जब औषधि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि नकली दवाओं का धंधा बंद होगा और आम जनता को राहत मिलेगी।


अब आगे क्या होगा?

विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिन दुकानदारों पर शक है, उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इसके अलावा जिन दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, उनकी रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई तय होगी।

अगर रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई गई तो कई व्यापारियों के लाइसेंस रद्द हो सकते हैं और जेल तक की कार्रवाई हो सकती है।

मुजफ्फरनगर में औषधि विभाग की छापेमारी ने दवा कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। नकली और नशीली दवाओं के खिलाफ यह अभियान अब और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की सख्त कार्रवाई लगातार होती रही तो दवा कारोबार में पारदर्शिता आएगी और आम जनता को असली व सुरक्षित दवाएं मिलेंगी।

 



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