Muzaffarnagar में एक बार फिर मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल सामने आई है। रक्तदान के क्षेत्र में जिले की पहचान बन चुकी समर्पित युवा समिति अब नेत्रदान के क्षेत्र में भी निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रही है। इसी कड़ी में गांधी कॉलोनी निवासी स्वर्गीय श्री मदनलाल गुलाटी के नेत्रदान ने न केवल दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि देने की उम्मीद जगाई, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरक संदेश भी छोड़ा।
🔶 मृत्यु से पहले लिया गया संकल्प, परिवार ने निभाई जिम्मेदारी
स्वर्गीय श्री मदनलाल गुलाटी ने अपने जीवनकाल में ही यह इच्छा परिवार के सामने स्पष्ट कर दी थी कि उनके निधन के बाद उनके नेत्र दान किए जाएं। यह निर्णय उनके संस्कारों और सामाजिक सोच को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि लगभग दो वर्ष पूर्व उनकी धर्मपत्नी का भी निधन हुआ था, उस समय भी परिवार ने समर्पित युवा समिति के माध्यम से नेत्रदान कर दो जरूरतमंदों को नेत्र ज्योति प्रदान की थी।
अब श्री मदनलाल गुलाटी के निधन के बाद उनके पुत्र राकेश गुलाटी, राजीव गुलाटी एवं पुत्रियों ने सर्वसम्मति से पिता की अंतिम इच्छा को सम्मान देते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। यह निर्णय परिवार की सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों को मजबूती से सामने लाता है।
🔶 सूचना मिलते ही सक्रिय हुई समर्पित युवा समिति
Muzaffarnagar eye donation की इस प्रक्रिया में तत्परता और समन्वय एक अहम पहलू रहा। मृतक के पुत्र राजीव गुलाटी ने समर्पित युवा समिति के सक्रिय सदस्य अमित पटपटिया से संपर्क किया। सूचना मिलते ही समिति ने बिना किसी विलंब के मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज, बेगराजपुर के नेत्र विभाग से संपर्क साधा।
कुछ ही समय में प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी व चिकित्सकीय मानकों के अनुसार श्री मदनलाल गुलाटी की कॉर्निया को सुरक्षित रूप से निकाला गया। इन कॉर्निया को शीघ्र ही दो सुपात्र नेत्रहीन व्यक्तियों में प्रत्यारोपित किया जाएगा, जिससे उन्हें फिर से दुनिया देखने का अवसर मिलेगा।
🔶 नेत्रदान से जीवन के बाद भी जीवनदान
विशेषज्ञों के अनुसार मृत्यु के छह घंटे के भीतर कॉर्निया निकाली जा सकती है। सही समय पर सूचना और परिवार की सहमति इस प्रक्रिया को सफल बनाती है। यही कारण है कि Muzaffarnagar eye donation जैसे मामलों में समाज और स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
नेत्रदान वह पुण्य कार्य है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी इस संसार को देखने का अवसर किसी और को दे सकता है। यह केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है।
🔶 समर्पित युवा समिति: रक्तदान से नेत्रदान तक
समर्पित युवा समिति के वरिष्ठ सदस्य संजीव अरोड़ा ने बताया कि संस्था वर्षों से रक्तदान और प्लेटलेट डोनेशन के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है। अब नेत्रदान के क्षेत्र में भी समिति जिले की अग्रणी संस्था के रूप में पहचान बना चुकी है। समिति के निरंतर प्रयासों से लोगों में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और सामाजिक झिझक धीरे-धीरे टूट रही है।
Muzaffarnagar eye donation अभियानों में समिति की भूमिका केवल समन्वय तक सीमित नहीं, बल्कि जन-जागरूकता, परामर्श और समय पर चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करना भी शामिल है।
🔶 गुलाटी परिवार को समाज का साधुवाद
समिति के सदस्य अमित पटपटिया ने गुलाटी परिवार की सराहना करते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस परिवार से प्रेरणा लेनी चाहिए। नेत्रदान के माध्यम से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला लाना अत्यंत महान कार्य है। उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग इस विषय में आगे आएं, तो अंधत्व जैसी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर समर्पित युवा समिति से जुड़े हितेश आनंद एवं मनी पटपटिया भी उपस्थित रहे और परिवार के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
🔶 समाज के लिए मजबूत संदेश
Muzaffarnagar eye donation की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि सामाजिक परिवर्तन बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और समय पर लिए गए निर्णयों से आता है। नेत्रदान जैसे कार्य न केवल चिकित्सा क्षेत्र को मजबूती देते हैं, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों को भी जीवित रखते हैं।
मुजफ्फरनगर में गुलाटी परिवार द्वारा किया गया यह नेत्रदान समाज के लिए एक शांत लेकिन गहरी आवाज़ है—कि जीवन के बाद भी किसी और की दुनिया रोशन की जा सकती है। समर्पित युवा समिति के प्रयास और परिवार की संवेदनशीलता ने यह दिखा दिया कि सही समय पर लिया गया एक निर्णय दो जिंदगियों में उजाला भर सकता है।
