Muzaffarnagar POSH Act meeting ने जिले के औद्योगिक और व्यावसायिक जगत में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और संवेदनशील कार्यसंस्कृति को लेकर एक नई सोच को मजबूती दी। इंडियन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन (आईआईए) मुजफ्फरनगर चैप्टर द्वारा होटल स्वर्ण इन्न एंड सुइट्स में आयोजित इस विशेष ब्रेकफास्ट मीटिंग में उद्योगपतियों, प्रशासनिक अधिकारियों और संगठन के सदस्यों ने कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2013 के प्रभावी अनुपालन पर गहन चर्चा की।
इस बैठक का उद्देश्य केवल कानूनी औपचारिकताओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि उद्योगों और संस्थानों के भीतर एक ऐसा वातावरण विकसित करना था, जहां महिलाएं बिना किसी डर और संकोच के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
🔴 अध्यक्षीय संबोधन: कानून से आगे संवेदनशीलता की जरूरत
बैठक की अध्यक्षता करते हुए आईआईए मुजफ्फरनगर चैप्टर के चेयरमैन श्री अमित जैन ने सभी अतिथियों, अधिकारियों और सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पोश एक्ट को सिर्फ एक कानूनी बाध्यता के रूप में नहीं, बल्कि एक नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाना समय की मांग है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल की परिभाषा केवल दफ्तर या फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कार्य से संबंधित यात्रा, प्रशिक्षण स्थल और अन्य सभी कार्य-संबंधित स्थान भी शामिल हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना हर नियोक्ता की वैधानिक जिम्मेदारी है।
🔴 इंटरनल कमेटी: कानूनी ढांचा और जिम्मेदारियां
Muzaffarnagar POSH Act meeting के दौरान यह बात विशेष रूप से रेखांकित की गई कि जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां इंटरनल कमेटी का गठन अनिवार्य है, चाहे वहां महिला कर्मचारी हों या न हों।
चेयरमैन अमित जैन ने कहा कि इंटरनल कमेटी केवल शिकायतों के निस्तारण का मंच नहीं, बल्कि यह संस्था की कार्यसंस्कृति को संवेदनशील और समावेशी बनाने का एक मजबूत माध्यम भी है। उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे इस समिति को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखें, बल्कि उसे सक्रिय और प्रभावी बनाएं।
🔴 जिला प्रोबेशन अधिकारी का विस्तृत मार्गदर्शन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला प्रोबेशन अधिकारी श्री संजय कुमार ने पोश एक्ट की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत कार्यस्थल की परिभाषा अत्यंत व्यापक है, जिसमें कार्यालय, फैक्ट्री, नर्सिंग होम, बैंक, मनरेगा कार्यस्थल, कार्य से संबंधित यात्रा और घरेलू कार्यस्थल तक शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इंटरनल कमेटी का गठन, उसका विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना, समिति की जानकारी सी-बॉक्स पोर्टल पर अपलोड करना और वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य प्रावधान हैं। शिकायतों का समयबद्ध और गोपनीय निस्तारण भी अधिनियम की आत्मा है।
🔴 लोकल कमेटी की भूमिका पर जोर
संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि जहां 10 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां शिकायत लोकल कमेटी के माध्यम से की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि नियोक्ता या पीठासीन अधिकारी के खिलाफ शिकायत होती है, तो उस स्थिति में भी लोकल कमेटी ही सक्षम प्राधिकारी होती है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस अधिनियम के अनुपालन की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे यह साफ है कि सरकार और न्यायपालिका इस विषय को कितनी गंभीरता से ले रही हैं।
🔴 उद्योगों के लिए सकारात्मक कानून
सहायक श्रमायुक्त दिवेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पोश एक्ट उद्योगों के लिए एक सकारात्मक और संरक्षण प्रदान करने वाला कानून है। उन्होंने बताया कि इंटरनल कमेटी के प्रभावी गठन से शिकायतों का निष्पक्ष, गोपनीय और समयबद्ध समाधान संस्था के भीतर ही संभव होता है।
उनका कहना था कि इससे महिलाओं में सुरक्षा की भावना बढ़ती है और उद्योग अनावश्यक कानूनी जटिलताओं और विवादों से बच सकते हैं, जिससे कार्यस्थल पर भरोसे और सहयोग का माहौल बनता है।
🔴 व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश
सहायक आयुक्त उद्योग आशीष कुमार ने इंटरनल कमेटी के गठन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पीठासीन अधिकारी का वरिष्ठ महिला कर्मचारी होना अनिवार्य है, लेकिन यदि संस्था में महिला कर्मचारी उपलब्ध नहीं है, तो अधिनियम में वैकल्पिक प्रावधान मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी दोहराया कि नियोक्ता या पीठासीन अधिकारी के खिलाफ शिकायत सीधे लोकल कमेटी में की जा सकती है, जिससे निष्पक्षता बनी रहती है।
🔴 संगठनात्मक एकता और खेल का संदेश
आईआईए के डिवीजनल सेक्रेटरी श्री पवन कुमार गोयल ने बैठक के दौरान एक अलग ही उत्साह का माहौल बनाया। उन्होंने सभी सदस्यों से 31 जनवरी को विक्टोरिया पार्क, मेरठ में आयोजित होने वाले आईआईए मुजफ्फरनगर चैप्टर और आईआईए मेरठ चैप्टर के बीच मैत्री क्रिकेट मैच में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं, बल्कि संगठनात्मक एकता और टीम भावना को भी बढ़ावा देते हैं।
🔴 संचालन और आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का सफल संचालन आईआईए सचिव श्री राहुल मित्तल द्वारा किया गया। उन्होंने सभी वक्ताओं और सदस्यों के विचारों को क्रमबद्ध और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया।
बैठक के अंत में आईआईए कोषाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल ने सभी अतिथियों और उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की बैठकों से उद्योग जगत में कानूनी जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों को मजबूती मिलती है।
🔴 बड़ी संख्या में सदस्यों की सहभागिता
Muzaffarnagar POSH Act meeting में आईआईए के पूर्व चेयरमैन विपुल भटनागर, फेडरेशन सचिव अभिषेक अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे। इनमें अनमोल अग्रवाल, रविंद्र सिंघल, राज शाह, तुषार गुप्ता (एडवोकेट), राकेश जैन, अशोक शाह, एफ.सी. मोघा, शमित अग्रवाल, मुकुल गोयल, डॉ. यशपाल सिंह, सुशील अग्रवाल, अनुज कुच्छल, प्राचीर अरोरा, अजय अरोरा, नमन जैन, सौरभ मित्तल, राकेश ढींगरा, आचमन गोयल, अनन्या गोयल, कशिश अरोरा, राहुल कसाना, मनोज गुप्ता, मुदित जैन, सुनील चौधरी, पुलकित सिंगल, सचिन शर्मा, रविंद्र कुमार जैन, रजनीश कुमार, सूरज तनेजा, प्रणव सिंगल, अनूप भाटिया, अंकुर मित्तल, भारत भूषण सहित अनेक सदस्य शामिल रहे।
🔴 सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यसंस्कृति की दिशा में कदम
बैठक के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर एकमत व्यक्त किया कि कानून का सही पालन तभी संभव है, जब उसे संस्था की संस्कृति का हिस्सा बनाया जाए। प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और नियमित समीक्षा के जरिए ही एक ऐसा माहौल तैयार किया जा सकता है, जहां महिलाएं खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें।
मुजफ्फरनगर में आयोजित यह पोश एक्ट जागरूकता बैठक केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उद्योग और समाज के बीच एक ऐसा संवाद है, जो महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान अवसरों को केंद्र में रखता है। यह पहल आने वाले समय में कार्यस्थलों को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है, जिससे विकास के साथ-साथ मानवीय मूल्यों की भी रक्षा हो सके।
