Muzaffarnagar में प्रदूषण की बढ़ती समस्या पर अब प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी गीतेश चंद्रा खुद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम दे रहे हैं। जिले के ग्राम पीनना में तीन कोल्हुओं को प्रतिबंधित ईंधन (कपड़ा, प्लास्टिक आदि) का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद उन्हें तुरंत सील कर दिया गया। इन कोल्हू संचालकों पर ₹5000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

इस कार्रवाई के दौरान AEE कुंवर संतोष सिंह समेत पुलिस प्रशासन की टीम मौजूद रही। विभाग का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है — अब जिले में प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।


प्रदूषण विभाग की बड़ी मुहिम – “अब नहीं चलेगा धुआं और जहर का कारोबार”

मुजफ्फरनगर जैसे औद्योगिक जिलों में कोल्हू उद्योगों द्वारा प्रतिबंधित ईंधनों का प्रयोग लगातार बढ़ रहा था। कपड़ा, प्लास्टिक, रबर जैसे हानिकारक पदार्थों को जलाने से न केवल हवा जहरीली हो रही थी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में सांस संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं।

प्रदूषण अधिकारी गीतेश चंद्रा ने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है। जिन उद्योगों में नियमों का पालन नहीं होगा, उन पर बख्शा नहीं जाएगा।”


ग्राम पीनना बना कार्रवाई का केंद्र — तीन संचालक गुलबहार, इकबाल और शकील पर सख्त कदम

ग्राम पीनना (शामली मार्ग) पर स्थित चार कोल्हू लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल बताए जा रहे थे। सूत्रों के अनुसार, गांव के ही गुलबहार, इकबाल और शकील नामक संचालक इन इकाइयों में कपड़ा और प्लास्टिक जलाकर ईंधन तैयार करते थे, जिससे पूरे इलाके में धुआं और बदबू फैल रही थी।

स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत की थी कि रात के समय ये कोल्हू प्रतिबंधित ईंधन जलाते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इसी के बाद प्रदूषण विभाग की टीम ने पुलिस बल के साथ अचानक छापा मारा और तीनों कोल्हू को मौके पर ही सील कर दिया।


मुजफ्फरनगर प्रशासन का सख्त संदेश – अब नियमों से समझौता नहीं

प्रशासन ने साफ कहा है कि अब जिले में प्रदूषण फैलाने वाले किसी भी उद्योग को बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई न केवल एक उदाहरण है, बल्कि आने वाले समय में सैकड़ों ऐसी इकाइयों पर नकेल कसने की तैयारी है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिले में दर्जनों कोल्हू और ईंट भट्टे ऐसे हैं जो पर्यावरणीय अनुमति के बिना कार्य कर रहे हैं। अगले चरण में इन सभी की सर्वे लिस्ट तैयार की जा रही है ताकि अवैध प्रदूषण स्रोतों को बंद कराया जा सके।


प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रणनीति – ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ शुरू

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस पूरे अभियान को “ऑपरेशन क्लीन एयर” नाम दिया है। इसके तहत औद्योगिक इकाइयों, कोल्हुओं, ईंट भट्टों और डीजल जनरेटर सेट्स की जांच की जाएगी। जिनके पास ग्रीन क्लीयरेंस सर्टिफिकेट नहीं होगा, उनकी इकाइयां सील कर दी जाएंगी।

गीतेश चंद्रा ने बताया, “हम अब सिर्फ कागजों में नहीं, जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। प्रदूषण पर अंकुश लगाना प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता है।”


स्थानीय जनता का समर्थन, लेकिन भय भी बरकरार

जहां एक ओर आम जनता प्रशासन की सख्ती का स्वागत कर रही है, वहीं कोल्हू संचालकों में डर का माहौल है। कई छोटे कारोबारी यह कह रहे हैं कि उन्हें वैकल्पिक ईंधन के बारे में जानकारी नहीं है और प्रशिक्षण की जरूरत है।

प्रदूषण विभाग ने इस पर कहा है कि आने वाले सप्ताहों में जागरूकता अभियान और सेमिनार आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण उद्योगों को पर्यावरण के अनुकूल तकनीकें सिखाई जा सकें।


कोल्हू उद्योग का काला सच – कैसे फैलता है जहरीला धुआं

कोल्हू उद्योग गन्ने से गुड़ बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन सस्ती लागत के लिए कई संचालक लकड़ी की जगह कपड़ा, रबर, और प्लास्टिक जलाते हैं। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और डाइऑक्सिन्स जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं, जो हवा को प्रदूषित करती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह गैसें बच्चों में अस्थमा, फेफड़ों के संक्रमण और आंखों की जलन जैसी बीमारियों का कारण बनती हैं। यही वजह है कि प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है।


प्रदूषण नियंत्रण की अगली योजना – जिले में 24×7 निगरानी तंत्र

मुजफ्फरनगर में अब एक सेंसर-आधारित एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। इसके जरिए किसी भी क्षेत्र में अचानक बढ़े प्रदूषण स्तर को तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा।

साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जिलाधिकारी के साथ मिलकर एक हॉटलाइन नंबर जारी करने की योजना बनाई है, ताकि नागरिक सीधे प्रदूषण की शिकायत दर्ज करा सकें।


जनभागीदारी से ही बनेगा स्वच्छ मुजफ्फरनगर – गीतेश चंद्रा

अंत में, प्रदूषण अधिकारी गीतेश चंद्रा ने कहा, “हमें प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ नागरिक सहयोग की भी जरूरत है। जब तक जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक हवा साफ नहीं हो सकती।”

उन्होंने सभी कोल्हू संचालकों से आग्रह किया कि वे स्वच्छ ईंधन जैसे बायोमास, लकड़ी या सोलर हीटिंग तकनीक अपनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ हवा में सांस ले सकें।


मुजफ्फरनगर में यह कार्रवाई एक बड़ा संकेत है कि अब प्रदूषण को लेकर प्रशासन और पर्यावरण विभाग दोनों गंभीर हैं। आने वाले दिनों में जिले के हर औद्योगिक क्षेत्र की बारीकी से जांच होगी। अगर यही रफ्तार रही, तो मुजफ्फरनगर फिर से सांस लेने लायक बनेगा — स्वच्छ हवा, स्वस्थ समाज की दिशा में यह ठोस कदम है।

 





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