Muzaffarnagar pollution action ने मंगलवार को जिले के औद्योगिक परिदृश्य में हलचल मचा दी। वायु और पर्यावरण मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रही इकाइयों के खिलाफ क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक प्रतिष्ठित पेपर मिल और अवैध रूप से संचालित लैड इंगट बनाने वाली फैक्ट्री को मौके पर ही सील कर दिया। इस कदम को जिले में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण की दिशा में एक निर्णायक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उद्योग जगत में नियमों के पालन को लेकर नई चेतावनी गूंज उठी है।
🔴 निरीक्षण अभियान की शुरुआत: अचानक पहुंची टीम, मचा हड़कंप
मंगलवार सुबह क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. गीतेश चंद्रा के नेतृत्व में जेई राजा गुप्ता और उनकी टीम ने जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में सघन निरीक्षण अभियान शुरू किया। जानसठ रोड और बेगराजपुर औद्योगिक क्षेत्र में अचानक पहुंची टीम को देखकर कई इकाइयों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
Muzaffarnagar pollution action के तहत यह अभियान पूर्व निर्धारित सूचना के बिना किया गया, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन हो सके और किसी भी तरह की लीपापोती की संभावना को रोका जा सके।
🔴 पेपर मिल में नियमों की अनदेखी: ऑनलाइन निगरानी प्रणाली नदारद
जानसठ रोड स्थित शक्ति क्राफ्ट एवं टिश्यू प्राइवेट लिमिटेड में जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। टीम को फैक्ट्री परिसर में ‘ऑनलाइन सतत निगरानी प्रणाली’ (Online Monitoring System) स्थापित नहीं मिली, जो शासन और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है।
इसके अलावा, वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए आवश्यक उपकरण और संसाधन भी अपर्याप्त पाए गए। धूल और उत्सर्जन नियंत्रण से जुड़े मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था, जिससे आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैलने की आशंका जताई गई।
🔴 केंद्रीय टीम की एंट्री: फैक्ट्री पर तत्काल ताला
जांच के दौरान दिल्ली से आई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम भी मौके पर पहुंची। दोनों टीमों ने संयुक्त रूप से दस्तावेजों और मशीनरी का निरीक्षण किया। अनियमितताओं की पुष्टि होने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा पांच के तहत फैक्ट्री को तत्काल बंद करने का आदेश जारी किया गया।
Muzaffarnagar pollution action के इस फैसले को एक मजबूत कानूनी कदम माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि सीधी कार्रवाई की जाएगी।
🔴 बेगराजपुर में दूसरी बड़ी कार्रवाई: अवैध लैड इंगट फैक्ट्री सील
औद्योगिक क्षेत्र बेगराजपुर में फिरोज मेटल फैक्ट्री पर भी टीम की नजर पड़ी। यहां जांच में खुलासा हुआ कि पुरानी बैटरियों को गलाकर अवैध रूप से लैड इंगट तैयार किए जा रहे थे। यह प्रक्रिया न केवल पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
फैक्ट्री संचालक के पास किसी भी प्रकार का वैध लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र या संचालन संबंधी अनुमति नहीं मिली। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर इस इकाई को भी तत्काल सील कर दिया गया।
🔴 समयसीमा की अनदेखी: CAQM के निर्देशों का उल्लंघन
विदित हो कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने जिले की पेपर मिलों, लोहा उद्योग और मेटल इकाइयों को 31 दिसंबर तक ऑनलाइन सतत निगरानी प्रणाली स्थापित करने की समयसीमा दी थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रदूषण स्तर की वास्तविक समय में निगरानी हो सके और किसी भी तरह की अनियमितता तुरंत पकड़ी जा सके।
Muzaffarnagar pollution action के दौरान सामने आया कि कई इकाइयों ने इस निर्देश को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके चलते अब उन्हें सीधी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
🔴 स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरा: विशेषज्ञों की चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, लैड इंगट निर्माण और पेपर मिलों से निकलने वाले उत्सर्जन हवा, पानी और मिट्टी तीनों को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से सीसा (Lead) से जुड़े उद्योगों में यदि सुरक्षा मानकों का पालन न किया जाए, तो यह आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
Muzaffarnagar pollution action को विशेषज्ञों ने एक आवश्यक और समय पर उठाया गया कदम बताया है, जिससे लंबे समय में जिले की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन को सुधारने में मदद मिल सकती है।
🔴 उद्योग जगत में हलचल: नियमों का पालन या कार्रवाई
इस कार्रवाई के बाद जिले के औद्योगिक क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। कई फैक्ट्री संचालकों ने अपने परिसरों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों और दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है। उद्योग संगठनों का कहना है कि वे नियमों का पालन करने के पक्षधर हैं, लेकिन इसके लिए प्रशासन की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश और तकनीकी सहयोग भी जरूरी है।
वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि नियमों में कोई अस्पष्टता नहीं है और सभी इकाइयों को निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
🔴 प्रशासन का सख्त रुख: आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. गीतेश चंद्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनपद में प्रदूषण फैलाने वाली किसी भी इकाई को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि यह अभियान केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसी तरह की जांच की जाएगी।
Muzaffarnagar pollution action के तहत टीम ने यह भी संकेत दिया कि जिन इकाइयों को पहले नोटिस जारी किए गए थे, उनकी विशेष निगरानी की जाएगी और दोबारा उल्लंघन पाए जाने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
🔴 स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया: राहत और उम्मीद
जानसठ रोड और बेगराजपुर क्षेत्र के निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से प्रदूषण के कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और पानी की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
Muzaffarnagar pollution action से उन्हें उम्मीद जगी है कि अब प्रशासन उनकी सेहत और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।
🔴 पर्यावरण संरक्षण की दिशा में संदेश
यह कार्रवाई केवल दो फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पूरे जिले के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह संदेश साफ है कि विकास और उद्योग जरूरी हैं, लेकिन पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की कीमत पर नहीं।
Muzaffarnagar pollution action ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब नियमों की अनदेखी करने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए जिले में कोई जगह नहीं है। पेपर मिल से लेकर अवैध लैड इंगट फैक्ट्री तक की गई यह सख्ती पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो आने वाले समय में जिले के औद्योगिक विकास को एक जिम्मेदार और टिकाऊ दिशा देने का संकेत बन रही है।
