Muzaffarnagar में उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रदूषण की शिकायतों के बीच लखनऊ से आई विभागीय अधिकारियों की टीम ने औचक निरीक्षण किया। जैसे ही यह सूचना फैली कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम शहर की एक प्रमुख पेपर मिल में पहुंच चुकी है, मिल संचालकों और औद्योगिक क्षेत्र में खलबली मच गई।
यह मामला केवल एक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विरोध, घेराव और हंगामे के चलते प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया।
जानसठ रोड की पेपर मिल में पहुंची टीम
चर्चा के अनुसार, मुजफ्फरनगर के नई मंडी क्षेत्र में जानसठ रोड स्थित एक पेपर मिल में सोमवार सुबह उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची थी। यह टीम विशेष रूप से लखनऊ से भेजी गई थी, जिससे यह संकेत मिला कि मामला गंभीर स्तर पर लिया जा रहा है।
निरीक्षण दल में चीफ प्रवीण कुमार, राधेश्याम, स्थानीय क्षेत्रीय अधिकारी गीतेश चंद्रा, जूनियर इंजीनियर संध्या शर्मा और राजकुमार शामिल थे। टीम का उद्देश्य मिल में निकलने वाले अपशिष्ट, कचरे और प्रदूषण मानकों की वास्तविक स्थिति की जांच करना था।
किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने किया घेराव
Muzaffarnagar pollution inspection के दौरान स्थिति उस समय बिगड़ गई जब भाकियू अराजनैतिक के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और टीम का घेराव कर लिया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि मिल प्रबंधन वास्तविक प्रदूषण को छिपा रहा है और दिखावटी सैंपलिंग कराई जा रही है।
चर्चा रही कि कार्यकर्ताओं ने फैक्ट्री परिसर के अंदर जाकर वास्तविक कचरे और अपशिष्ट के सैंपल लेने की मांग की। इसी दौरान धक्का-मुक्की और छीना-झपटी की स्थिति बन गई, जिसमें कथित तौर पर सैंपल बैग फट गए।
निरीक्षण अधूरा, टीम को लौटना पड़ा
हंगामे और विरोध के चलते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम अपना निरीक्षण पूरा नहीं कर सकी। Muzaffarnagar pollution inspection बीच में ही बाधित हो गया और टीम को बिना किसी ठोस कार्रवाई के लौटना पड़ा।
औद्योगिक क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई कि यदि निरीक्षण पूरा हो जाता, तो मिल पर बड़ी कार्रवाई संभव थी। इसी कारण पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
15 किलोमीटर तक किया गया पीछा, बढ़ा तनाव
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। बताया जाता है कि विरोध के बाद भी भाकियू अराजनैतिक के कार्यकर्ताओं ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम का करीब 15 किलोमीटर तक पीछा किया। टीम के काफिले को मेरठ रोड स्थित मूलचंद रिसॉर्ट तक फॉलो किया गया।
इस दौरान अधिकारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। हालात को देखते हुए अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी तत्काल लखनऊ में उच्चाधिकारियों और शासन स्तर पर साझा की।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, टीम को दी सुरक्षा
Muzaffarnagar pollution inspection से जुड़े घटनाक्रम की सूचना मिलते ही मंसूरपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम को सुरक्षा मुहैया कराई और एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसान संगठन के कार्यकर्ता वापस लौट गए। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
प्रदूषण और उद्योगों पर फिर उठे सवाल
Muzaffarnagar pollution inspection की यह घटना एक बार फिर जिले में औद्योगिक प्रदूषण के मुद्दे को केंद्र में ले आई है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि कुछ उद्योग लंबे समय से पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे जल, वायु और भूमि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
वहीं, उद्योग पक्ष का कहना है कि वे नियमों के तहत ही संचालन कर रहे हैं और किसी भी जांच से नहीं डरते, लेकिन निरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
शासन तक पहुंचा मामला, आगे की कार्रवाई पर नजर
सूत्रों के अनुसार, लखनऊ स्तर पर इस पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Muzaffarnagar pollution inspection के अधूरे रहने के बाद शासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आगे क्या कदम उठाते हैं।
संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही दोबारा निरीक्षण या विशेष जांच टीम भेजी जा सकती है, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
मुजफ्फरनगर में प्रदूषण को लेकर हुआ यह घटनाक्रम केवल एक निरीक्षण की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासन, उद्योग और जनसंगठनों के बीच बढ़ते टकराव का संकेत है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सख्ती बढ़ेगी या विवाद और गहराएगा।
