Muzaffarnagar। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर ज़िले में बिजली विभाग को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया। क्रांतिसेना महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष पूनम चौधरी के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आने के बाद गुस्साए कार्यकर्ताओं ने न केवल बिजलीघर का घेराव किया, बल्कि एसडीओ (SDO) के खिलाफ जबरदस्त नारेबाज़ी भी की। इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है और अब विभागीय कार्रवाई की मांग जोर पकड़ चुकी है।
बिजलीघर में गूंजे नारे, महिला मोर्चा अध्यक्ष के सम्मान पर बवाल
सूत्रों के अनुसार, पूनम चौधरी ने अपने निवास स्थान पर चेक मीटर लगाए जाने का अनुरोध किया था। आरोप है कि कुकड़ा मंडी स्थित बिजलीघर पर तैनात जेई (Junior Engineer) ने इस दौरान उनसे अनुचित व्यवहार किया। मामला यहीं नहीं थमा, बल्कि जेई के कथित अभद्र रवैये के विरोध में पार्टी के 50 से अधिक पदाधिकारी बिजलीघर पर एकत्रित हो गए और जमकर हंगामा किया।
एसडीओ का घेराव और कार्रवाई की मांग
गुस्साए पदाधिकारियों ने बिजलीघर का घेराव कर एसडीओ से तुरंत कार्रवाई की मांग की। मौके पर माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि नारेबाज़ी लगातार तेज़ होती रही। महिला मोर्चा पदाधिकारियों का आरोप था कि महिला नेतृत्व के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस बीच, स्थिति को शांत कराने के लिए एक्सईएन (XEN) विद्युत विभाग ने फोन पर ही पदाधिकारियों से बातचीत की और जल्द ही कार्रवाई का आश्वासन दिया।
क्रांतिसेना नेताओं ने चेताया: असम्मान बर्दाश्त नहीं
घटना से पहले ही क्रांतिसेना के शीर्ष पदाधिकारी – अध्यक्ष ललित मोहन शर्मा, महासचिव संजीव शंकर और वरिष्ठ नेता प्रमोद अग्रवाल ने कार्यालय में पदाधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर महिला मोर्चा अध्यक्ष के साथ अभद्रता हुई है तो यह पूरे संगठन का अपमान है और इसका जवाब संगठन स्तर पर दिया जाएगा।
उनका कहना था कि “जो लोग महिलाओं का सम्मान नहीं कर सकते, उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी।”
बड़े नेताओं की मौजूदगी से बढ़ा आंदोलन का प्रभाव
इस विरोध प्रदर्शन में कई नामी नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे। मंडल अध्यक्ष शरद कपूर, शिवसेना जिला प्रमुख बिट्टू सिखेड़ा, क्रांतिसेना महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष पूनम चौधरी, महानगर अध्यक्ष देवेंद्र चौहान, संजिव वर्मा, नरेंद्र ठाकुर, अमित गुप्ता, बृजपाल कश्यप, उज्ज्वल पंडित, आशीष मिश्रा, भवन मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद, रूपराम, शैलेंद्र विश्वकर्मा, ललित रहेला, अंजू त्यागी, पूनम चल, राखी प्रजापति, मोनिका प्रजापति, सुमन, मीनू शर्मा प्रजापति, अनीता प्रजापति, अनिल चौधरी, सुनील प्रजापति, राजन वर्मा, चेतन देव विश्वकर्मा समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और महिला नेता भी वहां डटी रहीं।
मुजफ्फरनगर में बिजली विभाग पर क्यों भड़की जनता?
मुजफ्फरनगर ज़िले में बिजली विभाग को लेकर लंबे समय से असंतोष देखा जा रहा है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में आए दिन बिजली की समस्या को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। कभी बिजली कटौती, कभी मीटरिंग सिस्टम, तो कभी बिलिंग विवाद – इन सब मुद्दों ने विभाग की छवि पर सवाल खड़े किए हैं।
महिला मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि अगर विभाग समय रहते पारदर्शिता और शिष्टाचार अपनाए तो इस तरह की नौबत ही न आए।
महिला नेतृत्व और सम्मान का मुद्दा
भारत में राजनीति और सामाजिक आंदोलनों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। लेकिन अगर महिला नेताओं को उनके पद पर रहते हुए भी अभद्रता का सामना करना पड़े, तो यह चिंता का विषय है। पूनम चौधरी जैसी जिला अध्यक्ष का मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि महिला नेतृत्व के सम्मान का प्रतीक है। यही कारण है कि आंदोलन ने तेज़ी पकड़ी और व्यापक समर्थन मिला।
क्या होगी अगली कार्रवाई?
अब देखना यह होगा कि एक्सईएन और एसडीओ इस मामले पर कितनी सख्ती दिखाते हैं। क्रांतिसेना ने साफ कर दिया है कि अगर शीघ्र ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि संगठन आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी में है।
मुजफ्फरनगर में बिजली विभाग से जुड़ा यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष पूनम चौधरी के साथ हुए कथित अभद्र व्यवहार को लेकर संगठन के नेताओं का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। अगर विभाग ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में मुजफ्फरनगर में और बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।