Muzaffarnagar Ram Janmotsav celebration ने 22 जनवरी 2026 को पूरे नगर को भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक गौरव के रंग में रंग दिया। अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के आगमन के दो वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर, भारतीय कॉलोनी स्थित श्री मनकामनेश्वर महादेव मंदिर में भगवान श्रीराम जी का जन्मोत्सव अत्यंत भव्यता और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि समाज को जोड़ने वाला आध्यात्मिक उत्सव बन गया, जिसमें हर वर्ग, हर आयु और हर परिवार ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
🔴 मंदिर परिसर में भक्ति की लहर, जय श्रीराम के जयघोष
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, “जय श्रीराम” के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। फूलों से सजा मंदिर, दीपों की पंक्तियां और धूप-दीप की सुगंध ने माहौल को अलौकिक बना दिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा नगर अयोध्या की दिव्य अनुभूति से जुड़ गया हो।
मंदिर प्रांगण में भक्तों ने कतारबद्ध होकर दर्शन किए और भगवान श्रीराम के चरणों में अपनी आस्था और कृतज्ञता अर्पित की।
🔴 महिलाओं का भक्तिमय कीर्तन, गूंजे राम भजन
कार्यक्रम की एक विशेष झलक नगर की श्रद्धालु महिलाओं द्वारा प्रस्तुत सुंदर और भक्तिमय कीर्तन रहा। समूह में गाए गए राम भजन और आरती ने पूरे परिसर को भक्ति-रस में डुबो दिया। ढोलक, मंजीरा और ताली की ताल पर जब “राम नाम” गूंजा, तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
महिलाओं की इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि धार्मिक परंपराएं केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाला सांस्कृतिक सेतु हैं।
🔴 56 भोग का भव्य अर्पण, परंपरा और श्रद्धा का संगम
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अरुण मिश्रा जी ने भगवान श्रीराम को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए। इस भोग में पारंपरिक मिठाइयों से लेकर मौसमी फलों और विशेष व्यंजनों तक, हर प्रसाद में श्रद्धा और परंपरा की झलक दिखाई दी।
भोग अर्पण के समय पूरा मंदिर मंत्रोच्चार और शंखनाद से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन के सौभाग्यपूर्ण क्षणों में से एक बताया।
🔴 अयोध्या राम मंदिर की वर्षगांठ पर भावनात्मक संदेश
इस अवसर पर संजय मिश्रा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और लोकार्पण हुआ, जो सभी सनातनियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और आस्था का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में राम के आदर्शों—सत्य, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा—को अपनाएं।
🔴 नगर के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में नगर के अनेक प्रतिष्ठित नागरिक और श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रमुख रूप से अंकित मिश्रा, विनायक मिश्रा, व्यापारी नेता संजय मिश्रा, रमन शर्मा, रोहित शर्मा, रवि शर्मा, सुभाष शर्मा, दीपक शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, प्रीति शर्मा, मुनेश शर्मा, गरिमा गोयल, पूजा सिंह, प्रिया मिश्रा, रितिका मिश्रा, निशा शर्मा, अजय गर्ग, वरुण गर्ग, मनोहर लाल वर्मा, संजय सिंघल, पी.के. अग्रवाल, अशोक गर्ग, अनुज उपाध्याय, प्रमोद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
हर किसी के चेहरे पर भक्ति और उल्लास की झलक साफ दिखाई दे रही थी।
🔴 आरती और प्रसाद वितरण, श्रद्धालुओं में उत्साह
सांयकालीन बेला में भगवान श्रीराम की भव्य आरती की गई। दीपों की रोशनी और शंखनाद के बीच श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की। इसके बाद सभी को 56 भोग का प्रसाद वितरित किया गया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि प्रसाद ग्रहण करते समय उन्हें आत्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हुई।
🔴 गोधूलि बेला में दीप प्रज्वलन का संकल्प
इस पावन अवसर पर एक विशेष और भावनात्मक संकल्प लिया गया। सभी श्रद्धालुओं ने यह वचन दिया कि वे गोधूलि बेला में पांच दीपक अपने निकटवर्ती मंदिर में और पांच दीपक अपने घरों में प्रज्वलित करेंगे। इस प्रतीकात्मक पहल का उद्देश्य धर्म, संस्कृति और सद्भावना के प्रकाश को समाज के हर कोने तक पहुंचाना बताया गया।
यह संकल्प बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी ने उत्साहपूर्वक लिया।
🔴 सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश
Muzaffarnagar Ram Janmotsav celebration केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने आपस में मिलकर संवाद किया, परिवारों ने एक-दूसरे के साथ समय बिताया और समाज में सौहार्द का माहौल देखने को मिला।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल आस्था मजबूत होती है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सहयोग की भावना भी बढ़ती है।
🔴 युवाओं के लिए प्रेरणा का मंच
कई युवाओं ने कहा कि उन्हें इस आयोजन से अपने सांस्कृतिक मूल्यों को समझने और अपनाने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन अनुशासन, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की सीख देता है, जो आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गया है।
🔴 नगर में उत्सव का माहौल, हर गली में राम नाम
पूरे दिन नगर की गलियों में भजन, कीर्तन और जयकारे सुनाई देते रहे। घरों के बाहर दीपों की सजावट और मंदिरों में भक्तों की भीड़ ने यह दिखा दिया कि यह उत्सव केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे मुजफ्फरनगर में फैल गया।
श्री मनकामनेश्वर महादेव मंदिर में मनाया गया यह श्रीराम जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का उत्सव बन गया। अयोध्या में रामलला के आगमन की दूसरी वर्षगांठ पर उठी यह भक्ति की लहर मुजफ्फरनगर के हर घर और हर हृदय तक पहुंची, जहां दीपों की रोशनी के साथ राम के आदर्शों का संदेश भी जन-जन में प्रज्वलित हुआ।
