मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar)महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा को लेकर राज्य महिला आयोग अब केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहता। जिले में आयोजित जनसुनवाई के दौरान यह साफ संदेश दिया गया कि यदि महिलाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही बरती गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय मानी जाए। लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में आयोजित इस जनसुनवाई में राज्य महिला आयोग की सदस्य सपना कश्यप ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया।


🔴 जनसुनवाई में महिलाओं ने रखी अपनी पीड़ा

पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आईं महिलाओं ने खुलकर अपनी समस्याएं सामने रखीं। घरेलू हिंसा, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, विभागीय लापरवाही और सहायता न मिलने जैसे मामलों को लेकर कुल 14 नई शिकायतें आयोग के समक्ष दर्ज की गईं।

हर फरियादी की बात को गंभीरता से सुनते हुए आयोग सदस्य ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को संबंधित फाइलें सौंपीं और निर्देश दिए कि किसी भी मामले को लंबित न रखा जाए।


🔴 समयबद्ध निस्तारण के निर्देश, देरी पर नाराजगी

सपना कश्यप ने साफ कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में देरी केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि पीड़िताओं के साथ अन्याय है। उन्होंने पहले से लंबित मामलों की भी समीक्षा की और कई प्रकरणों में अनावश्यक विलंब पर कड़ी नाराजगी जताई।

उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई न होने पर इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। जनसुनवाई के दौरान माहौल गंभीर रहा और आयोग की मंशा साफ नजर आई कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि परिणाम चाहिए।


🔴 बाल विवाह मुक्त अभियान पर जोरदार अपील

जनसुनवाई के दौरान आयोग सदस्य ने बाल विवाह मुक्त भारत के 100 दिवसीय अभियान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ सबसे बड़ा अपराध है।

उन्होंने जिले के नागरिकों से आह्वान करते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर को इस सामाजिक कुरीति से पूरी तरह मुक्त करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग का दायित्व है। यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन या महिला आयोग को सूचित किया जाए।


🔴 “बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

सपना कश्यप ने दो टूक शब्दों में कहा कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ-साथ कठोर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।

उनका कहना था कि समाज तभी सुरक्षित बनेगा जब महिलाएं और बच्चे भयमुक्त वातावरण में जीवन जी सकें।


🔴 कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस समीक्षा और जनसुनवाई बैठक में महिला कल्याण, पुलिस, आपूर्ति, श्रम, स्वास्थ्य, बेसिक शिक्षा और कारागार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी को निर्देश दिए गए कि आपसी समन्वय के साथ मामलों का निस्तारण किया जाए, ताकि पीड़िताओं को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

अधिकारियों को यह भी कहा गया कि जनसुनवाई में आए मामलों की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से आयोग को भेजी जाए।


🔴 महिला आयोग की सक्रियता से बढ़ी उम्मीदें

जनसुनवाई के बाद कई महिलाओं ने राहत महसूस की और उम्मीद जताई कि अब उनकी शिकायतों पर वास्तव में कार्रवाई होगी। आयोग की इस सक्रियता को महिला अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम के अंत में जिला परिवीक्षा अधिकारी ने सभी अधिकारियों, फरियादियों और आयोग सदस्य का आभार व्यक्त किया।


मुजफ्फरनगर में हुई यह जनसुनवाई साफ संकेत देती है कि महिला सुरक्षा और बाल अधिकारों को लेकर अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रशासन, आयोग और समाज—तीनों की साझा जिम्मेदारी ही महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य की नींव रख सकती है।

 



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