मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar) में विद्युत विभाग की लापरवाही की वजह से एक लाइनमैन को करंट लगने से गंभीर चोटें आई हैं। यह हादसा जिले के कोतवाली क्षेत्र के मिंलाना रोड पर हुआ। जहां एक विद्युत लाइनमैन, जो उम्र में काफी बुजुर्ग था, को अपनी जान की कीमत पर विभागीय काम करने की भारी कीमत चुकानी पड़ी। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया, बल्कि विद्युत विभाग के अधिकारियों की लापरवाही पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।

घटना की पूरी जानकारी

यह घटना उस समय हुई जब जनपद मुजफ्फरनगर के मिंलाना रोड पर एक विद्युत लाइन खराब हो गई थी। इस लाइन को सुचारु करने के लिए विभाग ने एक लाइनमैन, उमर दराज पुत्र सरफराज को भेजा था। उमर दराज, जो नयाजुपुरा का निवासी है, ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विद्युत लाइन की मरम्मत के लिए मौके पर पहुंचकर कार्य प्रारंभ किया। इसके लिए उन्होंने पहले विभाग से शटडाउन लिया था, ताकि मरम्मत का काम बिना किसी खतरे के किया जा सके।

लेकिन, जैसे ही उमर दराज काम पूरा कर रहा था और पोल से नीचे उतरने ही वाला था, अचानक विद्युत सप्लाई चालू हो गई। इस कारण वह करंट की चपेट में आ गया और पोल से गिर पड़ा। वह झुलसते हुए जमीन पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया।

मौके पर न पहुंची विभागीय टीम

इस हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचित किया। साथ ही विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी मामले की जानकारी दी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, विभागीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। इस लापरवाही ने स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े हादसे के बावजूद उच्च अधिकारियों का मौके पर न पहुंचना, एक गंभीर लापरवाही का संकेत है।

इलाज और स्थिति

घटना के तुरंत बाद, पुलिस ने घायल लाइनमैन को जिला अस्पताल भेजा। जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे मेरठ के हायर सेंटर रेफर कर दिया। इस समय उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

विद्युत विभाग की जिम्मेदारी

यह घटना विद्युत विभाग की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाती है। जहां एक ओर विभाग को सुरक्षा उपायों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए, वहीं दूसरी ओर यहां एक लाइनमैन की जान जोखिम में डाली गई। अब यह सवाल उठता है कि जब एक लाइनमैन को काम करने के लिए शटडाउन लिया गया था, तो फिर विद्युत सप्लाई कैसे अचानक चालू हो गई? क्या यह विभाग की घोर लापरवाही नहीं है?

विभागीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण मिले। ऐसे हादसे विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक असर डालते हैं और जनता का विश्वास कमजोर करते हैं।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं

घटना के बाद स्थानीय लोगों में जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला। उनका कहना था कि जब किसी कर्मचारी की जान संकट में होती है, तो विभागीय अधिकारी उनके साथ खड़े नहीं होते। इसके बजाय, वे कार्यकर्ताओं को खुद की सुरक्षा की चिंता किए बिना काम पर भेजते हैं। यह घटना स्थानीय समाज में भी चर्चा का विषय बन गई है। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या विभाग सिर्फ अपना काम करने में ही लगा रहता है या फिर कर्मचारियों की सुरक्षा की कोई अहमियत भी है?

विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण होने वाले हादसों की बढ़ती संख्या

यह पहली बार नहीं है जब विद्युत विभाग की लापरवाही से किसी कर्मचारी को जान का खतरा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई हादसे सामने आ चुके हैं, जहां कर्मचारियों को लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर कम ही जाता है, जिसके कारण इस तरह के हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

क्या होगी विभागीय कार्रवाई?

घटना के बाद, स्थानीय पुलिस और विभागीय कर्मचारी इस हादसे की जांच कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी बात की जा रही है। हालांकि, अब तक इस मामले में किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मामले की गहन जांच की जाए और दोषियों को सजा दी जाए।

मुजफ्फरनगर में घटित यह दर्दनाक हादसा विद्युत विभाग की घोर लापरवाही का एक उदाहरण है। इसमें कोई संदेह नहीं कि विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न घटित हों। इस तरह की घटनाएं न केवल कर्मचारियों के लिए खतरनाक होती हैं, बल्कि यह समाज में विभाग की छवि को भी धक्का पहुंचाती हैं। अब देखना यह है कि क्या विद्युत विभाग इस घटना से कोई सबक लेता है और कर्मचारियों के लिए सुरक्षा मानकों में सुधार करता है या यह मामला केवल एक और विवाद बनकर रह जाएगा।



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