Muzaffarnagar molasses policy को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से जिला आबकारी अधिकारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनपद की सभी चीनी मिलों के प्रभारी आबकारी निरीक्षक, उप आबकारी निरीक्षक और मिल प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक का केंद्र बिंदु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित शीरा नीति 2025–26 के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना था।


🔴 सरकार के निर्देशों पर आधारित अहम बैठक

यह बैठक अपर मुख्य सचिव (आबकारी) एवं शीरा नियंत्रक तथा आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के आदेशों के क्रम में बुलाई गई थी। साथ ही जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन में इसे औपचारिक रूप दिया गया।

Muzaffarnagar molasses policy को लेकर यह साफ संदेश दिया गया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी चीनी मिलों को तय समयसीमा के भीतर सभी दायित्व पूरे करने होंगे।


🔴 शीरा नीति 2025–26 के प्रमुख प्रावधान

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मिल प्रतिनिधियों को शीरा नीति 2025–26 के सभी नियमों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी। विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि पिछले वर्ष के अवशेष और नए वर्ष की आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य होगा।

स्पष्ट निर्देश दिया गया कि शीरा वर्ष 2024–25 के अवशेष आरक्षित शीरे की देयता को हर हाल में 31 जनवरी 2026 तक शून्य किया जाए। इसमें किसी भी तरह की देरी पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।


🔴 भंडारण और निकासी पर सख्त नियंत्रण

Muzaffarnagar molasses policy के तहत यह भी तय किया गया कि प्रथम त्रैमास में कुल देय आरक्षित शीरे का कम से कम 25 प्रतिशत सम्भरण कराया जाए। इसके साथ ही आरक्षित और अनारक्षित शीरे के बीच 1:4.55 के निकासी अनुपात का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा।

यह अनुपात इसलिए तय किया गया है ताकि शराब निर्माण, औद्योगिक उपयोग और अन्य जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अनियमितता न हो।


🔴 जिन मिलों की क्षमता अधूरी, उन्हें तत्काल कार्रवाई के आदेश

बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ चीनी मिलों की शीरा भंडारण क्षमता अभी भी अधूरी है। ऐसी मिलों को तुरंत प्रशमन (Mitigation) के लिए सहमति पत्र जमा कराने के निर्देश दिए गए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

Muzaffarnagar molasses policy के तहत भंडारण को सबसे संवेदनशील मुद्दा माना गया है, क्योंकि यहीं से अवैध निकासी और गड़बड़ियों की शुरुआत होती है।


🔴 एमएफ-4 गेटपास और QR कोड पर विशेष जोर

अधिकारियों ने चीनी मिलों को निर्देश दिया कि वे एमएफ-4 गेटपास समय से प्राप्त कर इस कार्यालय को सूचित करें। इसके अलावा शीरा के हर परिवहन के दौरान परिवहन पास (एमएफ-4) के साथ एक प्रिंटेड क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से लगाया जाए।

यह क्यूआर कोड A-4 साइज के पेपर पर प्रिंट कर संबंधित वाहन पर चस्पा किया जाएगा, ताकि किसी भी समय वाहन और शीरा की वैधता की डिजिटल जांच की जा सके।


🔴 अवैध शीरा परिवहन पर लगेगी लगाम

Muzaffarnagar molasses policy का मुख्य उद्देश्य अवैध शीरा परिवहन और चोरी को रोकना है। क्यूआर कोड और डिजिटल ट्रैकिंग से अब हर खेप पर नजर रखी जा सकेगी, जिससे शराब माफिया और अवैध कारोबारियों की गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

पुलिस और आबकारी विभाग मिलकर हर ट्रांसपोर्ट को स्कैन कर सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।


🔴 जिले की अर्थव्यवस्था में शीरा का महत्व

मुजफ्फरनगर को उत्तर प्रदेश की चीनी राजधानी कहा जाता है। यहां की चीनी मिलों से निकलने वाला शीरा केवल शराब उद्योग ही नहीं बल्कि केमिकल, फार्मा और ईंधन उद्योगों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में Muzaffarnagar molasses policy का सही क्रियान्वयन जिले की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व दोनों के लिए बेहद अहम है।


Muzaffarnagar molasses policy 2025–26 को लेकर हुई यह बैठक प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है, जहां पारदर्शिता, समयबद्धता और सख्त निगरानी के जरिए चीनी मिलों और शीरा कारोबार को एक सुव्यवस्थित ढांचे में लाने का स्पष्ट संदेश दिया गया है।



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