Muzaffarnagar: हाल ही में रैपिड रेल (आरआरटीएस) परियोजना के विस्तार को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों द्वारा लगाए गए आरोपों पर भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान (Sanjeev Balyan) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। डा. बालियान ने कहा कि सपा सांसद द्वारा रैपिड रेल विस्तार को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह से झूठे और आधारहीन हैं।
रैपिड रेल परियोजना का महत्व
रैपिड रेल परियोजना उत्तर प्रदेश के मेरठ से मुजफ्फरनगर तक परिवहन व्यवस्था को सुधारने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह परियोजना न केवल यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास और आर्थिक प्रगति को भी बढ़ावा देगी। लेकिन इस परियोजना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चरम पर है।
संजीव बालियान का बयान
डा. संजीव बालियान (Sanjeev Balyan)ने गांधीनगर स्थित भाजपा जिला कार्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि 13 जनवरी 2020 को रैपिड रेल को मेरठ से मुजफ्फरनगर तक चलाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। इस प्रस्ताव के दौरान प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिलदेव, पूर्व मंत्री स्व. विजय कश्यप, तत्कालीन विधायक उमेश मलिक, पूर्व विधायक विक्रम सिंह, और पूर्व विधायक प्रमोद उटवाल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए विशेष सचिव अमित सिंह को निर्देश दिए थे।
परियोजना की प्रक्रिया और प्रशासनिक अनुमतियाँ
29 जनवरी 2020 को प्रमुख सचिव आवास को रैपिड रेल परियोजना के प्रशिक्षण और अग्रिम कार्यवाही हेतु पत्र लिखा गया। इसके बाद, 30 जुलाई 2020 को रैपिड रेल को मुजफ्फरनगर तक विस्तार के लिए हरदीप सिंह पुरी, आवास और शहरी मामलों के राज्यमंत्री को पत्र लिखा गया। 17 सितंबर 2020 को हरदीप सिंह पुरी ने डीपीआर के लिए 80 प्रतिशत धनराशि उपलब्ध कराने पर सहमति दी। संजय कुमार सिंह, आवास और शहरी नियोजन विभाग ने रैपिड रेल के एमडी को पत्र लिखकर एक सप्ताह में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
21 जुलाई 2022 को नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ आरआरटीएस गाड़ियों का विस्तार मुजफ्फरनगर तक कराने के लिए सहमति दी और 20 प्रतिशत शुल्क सरकार द्वारा देने की स्वीकृति दी। 20 जनवरी 2023 को योगेन्द्र सक्सैना, कार्यकारी निदेशक वित्त आरआरटीएस ने विस्तृत रिपोर्ट के लिए 23 करोड़ 42 लाख रुपये जारी करने का अनुरोध किया। 9 जनवरी 2024 को एमडीए ने बजट को जारी कर दिया। एनसीआरटीसी के अधिकारियों ने डीपीआर का प्रस्तुतिकरण केंद्र और प्रदेश सरकार के समक्ष किया।
राजनीतिक विवाद और सपा-भाजपा का टकराव
रैपिड रेल परियोजना के संबंध में भाजपा और सपा के बीच तीखा राजनीतिक संघर्ष देखने को मिल रहा है। सपा के सांसदों का आरोप है कि भाजपा सरकार ने इस परियोजना की प्रगति में बाधा डाली है और झूठे वादे किए हैं। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि सपा के आरोप निराधार हैं और केवल राजनीतिक लाभ के लिए उठाए गए हैं। प्रेसवार्ता के दौरान डा. संजीव बालियान (Sanjeev Balyan) ने माना कि मुजफ्फरनगर जिलें में सपा वाले बाप बेटे की सरकार ही काम कर रही है.
सामाजिक छवि और फर्जी वादे
इस विवाद में सामाजिक छवि और फर्जी वादों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। राजनीति में अक्सर इस तरह के आरोप और वादे सामने आते हैं, जो जनता को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। भाजपा और सपा दोनों ही इस मुद्दे पर अपनी सामाजिक छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि सपा ने केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस मुद्दे को उठाया है, जबकि सपा का कहना है कि भाजपा ने जनता के हितों की अनदेखी की है।
संजीव बालियान और प्रमुख नेताओं की भूमिका
डा. संजीव बालियान (Sanjeev Balyan) ने इस मुद्दे पर केवल अपनी स्थिति ही स्पष्ट नहीं की, बल्कि अन्य प्रमुख नेताओं की भूमिका का भी उल्लेख किया। प्रेसवार्ता में भाजपा के जिलाध्यक्ष डा. सुधीर सैनी, पूर्व जिलाध्यक्ष देवव्रत त्यागी, भाजपा नेता गौरव स्वरूप, जिला पंचायत अध्यक्ष डा. वीरपाल निर्वाल, समाजसेवी सत्यप्रकाश रेशू, और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। लेकिन उन्होने डा. संजीव बालियान के समर्थन में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। मौके पर मौजूद भाजपा नेताओं की यह हालत देखकर खुद डाण् संजीव बालियान भी हक्के बक्के रह गये।
रैपिड रेल परियोजना एक महत्वपूर्ण विकासात्मक कदम है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद जारी है। इस परियोजना के पूरा होने से मुजफ्फरनगर और मेरठ के बीच यात्रा की सुगमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, वर्तमान राजनीतिक स्थिति और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह देखना होगा कि इस परियोजना की प्रगति पर इसका क्या असर पड़ता है। जनता को उम्मीद है कि इस विवाद को शीघ्र सुलझाया जाएगा और रैपिड रेल परियोजना की वास्तविक प्रगति को लेकर सच्चाई सामने आएगी।
चुनावी हार के बाद के Sanjeev Balyan
डा. संजीव बालियान (Sanjeev Balyan) की हाल की चुनावी हार के बाद, उनकी पूर्ववर्ती छवि पर कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। चुनावी परिणामों ने दर्शाया कि उनकी प्रगति और पूर्व प्रदर्शन पर व्यापक चर्चा हो रही है। हार के समय, उनके व्यक्तित्व और व्यवहार पर कई लोगों ने ध्यान आकर्षित किया, विशेषकर उनके आत्म-समर्पण और गर्वीले रवैये के संदर्भ में। इस दौरान, पत्रकारों को उनसे मिलने की अनुमति भी सीमित कर दी गई थी।इसका नजारा आज प्रेसवार्ता में देखने को मिला जब वे पत्रकारो के सवालो के जवाब में बार बार उखडते रहे और उनका स्टेटमेन्ट भी अव्यवस्था के बीच पत्रकारो को उपलब्ध नहीं हो पाया। हालांकि, अब चुनावी परिणामों के बाद स्थिति में बदलाव आया है। डा. बालियान ने अपनी हार को एक अवसर के रूप में लिया है, और उन्होंने अपने पूर्ववर्ती कार्यों और दृष्टिकोण की समीक्षा शुरू की है। यह नया दृष्टिकोण उनकी सार्वजनिक छवि को पुनः संवारने और समाज के विभिन्न वर्गों से बेहतर संवाद स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
