Muzaffarnagar: पंजाब नेशनल बैंक की हनुमान चौक शाखा में एक बेहद विवादास्पद घटना सामने आई है। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें जमीन पर पड़ी मिलीं। यह घटना न केवल बैंक की छवि को प्रभावित कर रही है, बल्कि आम जनता के बीच भारी नाराजगी भी पैदा कर रही है।
दो नागरिक, विनय पवार और दीपक पुंडीर, जिन्होंने शाखा में यह स्थिति देखी, ने तस्वीरें खींचकर स्थानीय पुलिस और बैंक प्रबंधन को सूचित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल बैंक की लापरवाही नहीं, बल्कि उच्च पदस्थ अधिकारियों की जिम्मेदारी से चूक को भी उजागर करता है।
शाखा प्रबंधक की भूमिका और गार्ड निलंबन
शाखा प्रबंधक सुनील कुमार ने मामले में कार्रवाई करते हुए बैंक सुरक्षा गार्ड अशोक कुमार को निलंबित कर दिया। अशोक कुमार एक सेवानिवृत्त सैनिक हैं और सामान्य परिस्थितियों में उनका व्यवहार अनुशासित माना जाता है। लेकिन इस मामले में उनकी जिम्मेदारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रबंधक मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने विनय और दीपक को ‘अवांछित तत्व’ तक कहने की कोशिश की। इससे बैंक प्रबंधन के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्राहकों की नाराजगी और जांच की मांग
विनय पवार और दीपक पुंडीर ने एसएसपी से मिलने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सीसीटीवी फुटेज की जांच करके यह पता लगाया जाना चाहिए कि तस्वीरें कब से जमीन पर पड़ी थीं।
शिकायतकर्ताओं ने निलंबित गार्ड को तुरंत बहाल करने की मांग की है। इसके अलावा, यदि जांच में शाखा प्रबंधक दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की गई है।
PNB बैंक स्टाफ के रवैये पर सवाल
इस विवाद ने PNB बैंक के स्टाफ के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे न केवल ग्राहकों को सम्मान दें, बल्कि शाखा में मौजूद राष्ट्रीय प्रतीकों और तस्वीरों का सम्मान भी करें।
हालांकि अशोक कुमार एक सेवानिवृत्त सैनिक हैं, लेकिन गार्डिंग के दौरान उनकी सतर्कता और जिम्मेदारी पर सवाल उठना लाजिमी है। शाखा प्रबंधक सुनील कुमार का आरोपियों को ‘अवांछित तत्व’ कहना बैंक प्रशासन की गंभीरता और संवेदनशीलता पर भी संकेत देता है।
लोकप्रिय प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर हलचल
जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर बैंक के खिलाफ नाराजगी की लहर दौड़ गई। लोगों ने मांग की कि राष्ट्रीय नेताओं की तस्वीरों के साथ ऐसे असम्मानजनक व्यवहार पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना केवल मुजफ्फरनगर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम की छवि को प्रभावित कर सकती है। यह दर्शाता है कि कर्मचारियों और प्रबंधकों में जागरूकता और जवाबदेही की कितनी कमी है।
भविष्य के लिए सख्त कदम जरूरी
विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि PNB जैसी प्रतिष्ठित बैंक को अब स्टाफ प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रोटोकॉल, और जिम्मेदारी का महत्व बढ़ाने के लिए कदम उठाने होंगे। ऐसा न होने पर भविष्य में इस तरह की घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
बैंक के प्रबंधन और कर्मचारियों की छवि को सुधारने के लिए निगरानी, नियमित ऑडिट और कर्मचारियों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
विस्तार से देखें: बैंकिंग सिस्टम की जवाबदेही
यह घटना यह भी दर्शाती है कि ग्राहक और नागरिक जागरूक रहें तो ही ऐसी घटनाओं का समय पर पता चल सकता है। अगर विनय पवार और दीपक पुंडीर जैसी सतर्कता नहीं होती, तो तस्वीरों के साथ यह असम्मान लंबे समय तक छिपा रह सकता था।
PNB जैसे राष्ट्रीय बैंक की शाखाओं में ग्राहक सेवा और जिम्मेदारी सर्वोपरि होनी चाहिए। केवल निलंबन और शिकायत दर्ज करने से समस्या का समाधान नहीं होगा; इसके लिए सख्त निगरानी और कर्मचारी प्रशिक्षण अनिवार्य है।
मुजफ्फरनगर PNB बैंक विवाद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और जिम्मेदारी कितनी अहम है। नागरिकों की सतर्कता, शाखा प्रबंधक की जवाबदेही और कर्मचारियों के अनुशासन की जांच अब आवश्यक है। यदि सही समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घटना केवल मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश में बैंकिंग प्रतिष्ठान की छवि पर प्रश्न चिन्ह लगा सकती है।