मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar) मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र के गांव मोरना में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। बुधवार की शाम से लापता 38 वर्षीय मनोज का शव गुरुवार की सुबह गांव के पास स्थित जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इस घटना ने न केवल मनोज के परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है, बल्कि गांववासियों के बीच भी भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

गायब होने की कहानी: आखिरी बार कब देखा गया था मनोज?

बुधवार, 19 मार्च 2025 की बात है। मनोज के पिता संतरपाल और उनका परिवार खेती का काम मजदूरी पर करता है। उस दिन परिवार के सदस्य मोरना स्थित गौशाला के जंगल में गन्ने की बुआई के लिए गए थे। काम खत्म होने के बाद, सभी सदस्य घर लौट रहे थे। मनोज अपनी बाइक से पहले घर की ओर निकला। लेकिन जब बाकी सदस्य घर पहुंचे, तो मनोज वहां नहीं था। उसका मोबाइल भी बंद था, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई। रातभर मनोज की तलाश की गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।

शव की बरामदगी: कैसे मिला मनोज का शव?

गुरुवार की सुबह, मनोज के चचेरे भाई सतेंद्र और अन्य परिजन उसकी तलाश में जुटे थे। गौशाला मार्ग के किनारे, पिंटू वाल्मीकि के गेहूं के खेत के पास एक गड्ढे में मनोज का शव पड़ा मिला। उसकी बाइक भी क्षतिग्रस्त हालत में पास ही पड़ी थी। यह खबर गांव में आग की तरह फैल गई, और देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। आसपा नेता संजय रवि और ग्राम प्रधान सर्वेंद्र राठी भी वहां पहुंचे। सूचना पर थाना प्रभारी निरीक्षक उमेश रोरिया और मोरना चौकी इंचार्ज ललित राजपूत ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: कौन-कौन है मनोज के परिवार में?

मनोज अपने पीछे पत्नी सोनिया, दो बेटियां नैना और सलोनी, और एक बेटा सुधांशु को छोड़ गया है। उसके पिता संतरपाल, माता तारावती, भाई प्रदीप और प्रमोद, और बहन पविता का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में शोक की लहर है, और हर कोई इस दुखद घटना से स्तब्ध है।

पुलिस की जांच: क्या है अब तक की प्रगति?

पुलिस के अनुसार, अभी तक कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

मोरना में बढ़ते हादसे: क्या है इसके पीछे का कारण?

मोरना और आसपास के क्षेत्रों में हाल के दिनों में सड़क हादसों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। तेज रफ्तार, खराब सड़कें, और यातायात नियमों की अनदेखी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

ग्रामीणों की चिंता: सुरक्षा के उपाय क्या हैं?

लगातार हो रहे हादसों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। वे चाहते हैं कि प्रशासन सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाए, सड़क सुधार कार्य करे, और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे। साथ ही, ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय सड़क पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

समाज की भूमिका: हम क्या कर सकते हैं?

सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। हम सभी को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करना चाहिए, और तेज रफ्तार से बचना चाहिए। साथ ही, हमें सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक होना चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।

निष्कर्ष: कब रुकेगा यह मौत का सिलसिला?

मनोज की मौत ने एक बार फिर से सड़क सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया है। यह समय है कि हम सभी मिलकर इस दिशा में काम करें, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। मनोज के परिवार के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं, और हम प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस कठिन समय में strength मिले।



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