Morna /Muzaffarnagar  ग्राम बेहड़ा सादात में एक अनुकरणीय पहल देखने को मिली, जहां पर्व की धार्मिक भावना के साथ-साथ स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी पूरे गांव में गूंजता नजर आया। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस विशेष सफाई अभियान ने न केवल गांव की तस्वीर बदली, बल्कि ग्रामीणों के मन में स्वच्छ और स्वस्थ जीवन की नई प्रेरणा भी जगा दी।


✨ ग्राम प्रधान की पहल से शुरू हुआ स्वच्छता का अभियान

इस अभियान की अगुवाई ग्राम प्रधान ने स्वयं की। उनका उद्देश्य साफ था—पर्व के मौके पर केवल पूजा-पाठ और परंपराओं तक सीमित न रहते हुए, गांव को स्वच्छ, सुंदर और रोगमुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना। सुबह से ही गांव की गलियों में सफाई कर्मियों और ग्रामीणों की टोली दिखाई देने लगी, जो झाड़ू, फावड़ा और कचरा निस्तारण के साधनों के साथ अभियान में जुट गए।

ग्राम प्रधान ने मौके पर मौजूद रहकर पूरे सफाई कार्य की निगरानी की। उन्होंने कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और यह सुनिश्चित किया कि हर गली, हर मोड़ और हर सार्वजनिक स्थल की सफाई पूरी गंभीरता से की जाए।


🧹 गलियों से नालियों तक गहन सफाई

Morna Makar Sankranti cleanliness drive के दौरान गांव की मुख्य सड़कों, संकरी गलियों और नालियों की विशेष रूप से गहन सफाई कराई गई। लंबे समय से जमा कूड़ा-कचरा हटाया गया और उसका उचित निस्तारण सुनिश्चित किया गया।

नालियों में जमी गंदगी और कीचड़ को साफ कर जलभराव की समस्या से राहत दिलाने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से न केवल दुर्गंध से छुटकारा मिलेगा, बल्कि मच्छरों और अन्य संक्रामक बीमारियों के खतरे में भी कमी आएगी।


🤝 श्रमदान से बनी सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल

इस अभियान की खास बात यह रही कि ग्रामीणों ने केवल दर्शक बनकर नहीं, बल्कि स्वयं श्रमदान कर इसमें भाग लिया। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी हाथों में झाड़ू और तसले लेकर सफाई करते दिखाई दिए।

गांव के युवाओं ने इसे एक सामाजिक उत्सव का रूप दे दिया। कहीं समूह बनाकर कचरा एकत्र किया जा रहा था, तो कहीं नालियों की सफाई में मदद की जा रही थी। इस सामूहिक प्रयास ने गांव में एकता और सहयोग की भावना को और मजबूत किया।


🗣️ ग्राम प्रधान का संदेश: स्वच्छता से ही स्वस्थ जीवन

ग्राम प्रधान ने सफाई अभियान के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि मकर संक्रांति केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि यह नई शुरुआत और सकारात्मक सोच का प्रतीक भी है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने घरों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित रूप से साफ-सफाई बनाए रखें।

उन्होंने यह भी कहा कि कूड़ा-कचरा निर्धारित स्थान पर ही डालें और प्लास्टिक व गंदगी फैलाने से बचें। स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ समाज की नींव होता है, और इसके लिए हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।


🌱 स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता

ग्रामीणों ने इस पहल की खुलकर सराहना की। उनका कहना है कि ऐसे विशेष अभियान गांव को न केवल साफ-सुथरा बनाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक करते हैं। स्वच्छता से संक्रामक बीमारियों का खतरा कम होता है और बच्चों व बुजुर्गों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार होता है।

कई ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि यदि Morna Makar Sankranti cleanliness drive जैसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं, तो गांव को पूरी तरह स्वच्छ और मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जा सकता है।


🏡 गांव की बदली हुई तस्वीर, नई ऊर्जा का संचार

अभियान के अंत तक गांव की गलियों और रास्तों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी। साफ सड़कें, खुली नालियां और कचरे से मुक्त सार्वजनिक स्थल गांव की नई पहचान बनते नजर आए।

ग्रामीणों के चेहरों पर संतोष और गर्व की झलक साफ दिखाई दी। यह केवल सफाई अभियान नहीं था, बल्कि एक सामूहिक संकल्प था—स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का।


🙏 आभार और भविष्य की योजनाएं

अभियान के समापन पर ग्राम प्रधान ने सभी ग्रामीणों और सफाई कर्मियों का धन्यवाद किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम और स्वच्छता अभियान आयोजित किए जाएंगे, ताकि गांव लगातार स्वच्छ और स्वस्थ बना रहे।

उन्होंने कहा कि गांव की प्रगति केवल विकास कार्यों से नहीं, बल्कि लोगों की सोच और सहभागिता से होती है, और यह अभियान उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।


मोरना के ग्राम बेहड़ा सादात में मकर संक्रांति के दिन चला यह स्वच्छता अभियान केवल सफाई का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बनकर उभरा। झाड़ू की हर लकीर के साथ गांव ने एक नया संकल्प लिया—स्वस्थ, स्वच्छ और सशक्त भविष्य की ओर बढ़ने का, जहां हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी को गर्व के साथ निभाए।



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