Muzaffarnagar जिले में Shahpur temple attack ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। थाना शाहपुर क्षेत्र में शिव मंदिर के महंत पर जानलेवा हमला करने और मंदिर में स्थापित भगवान कार्तिकेय की मूर्ति को खंडित करने की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। इस मामले में पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए तीन वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है।
🔴 शाहपुर में मंदिर पर हमला: क्या है पूरा मामला
यह घटना 16 फरवरी की बताई जा रही है, जब थाना शाहपुर क्षेत्र स्थित एक शिव मंदिर में अचानक हिंसा भड़क उठी। मंदिर के महंत पुष्कर नाथ ने पुलिस को दी गई लिखित तहरीर में आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय युवक मंदिर पहुंचे और उनके साथ पहले गाली-गलौच शुरू की। जब महंत ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने लाठी-डंडों से उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
Shahpur temple attack की गंभीरता यहीं नहीं रुकी। आरोप है कि हमलावरों ने तमंचे से फायरिंग करते हुए जान से मारने की धमकी दी और मंदिर परिसर में स्थापित भगवान कार्तिकेय की मूर्ति को खंडित कर दिया। इस घटना ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया, बल्कि इलाके में तनाव का माहौल भी बना दिया।
🔴 किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना शाहपुर पुलिस ने मु0अ0सं0 45/2026 के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। इनमें जानलेवा हमला, धमकी, धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाना और शांति भंग करने से संबंधित धाराएं शामिल की गईं।
Shahpur temple attack को देखते हुए पुलिस ने इसे संवेदनशील मामला मानते हुए तत्काल विशेष टीम का गठन किया, ताकि आरोपी किसी भी सूरत में फरार न हो सकें।
🔴 फरार होने की कोशिश में दबोचे गए आरोपी
गठित पुलिस टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए ग्राम हरसौली जाने वाले रास्ते पर पुलिया के पास से तीनों वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। बताया गया कि आरोपी कहीं भागने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते उन्हें समय रहते पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान सोहनवीर उर्फ पिंटू पुत्र धर्मसिंह, अजय पुत्र तेजवीर (निवासी ग्राम हरसौली, थाना शाहपुर) और अरुण उर्फ कलुआ पुत्र राजवीर (निवासी ग्राम लच्छेड़ा, थाना मंसूरपुर) के रूप में हुई है।
🔴 पूछताछ में बड़ा खुलासा
Shahpur temple attack मामले में प्रारंभिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे मंदिर के महंत से नाराज थे और उन्हें वहां से हटाना चाहते थे। इसी मंशा से उन्होंने 16 फरवरी को महंत के साथ मारपीट की, फायरिंग की और मंदिर की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह बयान मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि हमला पूर्व नियोजित था और इसका उद्देश्य डर फैलाना व दबाव बनाना था।
🔴 वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में सख्त कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र के निर्देशन में, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में की गई। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आदित्य बंसल, क्षेत्राधिकारी बुढाना गजेंद्रपाल सिंह और थानाध्यक्ष शाहपुर गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इस संवेदनशील मामले को अंजाम तक पहुंचाया।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक विकास चौधरी, अभिषेक गुप्ता, कांस्टेबल ललित भाटी और साबिर अली शामिल रहे।
🔴 धार्मिक सौहार्द पर हमला, इलाके में पुलिस सतर्क
Shahpur temple attack के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनावपूर्ण स्थिति को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों और धर्मगुरुओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों पर हिंसा समाज में नफरत और असुरक्षा को बढ़ावा देती है।
🔴 कानून व्यवस्था का सख्त संदेश
इस गिरफ्तारी से पुलिस ने साफ संकेत दिया है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा से खिलवाड़ और संत-महंतों पर हमले किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। Shahpur temple attack के आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है और मामले की गहन जांच जारी है।
शाहपुर मंदिर हमला प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के प्रतीकों पर हमला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक शांति पर सीधा वार है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से जहां लोगों में भरोसा बढ़ा है, वहीं यह भी संदेश गया है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से समझौता करने वालों को कानून के कठोरतम प्रावधानों का सामना करना पड़ेगा।
