Muzaffarnagar में सिंचाई विभाग द्वारा नवनिर्मित सड़कों की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी सुमित मलिक पिछले चार दिनों से जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं।


🔴 सिंचाई विभाग कीि की सड़कों पर गंभीर आरोप

Muzaffarnagar Road Corruption विवाद की जड़ सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित तीन सड़कें हैं, जिनकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि इन सड़कों के निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई, घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग हुआ और कागजों में भारी-भरकम भुगतान दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

समाजसेवी सुमित मलिक का कहना है कि सड़कों की हालत निर्माण के कुछ ही समय बाद खराब हो गई, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और गहरी हो जाती है। उनका आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला गया।


🔴 भूख हड़ताल चौथे दिन भी जारी, प्रशासन से टकराव

Muzaffarnagar Road Corruption के विरोध में सुमित मलिक बीते चार दिनों से जिलाधिकारी कार्यालय पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रशासन की ओर से कई बार समझाने-बुझाने की कोशिश की गई, चिकित्सकीय जांच भी कराई गई, लेकिन ठोस कार्रवाई का भरोसा न मिलने के कारण आंदोलन समाप्त नहीं हुआ।

सुमित मलिक का स्पष्ट कहना है कि जब तक दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े।


🔴 सिटी मजिस्ट्रेट की वार्ता भी रही बेनतीजा

शनिवार देर शाम सिटी मजिस्ट्रेट पंकज राठौर धरना स्थल पर पहुंचे और सुमित मलिक से बातचीत की। उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह करते हुए प्रशासनिक जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन लिखित और ठोस कार्रवाई की समय-सीमा न मिलने के कारण सुमित मलिक अपनी मांगों पर अड़े रहे।

Muzaffarnagar Road Corruption मामले में प्रशासन की यह असमर्थता अब आम जनता के बीच सवाल बनती जा रही है।


🔴 आंदोलन को मिला सामाजिक संगठनों का समर्थन

सुमित मलिक की भूख हड़ताल को अब विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों का समर्थन मिल रहा है। धरना स्थल पर पर्यावरण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास दीक्षित सहित जितेंद्र कोच, हिमांशु चौधरी, अंकित मलिक पीनना, गौरव पवार, अंकित, अनुज सागर, हरेंद्र मलिक बिट्टू पीनना, सुबोध पवार और पुष्पेंद्र चौधरी जैसे कई लोग पहुंचे और आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाई।

समर्थकों का कहना है कि Muzaffarnagar Road Corruption केवल सड़कों का मामला नहीं, बल्कि यह जनधन की लूट और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा है।


🔴 जनता में रोष, जांच की मांग तेज

जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में बनी इन सड़कों को लेकर आम नागरिकों में भी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और बरसात में हालात और बदतर हो जाते हैं।

Muzaffarnagar Road Corruption को लेकर नागरिकों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों को सार्वजनिक रूप से चिन्हित किया जाए और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जाए।


🔴 प्रशासन पर बढ़ता दबाव, आंदोलन के विस्तार की चेतावनी

सुमित मलिक ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो प्रदेश स्तर पर इस मुद्दे को उठाया जाएगा और अन्य जिलों के सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा जाएगा।

Muzaffarnagar Road Corruption अब स्थानीय मुद्दे से निकलकर एक बड़े जनहित आंदोलन की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है।


मुजफ्फरनगर सड़क भ्रष्टाचार का यह मामला प्रशासनिक कार्यशैली, विभागीय पारदर्शिता और जनहित की वास्तविक प्रतिबद्धता की परीक्षा बन चुका है। भूख हड़ताल पर बैठे सुमित मलिक का संघर्ष अब केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ आवाज है, जहां विकास के नाम पर गुणवत्ता और ईमानदारी से समझौता करने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।

 



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