Muzaffarnagar में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने मंगलवार को जिला अस्पताल पहुंचकर दुर्घटना में घायल हुए श्रमिकों का हाल-चाल जाना और उपचार व्यवस्था की समीक्षा की। अस्पताल वार्डों में जाकर उन्होंने भर्ती सभी घायलों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनकी सेहत, इलाज और सुविधाओं की जानकारी ली।


🔴 अस्पताल में व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी घायलों का उपचार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मरीजों को आवश्यक दवाइयां, जांच और चिकित्सीय सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि मरीजों को अनावश्यक परेशान न किया जाए और उपचार से जुड़ी हर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए।


🔴 मजदूरी के लिए निकले थे श्रमिक, हादसे ने बदली दिशा

अस्पताल में भर्ती घायलों और उनके परिजनों से बातचीत के दौरान सामने आया कि सभी श्रमिक रोज़ की मजदूरी के लिए निकले थे। यह जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को और गंभीरता से लिया। श्रमिक वर्ग से जुड़े लोगों के लिए यह दुर्घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उनके जीवन और आजीविका पर गहरा असर डालने वाली घटना बन गई है।


🔴 कहां और कैसे हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हादसा जानसठ तहसील क्षेत्र के ग्राम गुर्जरहेड़ी के पास हुआ। सठेड़ी चौराहे से नहर पटरी मार्ग पर मेरठ की ओर जा रहा एक पिकअप वाहन सामने से आ रहे डंपर से आमने-सामने टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप में सवार कई महिला और पुरुष श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।


🔴 महिला श्रमिक भी घायल, स्थिति पर खास नजर

इस दुर्घटना में महिला श्रमिकों के घायल होने की सूचना ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। जिलाधिकारी ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि महिला मरीजों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाए और जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी घायल की हालत गंभीर होती है, तो बिना देरी किए उसे उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।


🔴 प्रशासन के तीन अहम निर्देश

जिलाधिकारी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को तीन अहम निर्देश जारी किए—

  • सभी घायलों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए।

  • गंभीर मरीजों को समय रहते रेफर कर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए।

  • सड़क दुर्घटना के कारणों की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इन निर्देशों के माध्यम से प्रशासन ने यह संकेत दिया कि मामले को औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाएगा।


🔴 दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने की जरूरत

यह हादसा एक बार फिर नहर पटरी मार्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है। मजदूरी के लिए सफर करने वाले श्रमिक अक्सर ऐसे मार्गों का उपयोग करते हैं, जहां भारी वाहनों की आवाजाही भी रहती है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की जांच के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।


🔴 परिजनों को मिला प्रशासनिक भरोसा

जिलाधिकारी के अस्पताल पहुंचने से घायलों के परिजनों को भी राहत मिली। उन्होंने परिजनों को आश्वस्त किया कि प्रशासन इलाज को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी स्तर पर कमी नहीं आने दी जाएगी। इस दौरान अस्पताल प्रशासन को भी निर्देश दिए गए कि परिजनों को समय-समय पर मरीजों की स्थिति की जानकारी दी जाए।


🔴 मानवीय संवेदनशीलता का संदेश

प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि सड़क हादसों में घायल लोग केवल आंकड़े नहीं होते, बल्कि उनके पीछे परिवार और जिम्मेदारियां होती हैं। इसी सोच के साथ प्रशासन उपचार व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहा है।


मुजफ्फरनगर में हुए इस सड़क हादसे के बाद जिला प्रशासन की सक्रियता ने यह संदेश दिया है कि घायल श्रमिकों का इलाज केवल औपचारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद दुर्घटना के कारणों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए कौन-से कदम उठाए जाते हैं।

 




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