सिखेड़ा। Muzaffarnagar क्षेत्र की चित्तौड़ा झाल पर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी देने और उन्हें जागरूक करने के लिए एक दिवसीय किसान मेला एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मेले में लगभग 400 किसानों ने भाग लिया और नई कृषि तकनीकों, फसल अवशेष प्रबंधन, जैविक खेती, उन्नत बीज और कृषि यंत्रों की जानकारी हासिल की।

🌾 मेले का उद्घाटन और कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौम्या पांडे ने किया, जबकि उद्घाटन ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व के बारे में जानकारी दी और उन्हें जागरूक किया कि फसल अवशेष जलाने के बजाय उसे खेत में ही गलाने से अधिक लाभ हो सकता है

📢 किसानों को दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव

मेले में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक और पर्यावरण हितैषी तरीकों के बारे में बताया। इस दौरान डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. सौम्या पांडे, डॉ. पूजा, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. संजीव कुमार और डॉ. उत्तम राठी ने किसानों को महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।

🔹 फसल अवशेष जलाने से खेत की उर्वरता कम होती है और मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होता है
🔹 पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे मानव स्वास्थ्य को भी खतरा होता है
🔹 फसल अवशेषों को खेत में ही गलाने से जैविक खाद बनती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है
🔹 पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक मशीनों जैसे सुपर सीडर, रीपर बाइंडर और हैपी सीडर के उपयोग की सलाह दी गई
🔹 सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए चलाई जा रही योजनाओं और सब्सिडी पर भी जानकारी दी गई

🛠️ कृषि यंत्र, सोलर सिस्टम और पेस्टिसाइड्स के 25 स्टाल लगे

मेले में कृषि यंत्रों, बीज संयंत्र, सोलर सिस्टम, पेस्टिसाइड्स और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़े 25 स्टाल लगाए गए थे। किसानों ने इन स्टालों पर जाकर नवीनतम कृषि उपकरणों की जानकारी ली और अपने सवालों के जवाब प्राप्त किए।

💬 किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद

गोष्ठी के दौरान किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच बीजों की गुणवत्ता, जल प्रबंधन, जैविक खेती, उन्नत तकनीक और खाद प्रबंधन को लेकर चर्चा हुई। किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किया।

🎭 सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झलका ग्रामीण परिवेश

मेले में किसानों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी भरपूर आनंद मिला। इस दौरान रागिनी जैसे पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किए गए, जिससे मेले का माहौल और भी जीवंत हो गया।

👨‍🌾 कौन-कौन रहा शामिल?

इस मेले में क्षेत्र के प्रमुख किसान कल्याण सिंह, सरदार जंग सिंह, राजवीर सिंह, हरफूल, विपिन, भूषण, बाबूराम, सोपाल, सत्येंद्र, शरणवीर, योगेंद्र सहित लगभग 400 किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों ने इस मेले की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से उन्हें खेती के नए-नए तरीकों को समझने का अवसर मिलता है

🚜 सरकार के समर्थन और योजनाओं की जानकारी

कृषि विभाग ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन योजनाओं और सरकारी सब्सिडी की जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि कैसे वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी कृषि पद्धति को और उन्नत बना सकते हैं

📌 कृषि वैज्ञानिकों का संदेश – “फसल अवशेष जलाना छोड़ें, पर्यावरण बचाएं!”

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि वे पराली और अन्य फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उन्हें जैविक तरीके से उपयोग करें। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि खेत की उत्पादकता भी बढ़ेगी।

🔍 किसान मेले का महत्व

किसानों को उन्नत खेती के तरीकों की जानकारी मिलती है
फसल अवशेष जलाने के दुष्प्रभाव और उसके समाधान पर जानकारी साझा की जाती है
नई कृषि तकनीकों, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं के बारे में किसानों को जागरूक किया जाता है
किसानों को कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है

🔴  जागरूक किसान, समृद्ध खेती!

सिखेड़ा में आयोजित यह किसान मेला किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक साबित हुआ। इस तरह के आयोजन किसानों को जागरूक करने और उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। आने वाले समय में इस तरह के और भी मेले आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसान संपन्न और आत्मनिर्भर बन सकें



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