मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar News): प्रेम, शांति और मानवता के प्रतीक संत निरंकारी मिशन का तीन दिवसीय 77वां वार्षिक निरंकारी संत समागम इस बार 16 से 18 नवंबर, 2024 तक मनाया जाएगा। यह भव्य आयोजन संत निरंकारी मिशन के मुख्य केंद्र समालखा (हरियाणा) में होगा, जो हर साल श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव होता है। समागम के इस 77वें संस्करण की प्रमुख विशेषता यह है कि इस बार भी समागम में लाखों श्रद्धालु भाग लेने के लिए अपनी यात्रा पर निकल चुके हैं, और आयोजक इस विशाल आयोजन को भव्य रूप से सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत में जुटे हैं।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और आदरणीय निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन मार्गदर्शन में होने वाले इस समागम में हर वर्ष की तरह विभिन्न संस्कृतियों और सभ्यताओं के श्रद्धालु एकत्र होंगे। यह समागम न केवल आध्यात्मिक आनंद का संचार करता है, बल्कि सामाजिक सद्भावना और वैश्विक भाईचारे का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
समागम की भव्य तैयारियाँ और आकर्षक आयोजन
इस बार का समागम और भी भव्य और आकर्षक रूप में होने जा रहा है। समागम परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया है, और विभिन्न स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं ताकि लाखों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु मंच पर होने वाले हर कार्यक्रम को स्पष्ट रूप से देख सकें। समागम का आयोजन स्थल चार प्रमुख भागों में बाँटा गया है: ए, बी, सी और डी ग्राउंड। इनमें से ए ग्राउंड को मुख्य सत्संग स्थल, निरंकारी प्रदर्शनी और प्रशासनिक विभागों के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं, बाकी ग्राउंड्स को श्रद्धालुओं के लिए रिहायशी टैंट और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए विशेष रूप से सजाया गया है।
समागम में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है। आयोजकों ने समागम के हर कोने में स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए समर्पित सेवादल कार्यकर्ताओं को तैनात किया है, जो पूरे परिसर में दिन-रात अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आनंद का संगम
यह समागम न केवल एक आध्यात्मिक सभा है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक महाकुम्भ भी है। यहां विभिन्न प्रांतों और देशों के लोग एकत्र होकर अपने रीति-रिवाजों और संस्कृतियों का आदान-प्रदान करते हैं। इस भव्य आयोजन में श्रद्धालु अपने सतगुरु के प्रवचन सुनने के साथ-साथ एक दूसरे से प्रेम और शांति की भावना का आदान-प्रदान करते हैं। आयोजकों के अनुसार, इस समागम में संप्रदाय, जाति और धर्म से ऊपर उठकर एकता, भाईचारे और प्रेम का संदेश दिया जाता है।
इस साल समागम में आध्यात्मिक प्रवचन और सतगुरु के दर्शन का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु हर वर्ष की तरह इस समागम के दौरान संत निरंकारी मिशन के दिव्य संदेशों को आत्मसात करने का अवसर प्राप्त करेंगे। यह समागम न केवल आध्यात्मिक अनुभव है, बल्कि इसमें भाग लेने वाले लाखों लोग एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ अपने जीवन की यात्रा पर निकलते हैं।
लक्ष्य – मानवता की सेवा और शांति का प्रसार
संत निरंकारी मिशन का मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना और शांति का प्रसार करना है। समागम के आयोजन में विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखा गया है कि हर व्यक्ति को यहां किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। पूरे समागम स्थल पर सामूहिक रचनात्मकता और समर्पण की भावना का स्पष्ट रूप से आभास होता है। इस समागम में भाग लेने वाले भक्तों का मानना है कि यही वह अवसर है जब वे अपने जीवन को शुद्ध और उन्नत बना सकते हैं, साथ ही मानवता की सेवा के रास्ते पर चल सकते हैं।
जनपद संयोजक हरीश कुमार ने बताया कि इस समागम के लिए तैयारियाँ जोरों पर हैं। विशेष रूप से संत निरंकारी मण्डल के सेवादल द्वारा दिन-रात सेवा की जा रही है। यह सेवादल समागम स्थल पर श्रद्धालुओं को भोजन, पानी, शरण और अन्य आवश्यक सेवाएँ प्रदान करता है।
निरंकारी मिशन: मानवता की तरफ एक कदम और
संत निरंकारी मिशन की स्थापना का उद्देश्य केवल धार्मिक पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता की सेवा, प्रेम और शांति का एक अद्वितीय माध्यम बन चुका है। यह मिशन हर किसी को एकत्व और भाईचारे का संदेश देता है। इस समागम में भाग लेने वाले हर व्यक्ति को यह अहसास होता है कि भले ही वह किसी भी धर्म, जाति या समाज से आता हो, लेकिन इंसानियत और प्रेम की भावना सभी में समान है। यही कारण है कि संत निरंकारी मिशन को विश्वभर में इतना सम्मान और लोकप्रियता प्राप्त है।
समागम के आयोजन के दौरान न केवल श्रद्धालु, बल्कि तमाम समाजिक संस्थाएँ और संगठन भी इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं, जिससे एक विशाल नेटवर्क तैयार होता है। इस समागम के माध्यम से समाज में प्रेम, शांति, और भाईचारे की भावना को प्रोत्साहित किया जाता है।
विशेष कार्यक्रम और गतिविधियाँ
इस साल समागम में विशेष ध्यान रखा जाएगा कि हर वर्ग के लोग, चाहे वे बच्चे हों, महिलाएँ हों या बुजुर्ग, सभी के लिए अलग-अलग गतिविधियाँ आयोजित की जाएं। इसके अलावा, समागम के दौरान संत निरंकारी मिशन के पदाधिकारी अपने अनुभव साझा करेंगे, और श्रद्धालु अपनी भक्ति के अनुभवों को आपस में बाँटेंगे। इसके अतिरिक्त, समागम में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन कीर्तन और विशेष प्रवचन भी होंगे।
समागम का समापन संत निरंकारी मिशन के सिद्धांतों के अनुसार प्रेम, शांति और मानवता की प्रेरणा के साथ होगा। समापन समारोह में लाखों श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा से एक नई शक्ति और ऊर्जा के साथ अपने घर लौटेंगे। यही वे पल होते हैं, जब भक्तों का विश्वास और श्रद्धा और भी मजबूत हो जाती है, और वे अपने जीवन में सद्गुणों को आत्मसात करने का संकल्प लेते हैं।
