Muzaffarnagar: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुनील तेवतिया ने जनपद में एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य न केवल कन्या भ्रूण हत्या को रोकना है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और बेटियों के प्रति समाज का दृष्टिकोण बदलना भी है। CMO Dr. Sunil Tewatia ने सभी सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्रसव केंद्रों को निर्देशित किया है कि वहां प्रथम संतान के रूप में जन्मी बेटी के नाम से पौधारोपण किया जाए।

यह कदम बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों को और मजबूती देगा। इसके साथ ही, यह संदेश देगा कि बेटी का जन्म एक उत्सव है और इसे वृक्षारोपण जैसे सतत विकास के प्रतीकात्मक कार्य से जोड़ा जा सकता है।


बालिका उपवन की अनूठी परिकल्पना

इस पहल के तहत, प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर ‘बालिका उपवन’ विकसित किया जाएगा। यहाँ हर बेटी के नाम पर पौधा लगाया जाएगा। इन पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों और स्थानीय समाज की होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा और समाज में बेटियों के महत्व को लेकर एक सकारात्मक संदेश फैलेगा।

डॉ. तेवतिया ने बताया, “जैसे बेटी बड़ी होगी, वैसे ही पौधा भी बड़ा होकर एक वृक्ष का रूप लेगा। इससे बेटी और उसके परिवार का वृक्ष से भावनात्मक लगाव बढ़ेगा। यह पहल बेटियों के प्रति लोगों की सोच में बदलाव लाने का प्रयास है।”


स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण और साफ-सफाई पर जोर

CMO Dr. Sunil Tewatia  ने चरथावल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बिरालसी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, और आरोग्य मंदिर बिरालसी का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्रों की सफाई, अग्निशमन यंत्रों की स्थिति, औषधियों के रखरखाव, और कोल्ड चैन की व्यवस्था का बारीकी से परीक्षण किया।

स्वास्थ्य केंद्रों की सफाई और संसाधनों के प्रबंधन में लापरवाही को लेकर सख्त निर्देश दिए गए। उन्होंने विशेष रूप से अग्निशमन यंत्रों को कार्यशील रखने और औषधियों को सही तापमान पर स्टोर करने पर बल दिया।


कन्या भ्रूण हत्या पर सख्त संदेश

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए समाज को जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा, “बेटियों को शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या न केवल एक अपराध है, बल्कि यह समाज के लिए एक बड़ा अभिशाप भी है। हमें यह समझने की जरूरत है कि बेटी और बेटा दोनों समाज के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।”


स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान

इस पहल को सफल बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य मेलों का आयोजन होगा, जिसमें बेटियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के महत्व को बताया जाएगा। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण के महत्व पर भी चर्चा की जाएगी।

डॉ. तेवतिया ने बताया कि यह योजना केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। इसके लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे स्थानीय समुदाय को इस पहल में शामिल करें।


सकारात्मक प्रतिक्रिया और समाज में बदलाव की उम्मीद

इस पहल को लेकर स्थानीय समुदाय और स्वास्थ्य कर्मियों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात कर्मचारी इस योजना को सफल बनाने के लिए उत्साहित हैं। वहीं, समाज के लोग भी इस पहल को लेकर जागरूक हो रहे हैं।

चरथावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी अधिकारी, डॉ. सतीश कुमार, ने कहा, “यह पहल समाज को एक नई दिशा देगी। बेटियों के जन्म को सम्मानित करने का यह तरीका न केवल समाज में बेटियों की स्थिति को बेहतर करेगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभदायक होगा।”


पर्यावरण और समाज के लिए एक नई सोच

यह पहल न केवल समाज को बेटियों के महत्व के प्रति जागरूक करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगी। बालिका उपवन जैसे नवाचार से समाज को बेटियों और वृक्षों के बीच संबंध समझने का मौका मिलेगा।

डॉ. सुनील तेवतिया का यह प्रयास आने वाले समय में एक मिसाल बन सकता है। यह पहल समाज में बेटी बचाने, बेटी पढ़ाने, और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के विचारों को एक साथ जोड़ती है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी की यह पहल न केवल स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से, बल्कि समाज के हर कोने में जागरूकता फैलाने का एक सफल प्रयास साबित होगी।



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